Empty Handed Budget : स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों में व्यापक सुधार की जरूरत

2024 का अंतरिम बजट प्रशासनिक रवायत है क्योंकि पूर्ण बजट तो जुलाई में आएगा‚ जिस पर नई सरकार का रिपोर्ट कार्ड़ स्पष्ट नजर आएगा। व्यवसायों को फलने-फूलने के लिए एक सक्षम वातावरण बनाने, पर्यावरण से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने और समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्ग के उत्थान की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि विकास न्यायसंगत, टिकाऊ और हरित हो, विकास की गुणवत्ता पर ध्यान दें। सरकार को बड़ी-बड़ी योजनाओं पर ध्यान देने की बजाय स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों में व्यापक सुधार पर ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि ये गरीबों के लिए महत्वपूर्ण योजनाएं हैं, लेकिन यह इस तथ्य से दूर नहीं है कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा बजट बेहद अपर्याप्त हैं, भले ही ये सेवाएं खराब बुनियादी ढांचे, भारी रिक्तियों और अपर्याप्त संसाधनों से ग्रस्त हैं।

प्रियंका सौरभ

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को अपना छठा बजट पेश किया, जहां उन्होंने पिछले 10 वर्षों में सरकार की व्यापक उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित किया। चूंकि यह चुनावी वर्ष है इसलिए बजट पूर्ण नहीं था, बल्कि लेखानुदान था और इसमें राजस्व या व्यय खाते पर प्रमुख घोषणाएं शामिल नहीं थीं। एक अंतरिम बजट, नियमित वार्षिक बजट से अलग, चुनावी वर्ष में प्रस्तुत किया जाता है (2024 लोकसभा के लिए चुनावी वर्ष है)। केंद्रीय बजट के समान, इस पर लोकसभा में बहस होती है और यह पूरे वर्ष के लिए वैध रहता है (भले ही यह लगभग 2-4 महीनों के लिए एक संक्रमणकालीन व्यवस्था के रूप में काम करने के लिए होता है)। आम तौर पर ‘वोट-ऑन-अकाउंट’ के रूप में जाना जाता है, यह नई सरकार के कार्यभार संभालने तक विशिष्ट व्यय को अधिकृत करता है। अनुच्छेद 116 तत्काल व्यय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ‘भारत की संचित निधि’ से धन के अग्रिम आवंटन की अनुमति देता है। सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के अंतिम बजट में इनकम टैक्स स्लैब में किसी तरह का बदलाव नहीं किया। ना ही ड़ायरेक्ट व इनड़ायरेक्ट टैक्स में कोई बदलाव किया जा रहा है। जैसा कि विशेषज्ञ कहते हैं‚ चुनावी वर्ष के बजट से ज्यादा उम्मीदें नहीं की जानी चाहिए।

हालांकि सरकार चाहती तो लोकलुभावन कटौतियों व लाभों की सूची का झुनझुना थमा सकती थी। राजकोषीय घाटा ५.१ फीसद रहने के अनुमान के बावजूद मुफ्त वितरण‚ टीकाकरण‚ किसानों को लाभ‚ आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ाने व मुफ्त बिजली देने की घोषणाओं का खामियाजा सरकार को भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। महिलाओं के प्रति झुकाव रखने वाला यह बजट उनकी सेहत पर भी केंद्रित है। हालांकि किसानों के लिए एमएसपी की घोषणा न कर‚ सरकार अपनी गारंटी पूरी करने से चूकती नजर आ रही है। एक तरफ वह दलील देती है कि पचीस करोड़़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला है तो दूसरी तरफ अस्सी करोड़़ लोगों को मुफ्त राशन देने पर अपनी पीठ भी थपथाती है। कुल मिलाकर यह प्रशासनिक रवायत है। पिछले दस वर्षों में‚ प्रत्यक्ष कर संग्रह तीन गुना से अधिक हो गया है और रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या २.४ गुना तक बढ़ गई है। पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत अगले पांच वर्षों में दो करोड़ और घर बनाए जाएंगे। यद्यपि यह अंतरिम केंद्रीय बजट बहुत विस्तार वाला नहीं है। इसलिए यह समय ही बताएगा कि विकास की महत्वाकांक्षाओं को अधिक मजबूत करने के लिए एवं बजट की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी को कितना बढ़ावा देगा॥

उच्च और स्कूली शिक्षा दोनों को बजट में बढ़ा हुआ आवंटन मिला और पीएम स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम एसएचआरआई) जैसी योजनाओं को पिछले बजट की तुलना में लगभग 50% अधिक आवंटन मिला। स्कूल शिक्षा विभाग के लिए कुल आवंटन 73,008.10 करोड़ है जो पिछले आवंटन से अधिक है। आलोचकों का तर्क है कि एक बड़ा हिस्सा पीएम-एसएचआरआई परियोजना को वित्तपोषित करने में चला गया है जो देश में मौजूदा सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करना है और सरकारी स्कूलों को बढ़ाने के लिए धन आवंटित नहीं करना है। बजट में एक प्रमुख घोषणा पीएम-जन आरोग्य योजना के तहत आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए स्वास्थ्य कवर विस्तार से संबंधित है। स्वास्थ्य क्षेत्र का आवंटन 89,155 करोड़ से बढ़ाकर 90,658.63 करोड़ कर दिया गया है. इस क्षेत्र के विशेषज्ञ सरकार को गैर-संचारी रोगों पर ध्यान केंद्रित करने, निवारक स्वास्थ्य देखभाल के लिए कर छूट बढ़ाने और सब्सिडी वाले उपचारों की गुणवत्ता में सुधार और उन्नयन करने का तर्क देते हैं। अधिकांश सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं और विभागों के लिए बजट आवंटन कमोबेश पिछले वर्ष के समान ही है। स्कूल और उच्च शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभागों के लिए आवंटन पिछले साल के बीई की तुलना में कुछ मामूली वृद्धि दर्शाता है, लगभग 6-8%। हालांकि बजट में प्रमुख योजनाओं की कोई नई घोषणा नहीं की गई, वित्त मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछले 10 वर्षों में 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी (एमपीआई) से बाहर लाया गया है।

विशेषज्ञों का तर्क है कि एमपीआई हमें आय गरीबी के रुझानों के बारे में नहीं बताता है, जो आर्थिक कल्याण का एक उपयोगी संकेतक है। आगे का दावा कि “लोगों की औसत वास्तविक आय में 50% की वृद्धि हुई है”, हमें इस बारे में ज्यादा नहीं बताता कि गरीबों का जीवन कैसे बदल गया क्योंकि जो मायने रखता है वह राष्ट्रीय आय का वितरण है। विशेषज्ञों का यह भी तर्क है कि औसत ग्रामीण श्रमिक आय में मामूली वृद्धि हुई है जो निजी अंतिम उपभोग व्यय में खराब वृद्धि में भी परिलक्षित होती है। कुल रोजगार में कृषि की हिस्सेदारी में वृद्धि से चिह्नित, रोजगार के संरचनात्मक बदलाव में एक उल्लेखनीय उलटफेर हुआ है। इससे कृषि के अलावा रोजगार के अवसरों की कमी का पता चलता है। पिछले 4-5 वर्षों में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर में हालिया वृद्धि संकट से प्रेरित प्रतीत होती है, क्योंकि बड़ी संख्या में महिलाएं लाभकारी रोजगार के बजाय अवैतनिक पारिवारिक श्रम में लगी हुई हैं। व्यापक आर्थिक स्तर पर, बजट का दावा है कि 2023-24 में, केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करने में कामयाब रही है कि उधार के अलावा उसकी प्राप्तियाँ बजट के लगभग बराबर हैं। इसने कर राजस्व के संबंध में बजटीय अपेक्षाओं को पूरा किया है और साथ ही बजट के सापेक्ष अपनी गैर-कर राजस्व प्राप्तियों में 25% की बढ़ोतरी की उम्मीद की है।

व्यवसायों को फलने-फूलने के लिए एक सक्षम वातावरण बनाने, पर्यावरण से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने और समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्ग के उत्थान की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि विकास न्यायसंगत, टिकाऊ और हरित हो, विकास की गुणवत्ता पर ध्यान दें। सरकार को बड़ी-बड़ी योजनाओं पर ध्यान देने की बजाय स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों में व्यापक सुधार पर ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि ये गरीबों के लिए महत्वपूर्ण योजनाएं हैं, लेकिन यह इस तथ्य से दूर नहीं है कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा बजट बेहद अपर्याप्त हैं, भले ही ये सेवाएं खराब बुनियादी ढांचे, भारी रिक्तियों और अपर्याप्त संसाधनों से ग्रस्त हैं।

(लेखिका रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार हैं)

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