Delhi News: सरकारी अस्पतालों की दवाइयों पर डाका, दिल्ली में चल रही थी नकली मेडिसिन फैक्ट्री

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने नकली और जानलेवा दवाइयों के एक बड़े इंटर-स्टेट रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली के मुखर्जी नगर में चल रही अवैध फैक्ट्री का भी पर्दाफाश हुआ है। पुलिस के मुताबिक यह गैंग सरकारी अस्पतालों की दवाइयों को चोरी-छिपे बाजार में बेचने के साथ-साथ नकली लाइफ सेविंग दवाइयां बनाकर दिल्ली-एनसीआर समेत पूर्वोत्तर राज्यों तक सप्लाई कर रहा था।

क्राइम ब्रांच की टीम को सूचना मिली थी कि कुछ लोग सरकारी सप्लाई वाली दवाइयों के लेबल हटाकर उन्हें नए पैक में भरकर खुले बाजार में बेच रहे हैं। इसके बाद ड्रग कंट्रोल विभाग के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए 22 अप्रैल को मुखर्जी नगर के इंद्रा विकास कॉलोनी में छापा मारा गया। मौके से भारी मात्रा में नकली और सरकारी सप्लाई की दवाइयां, पैकेजिंग मशीनें, नकली लेबल और रॉ मटेरियल बरामद किया गया।

 

दिल्ली से प्रयागराज तक फैला था नकली दवा सिंडिकेट

 

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी मनोज कुमार जैन को मौके से गिरफ्तार किया। बाद में इस नेटवर्क से जुड़े राजू कुमार मिश्रा, विक्रम सिंह उर्फ सनी और वतन को भी गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में सामने आया कि यह गिरोह प्रयागराज के सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से दवाइयां अवैध तरीके से हासिल करता था। बाद में दिल्ली लाकर उनके लेबल बदल दिए जाते थे और फिर उन्हें बाजार में असली दवा बताकर बेचा जाता था।
 

रेबीज वैक्सीन से इंसुलिन तक नकली दवा का चल रहा था कारोबार

 

दिल्ली पुलिस की कारवाई में बरामद दवाइयों में रेबीज वैक्सीन, इंसुलिन, हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन, स्नेक वेनम एंटीसीरम, ह्यूमन एल्ब्यूमिन, कैंसर और डायबिटीज की दवाइयां शामिल हैं।  पुलिस के मुताबिक, इन दवाइयों की बाजार कीमत करीब 6 करोड़ रुपये है. जांच में यह भी पता चला कि आरोपी दिल्ली के मुखर्जी नगर में बैठकर पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे थे. नकली दवाइयों की सप्लाई दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी, इम्फाल समेत कई राज्यों तक फैली हुई थी. पुलिस को शक है कि इस अवैध कारोबार में हवाला के जरिए पैसों का लेनदेन भी किया जा रहा था।

 

दिल्ली पुलिस की मामले में जांच जारी

 

दिल्ली पुलिस की पूछताछ में मुख्य आरोपी मनोज कुमार जैन ने खुलासा किया कि उसने आर्थिक तंगी के बाद नकली दवाइयों का कारोबार शुरू किया था. वहीं राजू कुमार मिश्रा ने पंजाब में नकली ह्यूमन एल्ब्यूमिन बनाने की यूनिट लगाने की बात कबूली. दूसरी ओर विक्रम और वतन सरकारी अस्पतालों से दवाइयां जुटाने का काम करते थे. फिलहाल सभी आरोपी पुलिस हिरासत में हैं. क्राइम ब्रांच का कहना है कि इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

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