संविधान के पक्ष में खड़े हुए सीजेआई, कहा – पार्टियों नहीं, संविधान के लिए रहें वफादार  

डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा – सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करने से पहले वकीलों को सोचना चाहिए, क्योंकि वे आम आदमी नहीं हैं, उनका बयान मायने रखता है 
ज्यूडिशरी सिस्टम को लेकर चीफ जस्टिस ने कही बड़ी बात

द न्यूज 15 ब्यूरो 
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वकीलों और जजों को संविधान के प्रति वफादार होना चाहिए. जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस बात पर जोर दिया कि जजों को गैर-पक्षपातपूर्ण होना‌ जरूरी है.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने नागपुर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के शताब्दी समारोह में कहा, “हमारे जैसे जीवंत और तर्कपूर्ण लोकतंत्र में, ज्यादातर लोगों का झुकाव किसी न किसी राजनीतिक विचारधारा की तरफ होता है। अरस्तू ने कहा था कि मनुष्य राजनीतिक प्राणी हैं, और वकील कोई अपवाद नहीं हैं. हालांकि, बार के सदस्यों को अदालत और संविधान के साथ पक्षपातपूर्ण नहीं होना चाहिए।

 चीफ जस्टिस ने कही बड़ी बात

देश के चीफ जस्टिस ने भारत की ज्यूडिशरी सिस्टम को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।  उन्होंने कहा कि न्यायपालिका बार-बार अपनी अपनी स्वतंत्रता और गैर-पक्षपातपूर्ण, कार्यपालिका, विधायिका और निहित राजनीतिक हितों से शक्तियों के अलगाव के लिए आगे आई है। हालांकि हमको यह नहीं भूलना चाहिए कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और बार की स्वतंत्रता के बीच गहरा संबंध है। उन्होंने कहा कि एक संस्था के रूप में बार की स्वतंत्रता “कानून के शासन और संवैधानिक शासन की रक्षा के लिए नैतिक कवच” के रूप में कार्य करती है।

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाने वालों को नसीहत

 

सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठों के फैसले कठोर कार्यवाही, संपूर्ण कानूनी विश्लेषण और संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा, “एक बार फैसला सुनाए जाने के बाद, यह सार्वजनिक संपत्ति हो जाता है। एक संस्था के रूप में, हमारे कंधे चौड़े हैं। हम तारीफ और आलोचना, दोनों को स्वीकार करते हैं। यह तारीफ और आलोचना, भले ही पत्रकारिता, राजनीतिक टिप्पणी या सोशल मीडिया के माध्यम से ही क्यों न हो। हम अगर कुछ कहते हैं तो उसका असर बड़ा होता है। चीफ जस्टिस ने कहा कि बार एसोसिएशन के सदस्यों और पदाधिकारियों, वकीलों को अदालत के फैसलों पर प्रतिक्रिया करते समय आम लोगों की तरफ टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

  • Related Posts

    ‘पेलेट गन पर पूरी रोक नहीं लगा सकते, वहां कुछ उपद्रवी…’, SC ने केंद्र को दिया नोटिस
    • TN15TN15
    • July 30, 2026

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पैलेट गन के…

    Continue reading
    रिहा होंगे गिरफ्तार किए गए सभी विद्यार्थी!
    • TN15TN15
    • July 28, 2026

    छात्रों का प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों की…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    इसी मानसून सत्र में अपनी दो और मांगे भी मनवानी पड़ेंगी सीजेपी को!

    • By TN15
    • July 30, 2026
    इसी मानसून सत्र में अपनी दो और मांगे भी मनवानी पड़ेंगी सीजेपी को!

    असम में बाढ़ की त्रासदी पर डिबेट क्यों नहीं ? 

    • By TN15
    • July 30, 2026
    असम में बाढ़ की त्रासदी पर डिबेट क्यों नहीं ? 

    शिमला में गहराया जल संकट! जरूरत से काफी कम मिल रहा पानी

    • By TN15
    • July 30, 2026
    शिमला में गहराया जल संकट! जरूरत से काफी कम मिल रहा पानी

    ‘पेलेट गन पर पूरी रोक नहीं लगा सकते, वहां कुछ उपद्रवी…’, SC ने केंद्र को दिया नोटिस

    • By TN15
    • July 30, 2026
    ‘पेलेट गन पर पूरी रोक नहीं लगा सकते, वहां कुछ उपद्रवी…’, SC ने केंद्र को दिया नोटिस

    कलराज मिश्र ने रखी बाबा नीम करोरी धाम की आधार शिला!

    • By TN15
    • July 30, 2026
    कलराज मिश्र ने रखी बाबा नीम करोरी धाम की आधार शिला!

    शासन और प्रशासन को काम करना होगा नहीं तो …

    • By TN15
    • July 30, 2026
    शासन और प्रशासन को काम करना होगा नहीं तो …