भारत की करीब 3 लाख मीट्रिक टन LPG (लिक्विड पेट्रोलियम गैस) वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसी हुई है, जो मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव (मुख्य रूप से ईरान-अमेरिका/इजरायल संघर्ष) के कारण हुआ है। ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर प्रभावी रूप से रोक लगा दी थी, जिससे कई जहाज फंस गए हैं। शिपिंग मंत्रालय के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने 17 मार्च 2026 को प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत ने ईरान के साथ बातचीत की है ताकि जहाजों को सुरक्षित निकासी (exit) मिल सके। सरकार का ‘एग्जिट प्लान’ डिप्लोमैटिक चैनलों के जरिए सुरक्षित पासेज सुनिश्चित करने पर आधारित है, जिसमें भारतीय नौसेना की मदद से जहाजों को एस्कॉर्ट करने की भी तैयारी है।
कुल फंसे भारतीय जहाजों में से कुछ निकल चुके हैं। उदाहरण के लिए:
भारतीय जहाज शिवालिक (Shivalik) ने होर्मुज स्ट्रेट पार कर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुंचकर करीब 45-46 हजार मीट्रिक टन LPG उतारी है। यह मात्रा लगभग 32-33 लाख घरेलू गैस सिलेंडर के बराबर है।
जहाज नंदा देवी (Nanda Devi) भी इसी तरह LPG लेकर पहुंच चुका या पहुंच रहा है (कुल मिलाकर इन दो जहाजों से करीब 92 हजार मीट्रिक टन LPG आई है)।
अभी भी 22 भारतीय जहाज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में फंसे हैं, जिनमें 6 LPG कैरियर शामिल हैं।
कुल फंसी LPG की मात्रा करीब 3 लाख मीट्रिक टन बताई जा रही है, जो भारत की घरेलू और इंडस्ट्रियल जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है (भारत अपनी 60% LPG जरूरत आयात करता है, और इसमें से 90% होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है)।
इस संकट से देश में LPG की कमी और पैनिक बुकिंग हुई थी, लेकिन अब कुछ राहत मिल रही है। सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आपूर्ति प्रबंधन के कदम उठाए हैं।






