• व्यक्तियों के साथ क्षेत्रों का भी हो रहा है शोषण
• कॉर्पोरेट परस्त रास्ते के खिलाफ स्वदेशी विकास के रास्ते की जरूरत – डॉक्टर दिनेश अबरोल
• आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट व झारखंड नवनिर्माण दल की हूल दिवस के अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला रांची में हुई
रांची। देश में व्यक्तियों के साथ-साथ क्षेत्रों का भी शोषण किया जा रहा है। झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा जैसे प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर क्षेत्र में विकास गायब है और आम जनता की जिंदगी बदहाल है। झारखंड में आदिवासियों और मूल निवासियों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता देने के लिए 1931 खतियान आधारित डोमिसाइल कानून विधानसभा से पारित किया गया था। जिसे असंवैधानिक रूप से राष्ट्रपति यानी मोदी सरकार ने दबा रखा है। आज झारखंडी अस्मिता की रक्षा के साथ-साथ रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेंशन, भूमिहीनों को आवासीय भूमि के संवैधानिक अधिकारों को खड़ा करना होगा। यदि सरकार इच्छाशक्ति दिखाए तो कार्पोरेट घरानों की सम्पत्ति व उत्तराधिकार टैक्स लगाकर जन कल्याण पर खर्च बढ़ाया जा सकता है और लोगों के संवैधानिक अधिकार दिए जा सकते हैं। यह बातें ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के संस्थापक सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने हूल दिवस के अवसर पर पुरानी विधानसभा, रांची में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि झारखंड से पूंजी का पलायन हो रहा है। महिलाओं और आम नागरिकों को चिटफंड कंपनियों और माइक्रो फाइनेंस कंपनियां लूट रहीं हैं। आज हालात यह है कि आम नागरिकों से कम टैक्स कार्पोरेट देता है। लेकिन देश के संसाधनों पर उसी का आधिपत्य होता जा रहा है। जनगणना में आदिवासी धर्म कोड की लोकप्रिय मांग को सुनने के लिए मोदी सरकार तैयार नही है, जबकि 1961 के पहले उन्हें यह अधिकार हासिल था। कार्यशाला के प्रमुख वक्ता वैज्ञानिक डॉक्टर दिनेश अबरोल ने कहा कि देश में विकास के रास्ते को बदलने की जरूरत है। कॉर्पोरेट परस्त अर्थव्यवस्था नहीं स्वदेशी व स्थानीय जरूरत के अनुरूप किसान मजदूर, छोटे मझोले व्यापार के विकास की लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्था की जरूरत है। यही हमारे आजादी के आंदोलन का राष्ट्र निर्माण का रास्ता था। आज हालात यह हो गई है पूंजी का केंद्रीयकरण हो रहा है और आम आदमी हाशिए पर जा रहा है।
कृषक नवनिर्माण दल उड़ीसा के संयोजक अक्षय कुमार ने कहा झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों, जल-जंगल-जमीन पर आदिवासियों और मूल निवासियों का अधिकार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के महासचिव डॉक्टर राहुल दास ने कहा कि जनशक्ति के बल पर ही बदलाव संभव है और इसके लिए चौतरफा प्रयास करना होगा। ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के झारखंड प्रभारी व झारखंड नवनिर्माण दल के केंद्रीय संयोजक विजय सिंह ने कहा कि झारखंड में लोगों की बैंकों में जमा 60 प्रतिशत पूंजी दूसरे प्रदेशों में जा रही है। गांव-गांव माइक्रोफाइनेंस और चिट फंड कंपनियाँ महिलाओं और आम आदमी की लूट कर रहीं हैं। इन पर नियंत्रण करना और इनसे पैसे की वापसी सरकार का दायित्व है। इसके साथ ही झारखंड का पैसा झारखंड के विकास के लिए खर्च हो और महिलाओं व आम आदमी को उद्यम के लिए सस्ते दर पर कर्ज मिलना चाहिए।
कार्यशाला में हूल दिवस के नायक सिध्दू-कानू व अन्य शहीदों को दो मिनट का मौन रख श्रध्दांजलि दी गई। कार्यशाला को अखिल भारतीय मानव सेवा दल के अध्यक्ष शिव प्रसाद अग्रवाल, आम आवाम विकास मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामनरेश यादव, झारखंड जन क्रांति मोर्चा के अध्यक्ष अमरेंद्र मुनी, रोजगार अधिकार अभियान के कोऑर्डिनेटर राजेश सचान, दिनकर कपूर, भाकपा (माले) रेड स्टार के महावीर पोद्दार, रेखा सिंह, राष्ट्रीय कुली मोर्चा के कोऑर्डिनेटर राम सुरेश यादव, पुष्पा उरांव, राजेंद्र प्रसाद गोंड, कृपा शंकर पनिका, हफीजुर रहमान, अब्दुल खालिक, रूबी सिंह गोंड, सुरेंद्र पांडेय आदि ने संबोधित किया।






