यूनिवर्सिटी की मुख्य सफाई
केमिकल्स पर स्पष्टीकरण: यूनिवर्सिटी ने कहा कि उनके कैंपस में कोई खतरनाक रसायन या सामग्री का उपयोग या भंडारण नहीं होता। लैब्स का इस्तेमाल केवल MBBS छात्रों की ट्रेनिंग और शिक्षा के लिए किया जाता है, जो सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल्स का पालन करते हैं। विस्फोटक या संदिग्ध केमिकल्स का कैंपस से कोई लेना-देना नहीं है।
आरोपी डॉक्टरों से संबंध: संस्थान ने स्पष्ट किया कि मुजम्मिल और उमर उन नबी का यूनिवर्सिटी से कोई निजी संबंध नहीं था। वे केवल आधिकारिक कर्तव्यों (जैसे आपातकालीन विभाग) से जुड़े थे। यूनिवर्सिटी ने इन डॉक्टरों की गतिविधियों की निंदा की है।
वाइस चांसलर डॉ. भूपिंदर कौर का बयान
यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर डॉ. भूपिंदर कौर ने प्रेस रिलीज में कहा:
“हम इस दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम से बेहद आहत और व्यथित हैं और इसकी निंदा करते हैं। हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं इन दुखद घटनाओं से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं। हमारे दो डॉक्टर्स को जांच एजेंसियों ने हिरासत में लिया है। हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यूनिवर्सिटी का इन दोनों डॉक्टर्स से कोई निजी संबंध नहीं है।”
उन्होंने आगे जोड़ा:
घटना का संक्षिप्त विवरण
दिल्ली ब्लास्ट: 11 नवंबर को लाल किले के पास कार ब्लास्ट में 9 मौतें और कई घायल। उमर उन नबी (अल-फलाह यूनिवर्सिटी का पूर्व डॉक्टर) मुख्य संदिग्ध, जो ब्लास्ट से कुछ घंटे पहले यूनिवर्सिटी से i20 कार लेकर निकला था।
फरीदाबाद छापेमारी: जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस ने 30 अक्टूबर को मुजम्मिल को गिरफ्तार किया। उसके पास से 360 किलो सोडियम नाइट्रेट (विस्फोटक के रूप में इस्तेमाल) और हथियार मिले। कुल 2900 किलो विस्फोटक फतेहपुर तगा गांव में छिपाए गए थे। NIA की भूमिका: यूनिवर्सिटी पर छापेमारी जारी, 3 लैब कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। जांच में कैंपस को ‘आतंक का कैंपस’ करार दिया जा रहा है, लेकिन यूनिवर्सिटी सहयोग दे रही है।








