बिहार में गरबा-डांडिया विवाद: मुस्लिम एंट्री पर रोक का मुद्दा?

नवरात्रि (2025) की शुरुआत के साथ ही देशभर में गरबा-डांडिया कार्यक्रमों को लेकर सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल जैसे संगठनों ने कई राज्यों में गैर-हिंदुओं (खासकर मुस्लिमों) की एंट्री पर रोक लगाने की मांग की है, ताकि “लव जिहाद” जैसे आरोपों से बचा जा सके। लेकिन बिहार में इस मुद्दे को लेकर कोई स्पष्ट या प्रमुख विवाद सामने नहीं आया है। यहां गरबा-डांडिया का आयोजन बढ़ रहा है, लेकिन पारंपरिक बिहारी लोकनृत्य “झिझिया” को भुला दिया गया लगता है। आइए विस्तार से समझें:

 

बिहार में गरबा-डांडिया की स्थिति

 

 

बढ़ता प्रचलन: बिहार के कई जिलों जैसे बांका, भागलपुर और पटना में नवरात्रि के दौरान गरबा-डांडिया नाइट्स का आयोजन हो रहा है। उदाहरण के लिए, बांका में 28 सितंबर को रॉयल गार्डन में डीजे के साथ सामूहिक गरबा-डांडिया का कार्यक्रम है, जहां युवाओं को मुफ्त वर्कशॉप भी दी जा रही है। इसी तरह, भागलपुर में 26 सितंबर को “हिंदुस्तान उत्सव डांडिया नाइट्स” का आयोजन क्रिस्टल पैलेस में शाम 6 बजे से होगा, जहां ऑनलाइन टिकट उपलब्ध हैं।
पारंपरिक झिझिया का ह्रास: बिहार का पारंपरिक लोकनृत्य “झिझिया” (देवी स्तुति पर आधारित) नवरात्रि में ही किया जाता था, लेकिन अब गरबा-डांडिया ने इसकी जगह ले ली है। विशेषज्ञों का कहना है कि गुजराती प्रभाव के कारण बिहार की सांस्कृतिक पहचान खो रही है, और झिझिया विलुप्ति की कगार पर है।

 

मुस्लिम एंट्री पर रोक का विवाद: बिहार में क्यों नहीं?

 

राष्ट्रीय संदर्भ: VHP ने देशभर में पोस्टर लगाकर घोषणा की है कि गरबा पंडालों में केवल हिंदुओं को एंट्री मिलेगी। आधार कार्ड चेक, तिलक लगाना और गौमूत्र-चंदन का उपयोग अनिवार्य करने की बात कही गई है। यह विवाद मध्य प्रदेश (ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर), उत्तर प्रदेश (कानपुर) और छत्तीसगढ़ तक फैला है, जहां गैर-हिंदू आयोजकों पर हंगामा और मुस्लिम युवकों पर हमले की घटनाएं हुई हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने इसे हिंसा फैलाने वाला बताया है। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने मुस्लिम युवाओं से गरबा में न जाने की अपील की है।
बिहार में अनुपस्थिति: बिहार के टॉप मुस्लिम आबादी वाले जिलों (किशनगंज, कटिहार, अररिया, पूर्णिया, दरभंगा) में भी ऐसा कोई बड़ा विवाद रिपोर्ट नहीं हुआ। यहां फोकस आयोजनों पर है, न कि प्रवेश प्रतिबंध पर। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर का तनाव बिहार तक प्रभावित कर सकता है, खासकर जहां हिंदू संगठन सक्रिय हैं।

 

संभावित कारण और चिंताएं

 

सुरक्षा का बहाना: संगठन दावा करते हैं कि यह “लव जिहाद” रोकने के लिए है, लेकिन विपक्ष इसे सांप्रदायिकता फैलाने का प्रयास मानता है।
बिहार का संदर्भ: राज्य में मुस्लिम आबादी 17% से अधिक है, इसलिए ऐसे मुद्दे राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकते हैं। लेकिन फिलहाल, आयोजन शांतिपूर्ण लग रहे हैं।

यदि यह मुद्दा बिहार में उभरता है, तो स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहना होगा। नवरात्रि का उत्सव सबके लिए खुशी का होना चाहिए, न कि विभाजन का। अधिक अपडेट के लिए स्थानीय न्यूज चैनल देखें।

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