EL Nino Farming Safety Tips: गर्मियों के सीजन में अल नीनो का नाम सुनते ही भारतीय किसानों और कृषि विशेषज्ञों की चिंताएं काफी ज्यादा बढ़ जाती हैं। यह प्रशांत महासागर में होने वाला एक ऐसा मौसमी बदलाव है जिससे समुद्र की सतह का तापमान बढ़ जाता है। इसका सीधा असर भारत के मानसून पर पड़ता है जिससे देश के कई हिस्सों में मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं और बारिश की भारी कमी देखने को मिलती है। इस साल भी प्री-मानसून की स्थिति और लगातार बढ़ती हीटवेव को देखते हुए सरकार और कृषि विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। अल नीनो की वजह से खरीफ सीजन की फसलों की बुआई में देरी और मिट्टी की नमी खत्म होने का बड़ा खतरा रहता है। ऐसे में हमारे किसान भाइयों के लिए समय रहते सही रणनीति बनाना बेहद जरूरी हो गया है ताकि इस मौसमी संकट के बीच भी अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखा जा सके. जानें बचाव के लिए किसानों को क्या करना चाहिए।
प्रभावित होने वाले इलाक
अल नीनो के एक्टिव होने से देश के मध्य, उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी राज्यों में सामान्य से काफी कम बारिश होने की आशंका रहती है। खास तौर पर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक के कुछ कृषि प्रधान इलाके इसके निशाने पर सबसे ज्यादा आ सकते हैं।
अल नीनो का इन फसलों पर सीधा असर
इस संकट से बचने के उपाय
इसके साथ ही किसानों को अपने खेतों की मिट्टी की नमी को लंबे समय तक लॉक रखने के लिए मल्चिंग तकनीक का सहारा लेना चाहिए जिससे पानी का वाष्पीकरण बहुत कम होता है। संकट के इस दौर में खेतों के आसपास छोटे तालाब या वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाना भी बेहद मददगार साबित होता है जिससे जरूरत पड़ने पर संचित पानी का उपयोग फसलों की सिंचाई के लिए किया जा सके।







