फुटपाथों और सड़कों पर अतिक्रमण, चलना हुआ मुश्किल

आजकल हम देखते हैं कि बड़ी संख्या में स्ट्रीट वेंडर्स ने व्यस्त बाज़ार के पास नो-वेंडिंग ज़ोन में स्टॉल लगा रखे हैं। इनके लिए नो-वेंडिंग ज़ोन की स्थापना सुचारू यातायात प्रवाह सुनिश्चित करने और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए की जा सकती है। हालाँकि, इनमें से कई विक्रेता अपने परिवार, जिसमें बुज़ुर्ग माता-पिता और स्कूल जाने वाले बच्चे शामिल हैं, को पालने के लिए पूरी तरह से अपनी कमाई पर निर्भर हैं। हालांकि इनके लिए स्थानीय दुकानदारों के संघ शिकायतें भी दर्ज करवाते हैं कि विक्रेता भीड़भाड़ पैदा कर रहे हैं और उनके व्यवसाय को अनुचित रूप से प्रभावित कर रहे हैं। लेकिन विक्रेताओं की आर्थिक कमज़ोरी को समझते हुए इसके लिए मानवीय समाधान ज़रूरी है। ऐसे मामले एक मध्यम आकार के शहर में शहरी शासन और सामाजिक समानता के बीच संघर्ष को उजागर करता है। शहरों के फुटपाथों और सड़कों पर होने वाले अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रयास तो कई बार होते हैं लेकिन इन प्रयासों में कभी भी गंभीरता नहीं रही है। इसका नतीजा यह रहा कि कुछ दिनों तक चलने के बाद यह अभियान ठप हो जाते हैं और स्थिति जस की तस हो जाती है। इससे लोग परेशान रहते हैं

 

प्रियंका सौरभ

मुख्य बाजारों, चौक-चौराहों, गलियों में दुकानदारों और रेहड़ी-फड़ी वालों की ओर से किया गया अतिक्रमण दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है। परिणामस्वरूप शहर के बाजारों में वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। स्ट्रीट वेंडर्स, जो अपने जीवनयापन के लिए अपने व्यापार पर निर्भर हैं, ने हर एक व्यस्त बाज़ार के पास निर्दिष्ट नो-वेंडिंग ज़ोन पर अतिक्रमण कर लिया है, जिससे यातायात बाधित हो रहा है और स्थानीय दुकानदारों की ओर से शिकायतें आ रही हैं। सार्वजनिक व्यवस्था, निष्पक्ष व्यावसायिक प्रथाओं और विक्रेताओं की आर्थिक कमज़ोरी के बीच संतुलन बनाना एक नैतिक और प्रशासनिक चुनौती है। स्ट्रीट वेंडर दुनिया भर की शहरी अर्थव्यवस्थाओं का एक अभिन्न अंग हैं, जो सार्वजनिक स्थानों पर कई तरह की वस्तुओं और सेवाओं तक आसान पहुँच प्रदान करते हैं। भले ही स्ट्रीट वेंडर्स को अनौपचारिक माना जाता है, लेकिन वे शहरी अर्थव्यवस्थाओं में महत्त्वपूर्ण योगदानकर्ता हैं। इस 21वीं सदी में ज़्यादातर लोग स्ट्रीट वेंडर हैं। अनौपचारिक अर्थव्यवस्था निगरानी अध्ययन ने उन तरीकों का खुलासा किया है, जिनसे स्ट्रीट वेंडर अपने समुदायों को मज़बूत बना रहे हैं: स्ट्रीट वेंडिंग रोज़गार सृजन, उत्पादन और आय सर्जन में एक प्रमुख भूमिका निभाती है। स्ट्रीट वेंडर्स को कार्यस्थल पर जनता, पुलिस कर्मियों, राजनेताओं और स्थानीय उपद्रवियों से कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

आर्थिक रूप से कमज़ोर व्यक्ति जीवनयापन के लिए वेंडिंग पर निर्भर हैं। विक्रेताओं द्वारा की गई प्रतिस्पर्धा और भीड़भाड़ के कारण नुक़सान का दावा करना उनकी मजबूरी है। व्यस्त बाज़ार में यातायात का सुचारू प्रवाह और सार्वजनिक सुरक्षा की आवश्यकता भी ज़रूरी है। विक्रेताओं के लिए मानवीय और टिकाऊ समाधान की वकालत सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और न्यायसंगत शासन सुनिश्चित करने का कार्य है। स्ट्रीट वेंडर अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए वेंडिंग पर निर्भर हैं। हालाँकि, उनकी उपस्थिति से भीड़भाड़ होती है और सार्वजनिक व्यवस्था बाधित होती है। ट्रैफ़िक प्रवाह और सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखते हुए उनकी आजीविका की रक्षा के लिए एक संतुलन की आवश्यकता है। दुकानदार विक्रेताओं को उनकी कम लागत और अनौपचारिक संचालन के कारण अनुचित प्रतिस्पर्धा के रूप में देखते हैं। हालाँकि, विक्रेता अक्सर आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों से सम्बंधित होते हैं। समाधान में समानता की रक्षा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दुकानदारों के हितों को अनुचित रूप से नुक़सान न पहुँचाया जाए। जबकि आर्थिक विकास एक संपन्न शहर के लिए महत्त्वपूर्ण है, सामाजिक कल्याण नीतियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्ट्रीट वेंडर जैसे कमज़ोर समूहों को असंगत कठिनाई का सामना न करना पड़े। निष्पक्ष और न्यायपूर्ण नीतियों में आर्थिक विकास और हाशिए पर पड़े समुदायों के कल्याण दोनों को एकीकृत किया जाना चाहिए। कई विक्रेता अपने परिवारों के लिए कमाने वाले होते हैं, जो बुज़ुर्ग आश्रितों और स्कूल जाने वाले बच्चों का भरण-पोषण करते हैं। बिना किसी विकल्प के उन्हें विस्थापित करने से उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थितियाँ खराब हो सकती हैं, जिससे निर्णय लेने में करुणा आवश्यक हो जाती है। निर्णय पारदर्शी और समावेशी होने चाहिए, जिसमें सभी हितधारकों की चिंताओं का समाधान हो। किसी भी समूह को बाहर रखने से अशांति फैल सकती है और प्रशासन की निष्पक्ष रूप से शासन करने की क्षमता पर भरोसा कम हो सकता है।

शहरों की आबादी समय के साथ लगातार बढ़ती जा रही है। इसके चलते वाहनों की संख्या भी बढ़ रही है और रोजगार के लिए लोगों का बाहर आने का सिलसिला भी बढ़ता जा रहा है लेकिन शहरों में इन समस्याओं का निदान करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जो पहल होनी चाहिए थी, वह नहीं हो पाई है। अतिक्रमण के खिलाफ चलाए गए अभियान के बाद शहरों में पार्किंग और रेडी-फड़ी जोन बनाए जाने की बात सामने आती है, लेकिन वह आज तक ज़मीन पर दिखाई नहीं देती है। लिहाजा ऐसी समस्याओं का बना रहना स्वाभाविक है। इसके स्थायी समाधान के लिए नो-वेंडिंग ज़ोन में समय-आधारित वेंडिंग शेड्यूल लागू करें ताकि ट्रैफ़िक प्रवाह को बनाए रखते हुए गैर-पीक घंटों के दौरान विक्रेताओं को अनुमति दी जा सके। सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए पीक घंटों के दौरान निगरानी बढ़ाएँ। स्वच्छता और पीने के पानी जैसी आवश्यक सुविधाओं के साथ एक निर्दिष्ट वेंडिंग ज़ोन विकसित करें, यह सुनिश्चित करते हुए कि विक्रेताओं के पास काम करने के लिए एक स्थायी स्थान हो। विक्रेताओं की संख्या को विनियमित करने और भीड़भाड़ को रोकने के लिए एक लाइसेंसिंग प्रणाली शुरू करें। यह दृष्टिकोण विक्रेताओं और दुकानदारों की तत्काल ज़रूरतों को सम्बोधित करता है और साथ ही भविष्य के लिए एक स्थायी ढाँचा तैयार करता है। यह सार्वजनिक व्यवस्था, आर्थिक निष्पक्षता और दयालु शासन को संतुलित करता है, यह सुनिश्चित करता है कि सभी हितधारकों को सुना और समर्थन दिया जाए। स्ट्रीट वेंडर्स, दुकानदारों और जनता की ज़रूरतों को सम्बोधित करने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है जो आर्थिक और सामाजिक कल्याण दोनों पर ध्यान केंद्रित करता है। पीएम स्वनिधि योजना जैसे सरकारी कार्यक्रम वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं, जबकि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 उनके अधिकारों की रक्षा करता है। भविष्य में, कौशल विकास की पेशकश, अधिक वेंडिंग जोन बनाने और डिजिटल प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने से विक्रेताओं को शहर की अर्थव्यवस्था में फलने-फूलने और एकीकृत होने में मदद मिलेगी।

(लेखिका रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार हैं)

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