उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव आप के साथ हाथ मिला सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस गठबंधन से छिटक सकती है। दरअसल जानकारी मिल रही है कि सपा आप को 15-20 सीटें देने के मूड में है। ऐसे में कांग्रेस अपने दम पर चुनाव लड़ सकती है। दरअसल जब अप्रैल में आप नेता और राज्यसभा सासंद संजय सिंह और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मुलाकात की थी तो गठबंधन की अटकले लगाईं जा रही थी। इस मुलाकात के बाद 23 अगस्त को भी संजय सिंह और अखिलेश यादव सांसद मिले हैं। देखने की बात यह है कि यूपी में विधानसभा चुनाव ऐसे वक्त में होंगे जब पंजाब और गोवा में भी इलेक्शन होंगे। ऐसे में कांग्रेस, किसी भी कीमत पर आप के साथ अलायंस में यूपी चुनाव लड़ने को तैयार नहीं होगी। इस मामले में एक पक्ष यह भी है कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद आप ने खुद को इंडिया अलायंस से अलग कर लिया था। कई मौकों पर संजय सिंह समेत आप के शीर्ष नेतृत्व यह कह चुकी है कि वह इंडिया अलायंस का हिस्सा नहीं है।
ऐसे में अगर सपा, आप को सीटें देने के लिए राजी होती है तो इसके लिए कांग्रेस को मनाना आसान नहीं होगा. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 349 सीटों पर चुनवा लड़ा था। उसे इन सभी सीटों पर कुल मिलाकर 3 लाख 47 हजार 187 मत मिले थे. इस चुनाव में भी आप और सपा के बीच अलायंस की चर्चा शुरू हुई थी लेकिन बात अंजाम तक नहीं पहुंच सकी। वैसे भी कांग्रेस अब 2029 का लोकसभा चुनाव देखकर चल रही है उसे राज्यों में हार जीत से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। क्षेत्रीय दलों से तो कांग्रेस अब पीछा छुड़ाने में लगी है। क्योंकि ये क्षेत्रीय दल ही तो हैं जिन्होंने कई राज्यों में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किया है।2022 में आप जिन 349 सीटों पर लड़ी थी उसमें से 7 विधानसभा क्षेत्र ऐसी थीं जहां पार्टी को 5,000 से अधिक वोट मिले थे. इसमें लोनी- सचिन कुमार शर्मा- 6,319, साहिबाबाद- छवि यादव- 6,944, नोएडा- पंकज अवाना- 6,545, दादरी- संजय- 4,613, मोहनलालगंज- सूरज कुमार रावत- 7,048, रुधौली- पुष्करादित्य सिंह- 24,367, और खलीलाबाद में सुबोध चंद्र को 25,123 वोट मिले थे.
फिर साल 2024 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने यूपी में प्रत्याशी नहीं उतारा और सपा को समर्थन दिया। जब चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल, जेल से बाहर आए थे, उसके बाद उन्होंने लखनऊ में अखिलेश यादव के साथ प्रेस वार्ता भी की थी।
वहीं दिल्ली के विधानसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस को दरकिनार कर आम आदमी पार्टी को समर्थन दिया था. अब आप को साथ लाने की यह अटकलें अगर कल को सच साबित होती हैं तो कांग्रेस के लिए धर्मसंकट खड़ा हो सकता है। एक ओर सपा और कांग्रेस साथ चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं, वहीं अब आप की एंट्री से सियासी परिस्थितियां बदल सकती हैं।
सूत्रों की मानें तो जिन 7 सीटों पर आम आदमी पार्टी ने ठीक ठाक प्रदर्शन किया था यानी 5,000 से अधिक वोट मिले थे, उन क्षेत्रों पर वह दावा कर सकती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी चुनावों को लेकर यूपी में इंडिया अलायंस में सपा और कांग्रेस के अलावा किसी और दल की एंट्री दोनों दलों में किसे सहज और असहज कर सकती है।