बलात्कार और व्यभिचार के विरुद्ध महिलाओं को सशक्त बनाना ही अंतिम उपाय

विकास तिवारी

महिलाओं की सुरक्षा दुनिया भर में एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।  बलात्कार और दुर्व्यवहार व्यापक मुद्दे हैं जो हर दिन असंख्य महिलाओं और बेटियों को प्रभावित करते हैं। इन अपराधों का प्रभाव व्यक्ति के साथ परिवारों, समुदायों और समाज को भी प्रभावित करता है। यह ऐसे  जटिल मुद्दे हैं जिनका परिणाम गंभीर शारीरिक और भावनात्मक आघात, सामाजिक अलगाव और यहां तक की मृत्यु भी हो सकती है।

वर्तमान मामले में जहां कोलकाता के आर जी कार अस्पताल में एक प्रशिक्षु महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या ने देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया एवं जिस क्रूरता और वीभत्सता के साथ यह बलात्कार किया गया, वह निर्भया कांड की याद दिलाता है। यह सत्तारूढ़ केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष यक्ष प्रश्न खड़ा करता है कि क्या देश में न्यायपालिका विभिन्न महिला दुर्व्यवहार मामलों में न्याय की मांग करने वाली पीड़ित महिलाओं के लिए सही दिशा में काम कर रही है। उदहारण के रूप में 1992 में हुए अजमेर गैंगरेप और ब्लैकमेल कांड, जहां 100 से अधिक लड़कियों को उनकी अश्लील तस्वीरों के लिए ब्लैकमेल किया गया और इसकी एवज में उनमें से कई बेटियों के साथ सामूहिक बलात्कार भी किया गया था। 32 वर्षों तक पीड़ित परिवारों ने न्याय पाने के लिए अपना खून-पसीना बहाया जिसके फलस्वरूप 6 आरोपियों को आजीवन कारावास एवं 5 लाख का अर्थदंड दिया गया। न्याय पाने हेतु अत्याधिक विलंब होने के कारण न्यायपालिका पर पुनः प्रश्न उठता है कि क्या हमारी कानून प्रणाली महिला उत्पीड़न के मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से तत्पर है। जिस देश में 1.5 अरब लोगों की जनसंख्या को समय पर न्याय प्रदान करने के लिए 750 से अधिक फास्ट ट्रैक अदालतें दिन रात काम करती हैं, परंतु फिर भी अजमेर, निर्भया, उन्नाव, बलरामपुर जैसे ज्वलंत मामलों एवं कई अन्य सामूहिक बलात्कार और महिला दुर्व्यवहार के मामलों का निपटारा करने में दशकों लग जाते हैं। यह वास्तव में सरकार और कानून एजेंसियों की सामूहिक विफलता का प्रतीक है जो विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं। प्रश्न यह भी उठता है कि क्या वाकई में हमें ऐसी न्यायिक व्यवस्था की आवश्यकता है जो हर साल महिला उत्पीड़न की इतनी घटनाएं होने के बाद भी शांत और निष्क्रिय होकर मौन मूक दर्शक बनी रहती है।

महिलाओं के प्रति हिंसा की रोकथाम के लिए दुनिया भर के देशों में लागू विभिन्न कानूनों के बारे में बात करें तो ब्रिटेन ने हाल ही में संसद में एक नया विधेयक पारित किया है जिसमें महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति खतरा’ बताया गया है और ऐसे विषयों को इस्लामी आतंकवाद के समान ही हल किया जाएगा। दूसरी ओर डेनमार्क, आइसलैंड, स्विट्जरलैंड जैसे यूरोपीय देशों में महिला सुरक्षा के संदर्भ में कानूनों का एक अलग समूह है, जिसे वे किसी भी प्रकार की हिंसा के खिलाफ महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ के अंतर्गत प्रयोग करते हैं, जिसमें आरोपियों के लिए मृत्युदंड भी शामिल है।
बलात्कार और शोषण को रोकने के बाद की स्थिति में एक बहुस्तरीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो इन अपराधों के मूल कारणों पर वार कर सकती हैं। कुछ रणनीतियां जैसे :

– स्वस्थ संबंधों, सहमति और सम्मान के बारे में शिक्षा और जागरूकता फैलाना
– महिलाओं की सुरक्षा के बारे में समुदायों को शामिल करना और पुरुषों को रोकथाम प्रयास में शामिल करना जिससे सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव हो एवं
– सरल सहायता सेवाएं जैसे कि परामर्श सेवा और कानूनी सहायता जो पीड़ितों को मानसिक शांति देने और न्याय प्राप्त करने में मदद कर सकती हैं।

सरकार को महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानूनों और नीतियों को मजबूत करने के लिए नीति सुधार की आवश्यकता है। महिलाओं को सशक्त बनाना बलात्कार और शोषण जैसे मामलों को रोकने में अति आवश्यक हैं। निम्नलिखित कुछ महत्वपूर्ण कदम हैं जिनके कार्यान्वयन से महिलाओं में आत्मबल की वृद्धि हो सकती है :

– महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देकर उनकी मानसिक स्वतंत्रता को सुदृढ़ करना, जिससे उन्हें हिंसा के प्रति कम संवेदनशील बनाया जा सके।
– महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थानों का निर्माण करना, जहां वे घटनाओं की रिपोर्ट कर सकें और मदद मांग सकें जिससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हो।
– महिलाओं को हिंसा और शोषण के खिलाफ बोलने के लिए प्रोत्साहित करना, जिससे इन अपराधों के प्रति शर्मिंदगी का माहौल तोड़ा जा सके।

आजकल डिजिटल प्रौद्योगिकी हर क्षेत्र में अद्भुत काम कर रही है। इस संदर्भ में प्रौद्योगिकी महिलाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सुरक्षा ऐप्स जो महिलाओं को तत्काल उनके मित्रों और परिवार को सूचित करने की सुविधा देते हैं, ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म जो पीड़ितों को ऐसी घटना के प्रति समर्थन और संसाधन प्रदान करते हैं एवं हिंसा के पैटर्न और हॉटस्पॉट को पहचानने के लिए डेटा विश्लेषण को सुगम बनाते हैं। यह कुछ ऐसे महत्वपूर्ण कदम हैं जो महिलाओं की सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए लागू किए जाने चाहिए।

निष्कर्ष में, महिलाओं की सुरक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है जिसमें व्यक्तियों, समुदायों, संगठनों और सरकारों की भागीदारी आवश्यक है। बलात्कार और शोषण के मूल कारणों को संबोधित करने के लिए मिलकर काम करके हम ऐसा वातावरण बना सकते हैं जहां महिलाएं और लड़कियां हिंसा और शोषण के डर से बिना रह सकती हैं। यह समय है कि हम  कार्रवाई करें, अपनी आवाज उठाएं और ऐसे माहौल का निर्माण करें जहां महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि हो। याद रखें, मिलकर हम सभी के लिए एक सुरक्षित और अधिक सम्मानजनक दुनिया बना सकते हैं।

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