मानसून की सक्रियता बरकरार रहने के कारण मुजफ्फरपुर, पूर्वी तथा पश्चिमी चम्पारण के जिलों के कुछ स्थानों पर अच्छी वर्षा की संभावना: मौसम वैज्ञानिक

उचास जमीन की तैयारी करके अरहर एवं तील की करें बुआई

सुभाषचंद्र कुमार

समस्तीपुर । डा राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविधालय स्थित जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से जारी 13-17 जुलाई, 2024 तक के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार अगले 24 घंटों तक मानसून की सक्रियता बरकरार रहने के कारण मुजफ्फरपुर, पूर्वी तथा पश्चिमी चम्पारण के जिलों के कुछ स्थानों पर अच्छी वर्षा हो सकती है। बाकी जिलों में भी अगले 24 घंटों में एक-दो स्थानों पर अच्छी वर्षा हो सकती है।

13 जुलाई के बाद वर्षा की सम्भावना में कमी आ सकती है। जिसके कारण ज्यादातर स्थानों पर मौसम के शुष्क रहने की सम्भावना है। हलाकि स्थानीय स्तर पर कुछ स्थानों में हल्की-हल्की वर्षा हो सकती है।

अधिकतम तापमान 32 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। न्यूनतम तापमान 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रह सकता है।
सापेक्ष आर्द्रता सुबह में 85 से 95 प्रतिशत तथा दोपहर में 45 से 55 प्रतिशत रहने की संभावना है।

पूर्वानुमानित अवधि में औसतन 12 से 15 कि0मी० प्रति घंटा की रफ्तार से पूरवा हवा चलने का अनुमान है।

समसमायिक सुझाव देते हुए मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि विगत पूर्वानुमान की अवधि में उत्तर बिहार में अनेक स्थानों पर वर्षा हुई है। मौसम पूर्वानुमान की अवधि में वर्षा की संभावना को देखते हुए जिन किसानों के पास धान का विचड़ा तैयार हो वे नीची तथा मध्यम जमीन में वर्षा जल का संग्रह करने के लिए मेड़ों को मजबूत बनाने का कार्य करें तथा धान की रोपनी करें।

धान की रोपाई के समय उर्वरकों का व्यवहार सदैव मिट्टी जाँच के आधार पर करें। यदि मिट्टी जाँच नहीं कराया गया हो तो मध्यम एवं लम्बी अवधि की किस्मों के लिए 30 किलोग्राम नेत्रजन, 60 किलोग्राम स्फुर एवं 30 किलोग्राम पोटाष के साथ 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट या 15 किलोग्गग्राम प्रति हेक्टर चिलेटेड जिंक का व्यवहार करें।

धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए रोपाई के 2-3 दिन बाद तथा एक सप्ताह के अन्दर ब्यूटाक्लोर (3 लीटर दवा प्रति हेक्टेयर) या प्रीटलाक्लोर (1.5 लीटर दवा प्रति हेक्टर) या पेन्डीमिथेलीन (3 लीटर दवा प्रति हेक्टर) का 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर एक हेक्टर क्षेत्र में छिड़काव करें। छिड़काव के वक्त खेत में एक से०मी० पानी की उपस्थति रहनी चाहिए।

किसान भाई ऊचॉस जमीन में तिल की बुआई 2-3 दिनों के बाद वर्षा की संभावना को ध्यान में देखते हुए करें। कृष्णा, काँके सफेद, कालिका और प्रगति तिल की अनुशंसित किस्में हैं। बुआई के समय प्रति हेक्टेयर 60 किवन्टल कम्पोस्ट, 20 किलो नेत्रजन, 20 किलोस्फुर एवं 20 किलो पोटाष का व्यवहार करें। बीजदर 4 कि०ग्रा० प्रति हेक्टेयर तथा कतार से कतार एवं पौध से पौध की दूरी 30×10 से०मी० रखें। 2.0 ग्राम थीरम दवा से प्रति किलोग्राम बीज को उपचारित कर बुआई करे।

आम का बगान लगाने का यह समय अनुकुल चल रहा है। किसान भाई अपने पसंद के अनुसार अलग-अलग समय में पकने वाली किस्मों का चयन कर सकते हैं। मई के अन्त से जुन माह में पकने वाली किस्में मिठुआ, गुलाबखास, बम्बई, एलफॉन्जों, जड़दालू, जून माह में पकने वाली किस्में लंगड़ा

(मालदह), हेमसागर, कृष्णभोग, अमन दशहरी, जुलाई माह में पकने वाली किस्में फजली, सुकुल, सिपिया, तैमूरिया, अगस्त में पकने वाली किस्में समरबहिष्त,

चौसा, कतिकी है। आम के संकर किस्मों के लिए महमूद बहार, प्रभाशंकर, अम्रपाली, मल्लिका, मंजीरा, मेनिका, सुन्दर लंगड़ा राजेंद्र आम-1, रत्ना, सबरी, जवाहर, सिंधु, अर्का, अरुण, मेनका, अलफजली, पूसा अरुणिमा आदि अनुशंसित है। कलमी आम के लिए पौधा से पौधा की दूरी 10 मीटर, बीजु के लिए 12 मीटर रखें। आम्रपाली किस्म की सघन बागवानी हेतु पौधों को 2.5X2.5 मीटर की दूरी पर लगा सकतें हैं। केला की रोपाई वर्षा की संभावना को ध्यान में देखते हुए करें। उत्तर बिहार में लम्बी किस्मों के लिए अलपान, चम्पा, कंथाली, मालभोग, चिनियाँ, शक्कर चिनियाँ, फिआ-23 तथा बौनी एवं खाने वाली किस्मों के लिए ग्रेडनेन, रोबस्टा, बसराई, फिआ-1 अनुशंसित है। सब्जी वाली किस्में बतीसा, सावा, बनकेल,

कचकेल, फिआ-3 तथा सब्जी एवं फल दोनों में उपयोग आने वाली किस्में कोठियों, मुठियाँ, दुधसागर एवं चकिया अनुशंसित है। लम्बी जातियों में पौधा से पौधा की दूरी 2.0 मीटर है एवं बौनी जातियों में 1.5 मीटर रखें।

फलदार पौधो का बगान लगाने का यह समय उत्तम चल रहा है। किसान भाई अपनी पसंद के अनुसार आम, लीची, ऑवला, अमरुद, कटहल, शरीफा, नींबु के स्वस्थ पौधों को अधिकृत नर्सरी से खरीद कर रोपनी कर सकते हैं। रोपाई के पहले, प्रति गड्‌ढ़ा 40 से 50 किलोग्राम सड़ी गोबर का प्रयोग अवश्य करें। जब वर्षा हो रही हो तो रोपनी नहीं करें।

उचास जमीन की तैयारी करके अरहर की बुआई करें। उपरी जमीन में बुआई के समय प्रति हेक्टेयर 20 किलोग्राम नेत्रजन, 45 किलोग्राम स्फुर, 20 किलोग्राम पोटाष तथा 20 किलोग्राम सल्फर का व्यवहार करें। बहार, पूसा 9, नरेद्र अरहर 1. मालवीय-13, राजेन्द्र अरहर 1 आदि किस्में बुआई के लिए अनुषसित है। बीज दर 18-20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें। बुआई के 24 घंटे पूर्व 2.5 ग्राम थीरम दवा से प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करे। बुआई के ठीक पहले उपचारित बीज को उचित राईजोबियम कल्चर से उपचारित कर बुआई करनी चाहिए।

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