किसान नेता ने कहा – केरल में वाम विचारधारा पर दिए गए बयान को तत्काल वापस लें या खेद प्रकट करें अन्यथा दें स्पष्टीकरण

माननीय श्री राहुल गांधी जी
जिंदाबाद !
आपको यह पत्र केरल विधानसभा चुनाव के दौरान आपके द्वारा वाम विचारधारा को लेकर दिए गए भाषण को लेकर लिख रहा हूं।
4 अप्रैल 2026 को केरल में अलाप्पुझा में एक रैली के दौरान आपने कहा कि – ‘आने वाले समय में केरल से वामपंथ का नामो – निशान मिट जाएगा’।
आपने कहा कि लेफ्ट फ्रंट वामपंथी नहीं बचा है।
आपने आरोप लगाया कि सी पी एम वामपंथी पार्टी नहीं रही, बल्कि धुर दक्षिणपंथी बन गई है और अपनी मूल विचारधारा से समझौता कर चुकी है।
आपने आरोप लगाया कि केरल में LDF और BJP-RSS के बीच ‘गुप्त समझौता’ है, और सीएम पिनाराई विजयन पर केंद्र सरकार का ‘छिपा हुआ हाथ’ हावी है।
आपने सी पी एम को लोगों की पार्टी के बजाय ‘कॉर्पोरेट पार्टी’ बताया।
आपका यह बयान सभी अखबारों में छपा है जिसका जवाब सीपीएम के महासचिव कॉमरेड एम ए बेबी द्वारा दिया गया है।
मैं आपके बयान को लेकर दुखी एवं आक्रोशित हूं। इस लिए यह खुला पत्र लिख रहा हूं।
संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ़) केरल में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों का प्रमुख विपक्षी मोर्चा है इसलिए कांग्रेस नेता के तौर पर आप मुख्यमंत्री, वाम सरकार या यहां तक की वाम पार्टियों पर कोई भी टिप्पणी करते, तो यह आपका लोकतांत्रिक अधिकार होता लेकिन आपने वाम विचारधारा के अस्तित्व पर सवाल उठाया है, जो घोर आपत्तिजनक है। मुझे लगता है कि जब तक देश दुनिया में अन्याय, अत्याचार, शोषण, लूट रहेगा, वामपंथी समाजवादी प्रगतिशील विचारों, संगठनों, पार्टियों की जरूरत रहेगी।
आपकी टिप्पणी पर आपत्ति इसलिए भी है क्योंकि वाम मोर्चा इंडिया गठबंधन के साथ खड़ा तो है। साथ ही इसलिए भी की वाम मोर्चे के समर्थन से कांग्रेस पार्टी ने यूपीए-1 और यूपीए -2 सरकार चलाई है।
आप जानते ही होंगे कि 17 मई 1934 को कांग्रेस के भीतर कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी बनी थी, जिसमें ईएमएफ नंबूदरीपाद जैसे अनेक वामपंथी नेता शामिल थे। बयान देते समय शायद आप यह भूल गए कि कांग्रेस पार्टी कई चुनाव वाम पार्टियों के साथ लड़ चुकी है।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने तो इंदिरा गांधी जी की इमरजेंसी तक का समर्थन किया था। आपकी पार्टी के भीतर तमाम वामपंथी मिजाज के नेता आज भी मौजूद है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जी का वामपंथी पार्टियों के साथ गहरा आदरपूर्ण रिश्ता जग जाहिर है।
आज भी आपका बिहार, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मणिपुर और तेलंगाना में कम्युनिस्ट पार्टियों के साथ गठबंधन है।
यह भी उल्लेख करना आवश्यक समझता हूं कि कांग्रेस पार्टी का बौद्धिक स्तर पर सर्वाधिक सहयोग और समर्थन वामपंथी बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता करते हैं।
उक्त तथ्यों के बावजूद आपने वाम के अस्तित्व समाप्त होने की बात क्या सोचकर कही है, यह मेरी समझ से परे हैं। आप कांग्रेस पार्टी के नेता ही नहीं लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता भी है। इस कारण आपका बयान इंडिया गठबंधन के अस्तित्व को चुनौती बन सकता है।
ऐसे समय में जब भाजपा, एनडीए और संघ परिवार लोकतंत्र और संविधान के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं। आपके द्वारा इस तरह का बयान दिया जाना बेहद दुखद है। आपके इस बयान का सबसे ज्यादा दुरूपयोग देश की सांप्रदायिक और कॉर्पोरेट शक्तियां करने वाली है।
मैं किसान आंदोलन से जुड़ा हुआ समाजवादी कार्यकर्ता हूं। देश के किसान आंदोलन और मजदूर आंदोलन को ताकत देने में तथा वंचित वर्गों की आवाज उठाने में वाम विचारधारा की भारत में ही नहीं दुनिया भर में अहम भूमिका रही है और है।
मैं ऐसे अनेक वामपंथी किसान, मजदूर, मानवाधिकार संगठनों के साथ आंदोलनात्मक काम करता हूं।
मुझे लगता है गैर भा ज पा व्यापकतम गठबंधन बनाना इस समय देश की ऐतिहासिक तात्कालिक आवश्यकता है।
मेरा आपसे अनुरोध है कि आप अपने बयान को तत्काल वापस लें या खेद प्रकट करें अन्यथा स्पष्टीकरण दें।
यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरा पत्र लिखने का आशय आपकी या कांग्रेस पार्टी की खिलाफत करना नहीं है, बल्कि इंडिया गठबंधन की महती आवश्यकता को आपके समक्ष रेखांकित करना है।
आपके द्वारा स्पष्टीकरण न दिए जाने पर मैं कांग्रेस अध्यक्ष माननीय मल्लिकार्जुन खड़गे जी को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध करूंगा कि वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाकर वाम मोर्चा पार्टियों और प्रगतिशील विचारधारा के संबंध में अपनी पार्टी की लाइन देश और दुनिया के सामने स्पष्ट करें।
जिंदाबाद !
आपको यह पत्र केरल विधानसभा चुनाव के दौरान आपके द्वारा वाम विचारधारा को लेकर दिए गए भाषण को लेकर लिख रहा हूं।
4 अप्रैल 2026 को केरल में अलाप्पुझा में एक रैली के दौरान आपने कहा कि – ‘आने वाले समय में केरल से वामपंथ का नामो – निशान मिट जाएगा’।
आपने कहा कि लेफ्ट फ्रंट वामपंथी नहीं बचा है।
आपने आरोप लगाया कि सी पी एम वामपंथी पार्टी नहीं रही, बल्कि धुर दक्षिणपंथी बन गई है और अपनी मूल विचारधारा से समझौता कर चुकी है।
आपने आरोप लगाया कि केरल में LDF और BJP-RSS के बीच ‘गुप्त समझौता’ है, और सीएम पिनाराई विजयन पर केंद्र सरकार का ‘छिपा हुआ हाथ’ हावी है।
आपने सी पी एम को लोगों की पार्टी के बजाय ‘कॉर्पोरेट पार्टी’ बताया।
आपका यह बयान सभी अखबारों में छपा है जिसका जवाब सीपीएम के महासचिव कॉमरेड एम ए बेबी द्वारा दिया गया है।
मैं आपके बयान को लेकर दुखी एवं आक्रोशित हूं। इस लिए यह खुला पत्र लिख रहा हूं।
संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ़) केरल में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों का प्रमुख विपक्षी मोर्चा है इसलिए कांग्रेस नेता के तौर पर आप मुख्यमंत्री, वाम सरकार या यहां तक की वाम पार्टियों पर कोई भी टिप्पणी करते, तो यह आपका लोकतांत्रिक अधिकार होता लेकिन आपने वाम विचारधारा के अस्तित्व पर सवाल उठाया है, जो घोर आपत्तिजनक है। मुझे लगता है कि जब तक देश दुनिया में अन्याय, अत्याचार, शोषण, लूट रहेगा, वामपंथी समाजवादी प्रगतिशील विचारों, संगठनों, पार्टियों की जरूरत रहेगी।
आपकी टिप्पणी पर आपत्ति इसलिए भी है क्योंकि वाम मोर्चा इंडिया गठबंधन के साथ खड़ा तो है। साथ ही इसलिए भी की वाम मोर्चे के समर्थन से कांग्रेस पार्टी ने यूपीए-1 और यूपीए -2 सरकार चलाई है।
आप जानते ही होंगे कि 17 मई 1934 को कांग्रेस के भीतर कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी बनी थी, जिसमें ईएमएफ नंबूदरीपाद जैसे अनेक वामपंथी नेता शामिल थे। बयान देते समय शायद आप यह भूल गए कि कांग्रेस पार्टी कई चुनाव वाम पार्टियों के साथ लड़ चुकी है।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने तो इंदिरा गांधी जी की इमरजेंसी तक का समर्थन किया था। आपकी पार्टी के भीतर तमाम वामपंथी मिजाज के नेता आज भी मौजूद है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जी का वामपंथी पार्टियों के साथ गहरा आदरपूर्ण रिश्ता जग जाहिर है।
आज भी आपका बिहार, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मणिपुर और तेलंगाना में कम्युनिस्ट पार्टियों के साथ गठबंधन है।
यह भी उल्लेख करना आवश्यक समझता हूं कि कांग्रेस पार्टी का बौद्धिक स्तर पर सर्वाधिक सहयोग और समर्थन वामपंथी बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता करते हैं।
उक्त तथ्यों के बावजूद आपने वाम के अस्तित्व समाप्त होने की बात क्या सोचकर कही है, यह मेरी समझ से परे हैं। आप कांग्रेस पार्टी के नेता ही नहीं लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता भी है। इस कारण आपका बयान इंडिया गठबंधन के अस्तित्व को चुनौती बन सकता है।
ऐसे समय में जब भाजपा, एनडीए और संघ परिवार लोकतंत्र और संविधान के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं। आपके द्वारा इस तरह का बयान दिया जाना बेहद दुखद है। आपके इस बयान का सबसे ज्यादा दुरूपयोग देश की सांप्रदायिक और कॉर्पोरेट शक्तियां करने वाली है।
मैं किसान आंदोलन से जुड़ा हुआ समाजवादी कार्यकर्ता हूं। देश के किसान आंदोलन और मजदूर आंदोलन को ताकत देने में तथा वंचित वर्गों की आवाज उठाने में वाम विचारधारा की भारत में ही नहीं दुनिया भर में अहम भूमिका रही है और है।
मैं ऐसे अनेक वामपंथी किसान, मजदूर, मानवाधिकार संगठनों के साथ आंदोलनात्मक काम करता हूं।
मुझे लगता है गैर भा ज पा व्यापकतम गठबंधन बनाना इस समय देश की ऐतिहासिक तात्कालिक आवश्यकता है।
मेरा आपसे अनुरोध है कि आप अपने बयान को तत्काल वापस लें या खेद प्रकट करें अन्यथा स्पष्टीकरण दें।
यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरा पत्र लिखने का आशय आपकी या कांग्रेस पार्टी की खिलाफत करना नहीं है, बल्कि इंडिया गठबंधन की महती आवश्यकता को आपके समक्ष रेखांकित करना है।
आपके द्वारा स्पष्टीकरण न दिए जाने पर मैं कांग्रेस अध्यक्ष माननीय मल्लिकार्जुन खड़गे जी को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध करूंगा कि वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाकर वाम मोर्चा पार्टियों और प्रगतिशील विचारधारा के संबंध में अपनी पार्टी की लाइन देश और दुनिया के सामने स्पष्ट करें।








