भतीजे पर फिर से विश्वास जताया मायावती ने, बनाया राष्ट्रीय कोर्डिनेटर
चरण सिंह
बीएसपी मुखिया मायावती अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी आकाश आनंद को कभी पार्टी से आउट कर देती हैं तो कभी इन कर लेती हैं। ऐसे में दलित युवाओं का रुझान आज़ाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आज़ाद की ओर बढ़ रहा है। यदि आकाश आनंद को खुलकर राजनीति न करने दी गई तो इसका फायदा चंद्रशेखर आज़ाद को मिल सकता है। जिस तरह से उत्तर प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सपा से 200 सीटों की मांग कर है। ऐसे में सपा और कांग्रेस का गठबंधन टूट भी सकता है। वैसे भी धनराज नाथवानी को राज्यसभा प्रत्याशी बनाने पर कांग्रेस सपा से नाराज है। ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्य की तरह चंद्रशेखर आज़ाद भी कांग्रेस के साथ आ गए तो बसपा का खेल खत्म भी हो सकता है।
दरअसल बसपा मुखिया अपने भतीजे आकाश आनंद को कभी पार्टी से आउट कर देती हैं तो कभी इन कर सीधे राष्ट्रीय कोर्डिनेटर बना देती हैं। कभी राजनीतिक अपरिपक्व करार देती हैं तो कभी अपने ससुर के कहने पर चलने की बात करने लगती हैं। कभी अपने दूसरे भतीजे ईशान को आगे कर देती हैं तो कभी अपनी भतीजी दीपिका आनंद को। आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ के बाद खुद आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने के कुछ दिन बाद ही मायावती ने आकाश आनंद को फिर से पार्टी में ले लिया है और राष्ट्रीय कोर्डिनेटर भी बना दिया है।
दरअसल आकाश आनंद ने अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के निष्कासन को सही ठहराते हुए पार्टी मुखिया मायावती से माफ़ी मांग ली थी। मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के पार्टी से बाहर जाने पर आकाश के रुख में सकारात्मक परिवर्तन की बात कर पार्टी में वापस ले लिया है। साथ ही राष्ट्रीय कोर्डिनेटर भी बना दिया है ।भले ही आकाश आनंद परिवारवाद की देन हों पर वह बोलते तर्कों के साथ हैं। उनके भाषण में एक दलित चिंतक प्रतीत होता है। सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी पर वह जिस अंदाज में आक्रामक होते हैं वह देखने लायक होता है। गत लोकसभा चुनाव ने जिस अंदाज में उन्होंने बीजेपी को घेरना शुरू किया था। उनके अंदाज की तारीफ हो रही थी। अचानक मायावती ने उन्हें राजनीतिक रूप से अपरिपक्व बताते हुए पार्टी से बाहर कर दिया। तब यह माना गया था कि मायावती केंद्र सरकार के दबाव में हैं और गृह मंत्री अमित शाह की नाराजगी के चलते उन्होंने ऐसा किया था। दरअसल मायावती आकाश आनंद को खुलकर खेलने का मौका नहीं दे रही हैं। इसमें दो राय नहीं कि मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी आकाश आनंद ही हैं।
मायावती को चिंता है कि आक्रामक रुख के चलते कहीं बीजेपी आकाश आनंद को लपेट न दे। वैसे भी मायावती ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में दोनों हाथों से धन बटोरा है। उनके पास अथाह सम्पत्ति है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में बोल्ड मुख्यमंत्री रहीं मायावती बीजेपी के सामने भीगी बिल्ली बनी हुई हैं। उत्तर प्रदेश में अपने दम पर सरकार बनाने वाली मायावती आज की तारीख में एक विधायक के लिए तरस रही हैं। 2007 में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली मायावती लगातार अपना जनाधार खोती जा रही हैं।2014 में केंद्र तो 2017 में यूपी में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से मायावती की राजनीति हाशिये पर चली गई है। मायावती के हर मद्दे पर चुप्पी साध लेने पर उनके हाथ से उनका वोटबैंक खिसकता जा रहा है।
आज़ाद समाज पार्टी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद बीएसपी के वोटबैंक पर लगातार सेंध लगा रहे हैं। वह आकाश आनंद को अपना छोटा भाई भी बोल रहे हैं और बीएसपी पर निशाना भी साध रहे हैं। ऐसे में यदि मायावती का रुख यही रहा तो कहीं ऐसा न हो कि चंद्रशेखर आज़ाद उत्तर प्रदेश में मायावती से बड़ा दलित नेता बन जाए।







