उन्होंने लिखा कि वैसे नक्शा तो इस देश की किसी युनिवर्सिटी का पास नहीं है तो क्या सारे विश्वविद्यालयों पर बुलडोज़र चला दोगे ?? नक्शा तो इस देश के ज्यादातर DM ऑफिस का भी नहीं पास होगा तो क्या सब को ज़मींदोज़ कर दोगे ? कांग्रेस नेता ने लिखा कि ऐसे बेतुके और तानाशाही वाले आदेश पारित करते हुए इन अधिकारियों को सोचना चाहिये कि ये भी किसी एैसी ही युनिवर्सिटी से पढ़कर आये होंगे जहां का नक्शा नहीं पास होगा। शिक्षा के इतने बड़े संस्थान को बचाने के लिये सभ्य समाज को आगे आना होगा वरना ये ज़ालिम सरकारें कुछ भी महफ़ूज़ नहीं रहने देंगी।
वहीं, रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और इसी क्रम में जौहर विश्वविद्यालय की भी जांच की गई. उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय अवर अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया था। विश्वविद्यालय ने 8 जुलाई को अपना जवाब दाखिल किया, जबकि 15 जुलाई को दोनों पक्षों की मौजूदगी में व्यक्तिगत सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि ग्राम सिंगनखेड़ा, जहां विश्वविद्यालय स्थित है, 27 सितंबर 2024 से पहले रामपुर विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र में शामिल नहीं था. इसलिए आरडीए से नक्शा स्वीकृत कराने की आवश्यकता नहीं थी। साथ ही यह भी दलील दी गई कि अधिकांश निर्माण पुराने हैं और वर्तमान नियमों के आधार पर उन्हें अवैध नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, रामपुर विकास प्राधिकरण ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि भले ही यह क्षेत्र बाद में विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल हुआ हो, लेकिन निर्माण के समय भी संबंधित सक्षम प्राधिकारी से भवन निर्माण की अनुमति लेना अनिवार्य था।
प्राधिकरण ने बताया कि जिला पंचायत के अभिलेखों की जांच में केवल मेडिकल कॉलेज भवन और अकादमिक ब्लॉक के नक्शे स्वीकृत पाए गए. इसके अलावा परिसर के 38 अन्य भवनों के लिए किसी भी सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला।
रामपुर विकास प्राधिकरण ने इसे नियमों का उल्लंघन मानते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा 59 के तहत ऐसे मामलों में कार्रवाई की जा सकती है, भले ही संबंधित क्षेत्र बाद में विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में शामिल हुआ हो। आदेश में विश्वविद्यालय की ओर से मास्टर प्लान, जोनल प्लान और अधिनियम की विभिन्न धाराओं के आधार पर दिए गए कानूनी तर्कों पर भी विस्तार से विचार किया गया। प्राधिकरण ने निष्कर्ष निकाला कि इन प्रावधानों की गलत व्याख्या की गई है और किसी भी निर्माण की वैधता का आधार उस समय लागू कानून के अनुसार सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त स्वीकृति ही होती है।








