जलवायु परिवर्तन फिलवक्त दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती : कुलपति

विश्वविद्यालय से आने वाले समय में अन्य वैज्ञानिकों को भी विदेश भेजने की योजना

सुभाषचंद्र कुमार

समस्तीपुर। डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में जलवायु अनुकूल कृषि के लिए जीवंत और अनुकूलनीय रणनीति बनाने पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ पुण्यव्रत सुविमलेंदु पांडेय ने कहा कि जलवायु परिवर्तन फिलवक्त दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

 

जलवायु में हो रहे बदलाव से निपटने के लिए वैज्ञानिकों को किसानों के साथ मिलकर युद्ध स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ मिलकर काम करने का अर्थ है कि किसानों के अनुभव से भी वैज्ञानिकी समाधान की तलाश करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार जलवायु अनुकूल खेती पर काफी सक्रिय रूप से कार्य करने की दिशा में सतत प्रयासरत हैं और राज्य सरकार के सहयोग से 13 जिलों के लगभग 40 हजार किसान जलवायु परिवर्तन अनुसंधान और विस्तार के क्षेत्र में काफी अच्छा कार्य कर रहे हैं।

कुलपति डा पांडेय ने कहा कि केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा से अठारह वैज्ञानिकों को अमेरिका, ब्रिटेन, मेक्सिको, इथियोपिया, ज़ाम्बिया तथा तुर्की भेजा गया था जो वहां से विभिन्न तरह के अनुभव और प्रशिक्षण लेकर लौटे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई दुनिया के अन्य देशों के अनुभव से सीख लेकर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक भारत में सबसे बेहतर तकनीकों का विकास कर किसानों के खेत में बेहतर कार्य संपादित करेंगे।

कार्यक्रम के दौरान सभी वैज्ञानिकों ने अपने विदेश दौरे पर एक एक प्रेजेंटेशन दिया और वहां के विभिन्न पहलुओं के बारे में सभी वैज्ञानिकों को विस्तार से बताया। वैज्ञानिक डॉ सीके झा ने कहा कि विश्वविद्यालय में कई ऐसे तकनीक है जिनके बारे में विदेशी वैज्ञानिक भी उत्साहित हैं और वे लोग भी इसे अपनाने को विचार कर रहे हैं। निदेशक शिक्षा डॉ उमाकांत बेहरा ने कहा कि कुलपति डॉ पांडेय ने अनुठी पहल की है जिसमें वैज्ञानिकों को विभिन्न देशों में भेजा जा रहा है ताकि वे वहां के अनुसंधान तथा कृषि के अन्य पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल कर सकें ।

डॉ उमाकांत बेहरा ने कहा कि विश्वविद्यालय से आने वाले समय में अन्य वैज्ञानिकों को भी विदेश भेजने की योजना है। निदेशक अनुसंधान डॉ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि जब वैज्ञानिक दूसरे देशों में चल रहे विभिन्न कृषि के विकास के बारे में जानते हैं तो उनके ज्ञान का विस्तार होता है। वे अपने अनुभव का बेहतर उपयोग कर किसानों के लिए अच्छा कार्य कर सकते हैं।

शश्य विज्ञान विभाग के प्राध्यापक सह जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र के परियोजना निदेशक डॉ रत्नेश कुमार झा ने मेक्सिको में अपने अनुभव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने‌ पिछले एक वर्ष में 18 वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को विदेशी प्रयोगशालाओं और संस्थानों में तैनात करने का एक रिकॉर्ड बनाया है।

कार्यक्रम के दौरान निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ एमएस कुंडू ने कहा कि विश्वविद्यालय के इतिहास में यह पहली बार है कि अठारह वैज्ञानिकों को विदेशी विश्वविद्यालयों में भेजा गया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय कुलपति डॉ पांडेय के नेतृत्व में तेजी से प्रगति कर रहा है। कार्यशाला के दौरान मंच संचालन वैज्ञानिक सह परियोजना के सहनिदेशक डॉ कुमारी अंजनी ने किया।

कार्यक्रम के दौरान डीन बेसिक साइंस डॉ अमरेश चंद्रा , डीन इंजीनियरिंग डॉ अम्बरीष कुमार, डीन कम्युनिटी साइंस डॉ उषा सिंह, डीन फिशरीज डॉ पी पी श्रीवास्तव, पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ राकेश मणि शर्मा, डॉ मुकेश श्रीवास्तव, डा सतीश कुमार सिंह, ई अनुपम अमिताभ, डा पुष्पा सिंह, डा अनुपमा कुमारी, डॉ दिनेश रजक, सूचना पदाधिकारी डॉ कुमार राज्यवर्धन, डॉ महेश कुमार समेत विभिन्न वैज्ञानिक शिक्षक एवं पदाधिकारी मौजूद थे।

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