कभी FIR के डर से तो कभी विपक्ष के, 7 साल से BSP के IN-OUT में फंसे आकाश आनंद

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को एक बार फिर जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। साल 2019 में सियासी पदार्पण करने वाले आकाश आनंद को बसपा में औपचारिक एंट्री के बाद 68वें दिन राष्ट्रीय समन्यवक नियुक्त कर दिए गए थे। यह शायद आकाश आनंद को भी नहीं पता रहा होगा कि जिस पार्टी में वह 2 महीने 8 दिन के अंदर नेशनल कोआर्डिनेटर नियुक्त किए जा रहे हैं, वहीं एक वक्त ऐसा भी आएगा जब वह बसपा में अपनी पहचान को तरस जाएंगे।

 

 

आकाश के साथ कब-कब, क्या-क्या हुआ?

 

16 अप्रैल 2019 को सियासी एंट्री करने वाले आकाश आनंद, 3 सितंबर 2026 तक, 7 साल, 4 महीने, 18 दिनों में BSP में कभी IN तो कभी OUT होते रहे हैं. लेकिन मायावती के हालिया फैसले ने उनकी सियासी करियर में ऐसे डॉट्स बना दिए हैं, जिसे मिटाना शायद आनंद के लिए बहुत मुश्किल हो।

मायावती ने साल 2023 की दिसंबर में आकाश को उत्तराधिकारी घोषित किया. फिर 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान मई में उन्हें पहली बार सभी पदों से हटा दिया गया था. यह वही वक्त था जब आकाश आनंद के एक संबोधन के बाद उन पर एफआईआर की नौबत आ गई थी।

साल 2024 के जून में मायावती ने आकाश को रिइंस्टेट कर दिया. फिर मार्च 2025 में उनको सभी पदों से हटा दिया गया. इसी साल अगस्त में आकाश ने मायावती से माफी मांगी और उन्हें दोबारा से राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया. इसके बाद सितंबर 2026 में मायावती ने एक बार फिर अपने भतीजे से सारे पद छीनते हुए उन्हें एक सामान्य कार्यकर्ता बना दिया है।

इस बार मायावती ने अपने भतीजे को पार्टी से निकालने के लिए दो बड़ी वजहें बताई हैं। एक तो उन्हें कांशीराम के उसूलों का सहारा लिया तो दूसरी ओर विपक्ष के साम-दाम-दंड-भेद की रणनीति का दावा किया।

मायावती के हालिया फैसले पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता और प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने चुटकी ली। सोशल मीडिया साइट एक्स पर राजपूत ने लिखा- मायावती के रहते राहुल और अखिलेश के भतीजे आकाश को किसी और दुश्मन की आवश्यकता नहीं है.कभी उसे बसपा में ले ती है कभी निकाल देतीं हैं कभी राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर बना देती हैं कभी हटा देतीं है.आकाश आनंद के भविष्य को अस्थिर कर उन्हें बीमार करने पर क्यों तुली हैं बहन जी? कहीं इसमें भाजपा की तो कोई चाल नहीं?

 

 

बसपा चीफ ने आज आकाश पर क्या कहा?

 

 

बता दें मायावती ने भतीजे को पदमुक्त करने को लेकर एक बयान में कहा कि- आकाश आनंद को अभी और अधिक परिपक्व / मैच्योर होने की जरुरत है। तब तक इनको पार्टी की अभी बड़ी जिम्मेवारी देना उचित नहीं होगा, जो कि विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों को इस्तेमाल करके चुनाव में हानि पहुंचाने से बचने के लिये भी समय की जरूरत है।

कांशीराम के उसूलों का हवाला देते हुए मायावती ने कहा- जिस प्रकार कांशीराम ने अपने परिवार के लोगों व अन्य रिश्तों-नातों आदि को पार्टी कार्य में सहयोग करने की छूट तो दे दी थी, किन्तु उन्हें चुनाव लड़ाने या सरकार बनने पर कोई भी पद आदि देने के वे खिलाफ थे, उसी प्रकार से उस संकल्प पर मैं भी पूरी तरह से कायम हूं. जिस पर अमल करते हुये ही मैंने आकाश आनन्द को पार्टी में कार्य करने की तो इनको इजाजत दी है, जो हकीकत आप सभी लोगों के सामने है।

इस संदर्भ में राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र मिश्रा ने कहा कि कांशीराम जी होते तो कभी अपने परिवार में उत्तराधिकार देते ही नहीं. अगर वो कांशीराम की ओट ले रहीं हैं तो गलत कर रहीं हैं. जिन मायावती को उन्होंने उत्तराधिकार दिया, वह उनके परिवार की नहीं बल्कि समाज की प्रतिभाशाली महिला थीं। मायावती के लिए जब भी कोई चुनाव आता है तो एक चुनौती कि तरह आता है. वह दो कदम आगे बढ़ती हैं, दो कदम पीछे हटती हैं. वह समझ नहीं पा रहीं हैं कि वह अपने पॉलिटिकल पार्टी के जनाधार को समेटे या वो अपनी पार्टी को पतंग की डोर तरह काटकर छोड़ दें. कुछ उत्साही लड़के होते हैं वो इस कटी पतंग की डोर पकड़ने की कोशिश करते हैं. जब-जब आकाश को पॉवर दिया, उसके तुरंत बाद उनके सारे कनेक्शन काटे, उनके मतदाता समझ नहीं पा रहे हैं कि उनकी तारीफ करें या उत्तराधिकारी मानें या पुराने नेताओं की तरह छोड़ दें।

 

 

आकाश के स्टैंड से डरीं बसपा चीफ?

 

 

मिश्रा के मुताबिक आनंद ने जब-जब कोई स्टैंड लिया जिससे बसपा रिवाइव हो सकती है या बीजेपी के लिए भारी पड़ता है  तो मायावती के सामने नया संकट आ जाता है यह संकट कहीं लिखत पढ़त में नहीं है पर जो उनके फैसले हैं वो बताते हैं कि वह आगे पीछे में फंसी हुईं हैं. आज का उनका फैसला, आकाश आनंद के करियर पर बहुत सारे डॉट्स लगा चुका है. अब आकाश को उठने के लिए मेहनत से ज्यादा इन डॉट्स को मिटाने में करनी होगी.

मिश्रा के अनुसार अभी तक जिस तरह के कुछ फैसले मायावती ने लिए हैं उससे यह लगता है कि पार्टी बीजेपी के अप्रत्यक्ष प्रभाव में हैं. अगर आज मायावती, आकाश आनंद को ट्रायल एरर करने का मौका नहीं देंगी तो कैसे होगा? आखिर कांशीराम ने भी मायावती को ट्रायल एरर करने का मौका दिया तभी वह सियासत में आज इस पायदान पर हैं. मायावती के इन फैसलों से पार्टी की स्थिति में कंफ्यूजन है और आकाश आनंद का भी सियासी करियर डामाडोल है.

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता डॉ. आशुतोष वर्मा का कहना है कि पहले उनके फैसलों से परोक्ष रूप से भारतीय जनता पार्टी को ही फायदा हो रहा था, लेकिन अब ये कदम खुद बहुजन समाज पार्टी के लिए खतरे की घंटी साबित हो रहे हैं. कभी वह आकाश आनंद को राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त करती हैं, तो बाद में उन्हें पार्टी से ही निकाल देती हैं. हाल ही में उन्होंने लखनऊ में एक बड़ी बैठक की, लेकिन आकाश आनंद को उसमें आमंत्रित तक नहीं किया. मुझे लगता है कि या तो वह उलझन में हैं या फिर राजनीति से उनका मोहभंग हो गया है।

 

 

आकाश के ससुर के चलते मायावती नहीं कर पा रहीं भरोसा?

 

आकाश आनंद के पर कतरने से पहले मायावती उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। हालांकि मिश्रा आज के फैसले को आकाश के ससुर से चल रही नाराजगी से नहीं जोड़ते हैं. उनका कहना है कि जब बसपा में सब कुछ मायावती ही हैं, नाम भले आकाश आनंद हों, तो वह कैसे उम्मीद करती हैं उनके चेहरे पर सिद्धार्थ की छाया, उनकी शख्सियत और ताकत को कम कर पाएगी।

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