पश्चिम चम्पारण/बेतिया। जिले में ऐम्बुलेंस कर्मियों का अनिश्चितकालीन हड़ताल 4 सितंबर से शुरू होकर तीसरे दिन भी जारी रही। आंदोलन के कारण पूरे जिले की स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई हैं। आपातकालीन सेवा ठप हो जाने से मरीजों को अस्पतालों तक पहुँचने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और परिजनों को निजी साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। धरना पर बैठे ऐम्बुलेंस ड्राइवर और ईएमटी ने अपनी गाड़ियाँ जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय में खड़ी कर दी हैं। उनका कहना है कि महंगाई के दौर में उन्हें मात्र ₹11,500 मासिक वेतन पर 12 घंटे से अधिक काम करना पड़ता है। परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और यदि गाड़ी खराब हो जाती है तो मजदूरी तक काट ली जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक ऐम्बुलेंस संचालन जिला स्वास्थ्य समिति के अधीन था तब तक स्थिति बेहतर थी, लेकिन निजी कंपनियों को संचालन सौंपे जाने के बाद से शोषण बढ़ गया है।
कंपनी खुलेआम न्यूनतम मजदूरी कानून की अवहेलना कर रही है और कर्मचारियों की नौकरी पूरी तरह अस्थिर हो गई है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें हैं कि प्रत्येक कर्मी को न्यूनतम ₹19,000 मासिक वेतन दिया जाए, सेवा निवृत्ति की उम्र सीमा 65 वर्ष की जाए और ऐम्बुलेंस कर्मियों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा मिले। कर्मचारियों ने बताया कि 19 अगस्त को ही उन्होंने राज्य स्वास्थ्य समिति को हड़ताल की लिखित सूचना दे दी थी, लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया, जिसके कारण वे मजबूर होकर आंदोलन पर उतरे हैं। धरना स्थल पर एटक नेता ओमप्रकाश क्रांति ने कहा कि सरकार को अविलंब कंपनी और ऐम्बुलेंस कर्मचारी संघ के बीच त्रिपक्षीय वार्ता करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्मियों की जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और अधिक उग्र होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार तथा कंपनी दोनों की होगी। हड़ताल के तीसरे दिन आंदोलन को राजनीतिक बल तब मिला जब महागठबंधन के घटक दल भी समर्थन में उतर आए। धरना स्थल पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कोषाध्यक्ष बबलू दुबे, भाकपा नगर निगम कमेटी के सचिव संजय सिंह, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष प्रमोद सिंह, पूर्व जिला अध्यक्ष भारत भूषण दुबे तथा भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य सचिव मंडल सदस्य प्रभु राज नारायण राव पहुँचे।
इन नेताओं ने ऐम्बुलेंस कर्मियों की लड़ाई को पूरी तरह न्यायसंगत ठहराते हुए कहा कि सरकार यदि तुरंत ठोस कदम नहीं उठाती है तो आंदोलन राज्यव्यापी और और अधिक उग्र रूप लेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस स्थिति की जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार और निजी कंपनी दोनों की होगी। धरना का नेतृत्व ऐम्बुलेंस कर्मचारी संघ के नेता सुनील राम, आदर्श मणि, संजीत सिन्हा और संदीप यादव कर रहे हैं। पूरे स्थल पर लगातार नारे गूंजते रहे, न्यूनतम मजदूरी कानून लागू करो, सेवा निवृत्ति की उम्र सीमा बढ़ाओ, ऐम्बुलेंस कर्मियों को स्थायी दर्जा दो। कर्मचारियों और समर्थक संगठनों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह हड़ताल जारी रहेगी और यदि सरकार ने लापरवाही बरती तो आंदोलन का विस्तार पूरे राज्य में किया जाएगा।








