नेपाल में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ ‘जनरेशन जेड’ प्रदर्शनकारियों द्वारा शुरू हुए हिंसक आंदोलन ने देश को अराजकता की स्थिति में डाल दिया है। इस हिंसा में पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी, वर्तमान विदेश मंत्री डॉ. आरजू राणा देउबा पर हमला किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, आरजू राणा देउबा हमले के बाद लापता बताई जा रही हैं, जबकि उनके पति को सेना ने बचाया। यह घटना 9 सितंबर 2025 को काठमांडू के बुदनीलकंठा इलाके में हुई।
घटना का विवरण
हमला कैसे हुआ: प्रदर्शनकारियों ने देउबा दंपति के आवास पर धावा बोल दिया। वायरल वीडियो में दिखाया गया है कि आरजू राणा देउबा को लातें और घूंसे मारे गए, जबकि शेर बहादुर देउबा भी घायल हुए। हमलावरों ने घर में तोड़फोड़ की और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने दंपति को कुछ देर के लिए बंधक बनाया। सेना के हस्तक्षेप से शेर बहादुर देउबा को बचाया गया, लेकिन आरजू राणा देउबा की लोकेशन अज्ञात है।
आरजू की स्थिति: वे हमले में बुरी तरह घायल हुईं। फिलहाल, उनकी कोई जानकारी नहीं मिल रही। कुछ स्रोतों के अनुसार, प्रदर्शनकारी उन्हें अपने साथ ले गए, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। अस्पताल में भर्ती होने की खबरें हैं, लेकिन लोकेशन स्पष्ट नहीं। शेर बहादुर देउबा: वे खून बहते हुए मैदान में बैठे दिखे, लेकिन सेना ने उन्हें सुरक्षित निकाला। उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
प्रदर्शनों का पृष्ठभूमि
कारण: प्रदर्शन सोशल मीडिया (जैसे टिकटॉक) पर प्रतिबंध से शुरू हुए, जो भ्रष्टाचार और अमीर-गरीब असमानता पर केंद्रित थे। युवा प्रदर्शनकारियों ने नेताओं के बच्चों के ऐशोआराम पर सवाल उठाए। यह 2006 के विद्रोह से भी अधिक हिंसक है।
परिणाम: 19-22 लोग मारे गए, 250-300 घायल। संसद भवन, मंत्रालयों और नेताओं के घरों में आग लगाई गई। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 9 सितंबर को इस्तीफा दे दिया, गृह मंत्री रमेश लेखक ने भी पद छोड़ा। सोशल मीडिया प्रतिबंध हटा लिया गया।
अन्य प्रभाव: वित्त मंत्री बिश्नु प्रसाद पौडेल को पीटा गया, उप-प्रधानमंत्री को दौड़ाया गया। सेना ने कानून-व्यवस्था संभाली। नेपाल-भारत सीमा पर चेकपॉइंट बंद।
राजनीतिक संकट
ओली का इस्तीफा राजनीतिक समाधान के लिए था, लेकिन हिंसा जारी है। नेपाली कांग्रेस (देउबा का दल) और अन्य पार्टियां सरकार बनाने की दौड़ में हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: भारत, चीन और अन्य देश चिंतित। नेपाल की विदेश नीति पर असर पड़ सकता है, क्योंकि आरजू राणा देउबा जुलाई 2024 से पद पर हैं और महिलाओं के अधिकारों पर सक्रिय रही हैं।






