देश में एक तरफ खुले में नमाज तो दूसरी ओर गाय की कुर्बानी को लेकर सियासत शुरू हो गई है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सड़क नमाज पढ़ने के लिए नहीं है। नमाज को शिफ्ट में पढ़ा जा सकता है, वहीं बकरीद से पहले कोलकाता हाईकोर्ट ने एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा है कि गाय की कुर्बानी त्योहार का हिस्सा नहीं है। इन सब पर तमाम दलों की ओर से बयान सामने आ रहे हैं। नीतीश कुमार की पार्टी (जेडीयू) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा है कि बदलते दौर में गाय पर राजनीति कोई विषय नहीं है। गाय राष्ट्रीय पशु घोषित होगा या नहीं ये केंद्र सरकार का मसला है, लेकिन गाय तो सम्मान का विषय है।
संविधान में सबको अपनी बात करने का हक
उन्होंने कहा, “अगर बकरीद में कुर्बानी होती है तो मां कामाख्या के दरबार में भी बलि होती है। अगर राजनीतिक बलि की बात कर रहे हैं तो बात अलग है। संविधान में सबको अपनी बात करने का हक है।
आरजेडी ने क्या कहा?
इस पूरे विवाद पर आरजेडी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि गाय दूध देती है और हम लोग उसका सम्मान करते हैं. पालते हैं, खिलाते हैं, देवता पर गाय का दूध चढ़ाते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की मांग हो रही है तो विश्व हिंदू परिषद को सामने आना चाहिए, लेकिन बीजेपी ने तो गाय को कई भागों में बांट दिया… बीजेपी वाले जर्सी गाय को गाय नहीं मानते।
आरजेडी नेता ने आगे कहा कि सनातन धर्म में कुर्बानी को जायज नहीं माना गया है, लेकिन देवी-देवताओं पर जानवर कटते रहे हैं और चढ़ते रहे हैं। हर धर्म के लोग अपने अनुसार इसका प्रयोग करते हैं।






