बाबा के भेष में बढ़ती दरिंदगी, छात्रवृत्ति के नाम पर छात्राओं का यौन शोषण! 

चरण सिंह 

देश में साधु संत की वेशभूषा में कुछ भी करते रहो कोई देखने और बोलने वाला नहीं। ये प्रवचन भी देंगे। लग्जरी जिंदगी भी जिएंगे। विशेष सम्मान भी इन्हीं लोगों को चाहिए। इन पर कोई आरोप लगे तो इनके समर्थक इनके पक्ष में खड़े हो जाएंगे। वैसे इनको दुनियादारी से कोई मतलब नहीं पर सब धंधे भी इन लोगों को करने यहीं। अय्याशी भी करेंगे। महिलाओं की इज्जत से भी  खिलवाड़ करेंगे। शिक्षण संस्थान खोलकर छात्राओं का यौन शोषण भी करेंगे। इनका स्टाफ और समर्थक भी इनका साथ देने लगते हैं। इन बाबाओं के प्रति अंधभक्ति इतनी होती है कि आसाराम बापू, राम रहीम रामपाल के समर्थक दिल्ली जंतर मंतर पर लम्बे समय तक इन बाबाओं के पक्ष में बैठे रहे।
बाबाओं के प्रति लोगों में कितनी अंधभक्ति होती है। वह बागेश्वर बाबा के मामले में देख रहे हैं। गत दिनों हाथरस में जब एक बाबा के कार्यक्रम में भगदड़ मचने से 122 लोग मारे गए तो उनके कई परिजनों ने उनको मोक्ष मिलने की बात कही। आसाराम बापू और राम रहीम जैसे न जाने कितने बाबा दरिंदगी कर चुके हैं। अब देश की राजधानी दिल्ली के वसंत कुंज स्थित शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट में पढ़ने वाली 17 छात्राओं ने संस्थान के प्रबंधक स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी पर यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं।
छात्राओं का आरोप है कि स्वामी ने उन्हें अश्लील व्हाट्सएप और एसएमएस मैसेज भेजे, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जबरन छुआ और शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की। यह स्वामी फरार है। देखिये मामलों को कैसे दबा दिया जाता है कि विरोध करने पर संस्थान की महिला फैकल्टी और प्रशासनिक अधिकारी छात्राओं पर दबाव डालते थे कि वे चुप रहें और स्वामी की बात माने। मतलब ये लोग इस बाबा के छात्राओं के साथ किये जा रहे यौन शोषण में साथ दे रहे थे। यही होता है ऐसे मामलों में। इन बाबाओं से लाभ लेने वाले लोग पीड़ितों का साथ न देकर इन जैसे बाबाओं का साथ देने लगते हैं। क्योंकि मामला कई छात्राओं के साथ यौन शोषण का है। इसलिए दबाया नहीं जा सका नहीं तो न जाने कितने मामले दबा दिए जा रहे हैं।
 यह मामला तब उजागर हुआ जब 4 अगस्त को श्री श्रृंगेरी मठ के प्रशासक पी.ए. मुरली ने वसंत कुंज नॉर्थ थाने में शिकायत दर्ज कराई। गरीब बच्चों के साथ कैसे अत्याचार होता है इस मामले में भी स्पष्ट हो रहा है। स्वामी ने छात्रवृत्ति का लाभ उठाकर छात्राओं का यौन शोषण किया। यह संस्थान श्री शृंगेरी मठ से जुड़ा हुआ है, जो वसंत कुंज में स्थित है। स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी संस्थान के संचालक थे और खुद को भगवान बताते थे। वे फर्जी यूएन नंबर का इस्तेमाल कर घूमते थे। पहले भी उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं, लेकिन यह मामला सबसे गंभीर है। मठ ने स्पष्ट किया कि वे अब उनके साथ जुड़े नहीं हैं।
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