महराजगंज में सीएम योगी ने दिए बगावत के संकेत!

मंत्रिमंडल विस्तार मामले में गृह मंत्री अमित शाह से मिलने के बाद सीएम योगी ने लिया हिन्दू युवा वाहिनी का नाम

अपने संसदीय क्षेत्र से गायब रहे सांसद और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी

योगी ने बगावत की तो बीजेपी में पड़ जाएगी फूट!

हिंदुत्व का ब्रांड बनना योगी की बड़ी ताकत

चरण सिंह 

मंत्रिमंडल विस्तार मामले में गृह मंत्री अमित शाह से मिलने के बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के संसदीय क्षेत्र में महाराजगंज में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बगावत के संकेत दे दिए हैं। दरअसल शुक्रवार को महाराजगंज में ₹208 करोड़ से अधिक की 79 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने हिन्दू युवा वाहिनी का नाम प्रमुखता से लिया।

उन्होंने कहा जब गोरखपुर से सांसद थे तब भी बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ता भी महराजगंज में लोगों की समस्याएं हल कराते थे। देखने की बात यह है कि महाराजगंज में इतना बड़ा कार्यक्रम था पर यहां के सांसद और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी नदारद थे। मतलब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर योगी और अमित शाह के बीच ऐसी बात हुई है कि योगी नाराज हैं।

दरअसल योगी आदित्यनाथ 2027 के विधानसभा चुनाव में जुट गए हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के मामले में वह दिल्ली में गृह मंत्री से मिले हैं। मंत्रिमंडल का विस्तार तो नहीं हुआ पर योगी के तेवर जरूर दिखाई दिए। अमित शाह से मिलने के बाद अचानक हिन्दू युवा वाहिनी का नाम लेना योगी का बगावत का संकेत बताया जा रहा है। जमीनी हकीकत यह है कि योगी आदित्यनाथ मोदी और अमित शाह के न चाहते हुए भी अपने दम पर न केवल मुख्यमंत्री बने बल्कि दूसरा कार्यकाल भी पूरा कर रहे हैं और तीसरी बार ताल ठोक रहे हैं। अब तो जगजाहिर हो चुका है कि 2017 में जब बीजेपी की सरकार बनी तो मोदी और अमित शाह ने मनोज सिन्हा का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए फ़ाइनल कर दिया था। वह तो योगी की अपनी ताकत ही थी कि आरएसएस के हस्तक्षेप के बाद उन्हें सीएम बनाना पड़ा था।
देखने की बात यह है कि मोदी के बाद गृह मंत्री अमित शाह देश के प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। 2029 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए चेहरा दूसरा हो सकता है। मोदी राष्ट्रपति बन सकते हैं। अमित शाह के प्रधानमंत्री बनने में सीएम योगी सबसे बड़ा रोड़ा बताया जा रहा है। सीएम योगी बीजेपी में हिंदुत्व का ब्रांड बनते जा रहे हैं, इसलिए उनको साइडलाइन करना आसान नहीं है। तो क्या योगी को साइड लाइन करने के लिए अमित शाह यूपी विधानसभा चुनाव हारने के लिए तैयार हैं ?
सपा में सरकार बनाने के प्रति जो उत्साह देखा जा रहा है उसके पीछे भी योगी और अमित शाह का  टकराव बताया जा रहा है। ऐसी जानकारी मिल रही है कि अमित शाह यूपी विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी को जिताकर अपने लिए लोकसभा चुनाव मजबूत करना चाहते हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद सपा भी एनडीए का हिस्सा हो जाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। ऐसे में प्रश्न उठता है कि ऐसे में आरएसएस की क्या भूमिका रहेगी ? खुद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मोदी और अमित शाह की जोड़ी के दबाव में देखे जा रहे हैं। तमिलनाडु और प. बंगाल जीतने के बाद तो मोदी और अमित शाह का आत्मविश्वास आसमान पर है। अब तो नितिन गडकरी भी मोदी के सामने हाथ जोड़ते नज़र आ रहे हैं। राजनाथ सिंह ने तो पहले ही आत्मसमर्पण कर रखा है। ऐसे में योगी एकमात्र नेता हैं जो अमित शाह के किसी दबाव में नहीं आ रहे हैं।
ऐसे में बड़ा प्रश्न उठता है कि यदि योगी आदित्यनाथ के साथ बड़ा खेल होगा तो वह हार मान लेंगे। जगजाहिर है योगी आदित्यनाथ बहुत जिद्दी नेता हैं। यदि उनको लगा कि उनके साथ खेल खेला जा रहा तो यह बीजेपी में बगावत भी कर सकते हैं। योगी का बगावत करना मतलब बीजेपी में बड़ी टूट। यह बात खुद मोदी और अमित भी जानते हैं कि हिंदुत्व के ब्रांड मामले में योगी बीजेपी में नंबर एक नेता माने जा रहे हैं।
चाहे हरियाणा विधानसभा चुनाव हो, दिल्ली चुनाव हो, महाराष्ट्र चुनाव हो या फिर प. बंगाल चुनाव। हर जगह योगी की विशेष डिमांड थी। देशभर में योगी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में योगी को नाराज करना बीजेपी नेतृत्व को भारी पड़ सकता है। पर जमीनी हकीकत तो यही है कि अमित शाह के सामने प्रधानमंत्री बनने के एकमात्र रास्ता योगी को यूपी हरवाना है।
दरअसल बीजेपी में योगी एकमात्र मुख्यमंत्री हैं जो गृह मंत्री अमित शाह के दबाव में नहीं आते हैं। यह बात लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिली थी। यह योगी और अमित शाह की खींचतान के चलते बीजेपी 34 सीटों पर सिमट कर रह गई थी और सपा ने 37 सीटें झटक ली थी। बाद में अमित शाह के समर्थक नेता डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, ओमप्रकाश राजभर, तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और अनुप्रिया पटेल ने हार का ठीकरा योगी आदित्यनाथ के सिर पर फोड़ने का प्रयास किया था।
जानकारी के अनुसार उस समय योगी ने अपना बचाव करते हुए 34 सीटों पर उनकी सहमति के बिना अमित शाह के टिकट देने का आरोप लगा दिया था। बाद में 10 सीटों का उप चुनाव सीएम योगी को अपने दम पर लड़ने के लिए दिया गया। योगी आदित्यनाथ ने 10 में से 9 सीटें जीतकर अपने को साबित किया था। योगी के विरोधी नेताओं को चुप होना पड़ा था। दरअसल बीजेपी में सीएम योगी और गृह मंत्री अमित शाह के बीच खींचतान समय समय पर दिखाई देती रहती है। अब जब 2027 के विधानसभा की तैयारी शुरू हो चुकी है फिर से अमित शाह और योगी आदित्यनाथ का विवाद सामने आने लगा है। अब देखना यह है कि अब यह लड़ाई किस ओर जाती है ?
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