न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल का फैसला लागू करो, सरकारी तनख्वाह पाने वालों के बच्चों का सरकारी विद्यालय में पढ़ना अनिवार्य करो : संदीप पांडेय 

नई दिल्ली। सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया ) के राष्ट्रीय महासचिव संदीप पांडेय ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 21क के अनुसार शिक्षा अब बच्चे का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में खम्मम जिले के नारापनेनिपल्ले गांव के सरकारी विद्यालय में कीर्थना नामक सिर्फ एक लड़की पढ़ती है जिसे उमा पार्वती नामक शिक्षिका पढ़ाती है। इस विद्यालय पर तेलंगाना सरकार रु. 12 लाख सालाना खर्च करती है। जब किसी के मौलिक अधिकार की बात हो तब यह नहीं देखा जाता कि कितना पैसा खर्च हो रहा है। संदीप पांडेय का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जिन विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या 50 से कम है उनका नजदीक के विद्यालय के साथ युग्मन व विलयीकरण, बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। सरकार के अपने नियमों के मुताबिक प्राथमिक स्तर पर बच्चे के घर से विद्यालय की दूरी 1 कि.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। विलयीकरण के बाद कुछ बच्चों के लिए यह दूरी 1 कि.मी. से ज्यादा हो जाएगी। फिर मजबूर होकर अभिभावक बच्चों का दाखिला पास के किसी निजी विद्यालय में कराने की सोचेंगे। योगी सरकार का यह निर्णय निजी विद्यालयों को बढ़ावा देने जैसा प्रतीत होता है। पहले ही 2014-15 से 2023-24 तक 25,126 सरकारी विद्यालय बंद हो चुके हैं और आशंका है कि 10,000 से 27,000 विद्यालय युग्मन और विलयीकरण के तहत और बंद किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि इतने ब़ड़े पैमाने पर विद्यालय बंद करने का एकतरफा फैसला सरकार बिना विधान सभा में कोई बहस कराए ले रही है। दूसरी तरफ सरकार की आबकारी नीति के तहत शराब की दुकानें खोलने की खुली छूट है। बाराबंकी के असेनी गांव में शराब की दुकान बंद कराने के ग्राम पंचायत के 2021 के प्रस्ताव के बाद भी दुकान बंद नहीे हो रही और लोगों की राय लिए बिना विद्यालय बंद हो रहे हैं। विद्यालय बंद और शराब की दुकानें खोलने की खुली छूट – योगी आदित्यनाथ बताएं कि किस तरह का समाज बनाना चाहते हैं?
बरेली के शिक्षक रजनीश गंगवार जब कविता पढ़ते हैं कि ’कांवड़ लेके मत जाना, तुम ज्ञान की दीप जलाना’ तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो जाता है। क्या योगी आदित्यनाथ चाहते हैं कि प्रदेश का युवा अनपढ़, शराब के नशे में कावंड़ ही ढोए? आखिर, भारतीय जनता पार्टी के कितने नेताओं, सांसद, विधायक के बेटे कांवड़ यात्राओं में जाते हैं?
उन्होंने कहा कि सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) मांग करती है कि 2015 का न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल का फैसला लागू हो और सरकारी तनख्वाह पाने वाले या सरकार से लाभन्वित होने वाले सभी लोगों के बच्चे सरकारी विद्यालयों में अनिवार्य रूप से पढ़ें। यदि ऐसा होता है तो सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता सुधर जाएगी और बच्चों का पंजीकरण अपने आप बढ़ जाएगा। फिर सरकारी विद्यालयों को बंद करने की बात कोई नहीं करेगा। यदि सरकारी विद्यालय चलेंगे तभी प्रदेश के हरेक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाएगी जो उसका मौलिक अधिकार है।

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