टीएमसी का वजूद ख़त्म करने में जुटी बीजेपी, कमल थाम सकते हैं कई विधायक और सांसद 

अभिषेक बनर्जी पर मनमानी का आरोप लगाकर नाराज हैं विधायक कर सांसद

टूट में शत्रुघ्न सिन्हा और बाबुल सुप्रियो का नाम चल है सबसे आगे

चरण सिंह 
टीएमसी मुखिया ममता बनर्जी भले ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न दे रही हों पर प. बंगाल में उनके पर पूरी तरह से कतरने की तैयारी बीजेपी ने का रली है। टीएमसी के न केवल विधायक बल्कि कई सांसद भी बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं। टीएमसी के विधायकों की मीटिंग में 10 विधायकों के न पहुंचने पर इस बात को बल मिला है। जानकारी मिल रही है कि इस मीटिंग में 80 विधायकों में से 10-11 विधायक गायब रहे। ऐसे ही 29 लोकसभा सांसदों में से 10-12 और 13 राज्य सभा सांसदों में 8-9 सांसदों के बीजेपी के संपर्क में आने की बात सामने आ रही है। यह संख्या बढ़ भी सकती है।
दरअसल ममता बनर्जी के अड़ियल रवैये को देखते हुए गृहमंत्री अमित शाह आक्रामक मूड में आ गए हैं। प. बंगाल में बीजेपी साम दाम दंड भेद सबका इस्तेमाल कर रही है। ऐसे नहीं तो वैसे ही सही। राजी से नहीं टूटेंगे तो एजेंसियों का दबाव बनाकर तोडा जाएगा। लोकसभा सांसदों में शत्रुघन सिन्हा और बाबुल सुप्रियो का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। वैसे भी शत्रुघ्न सिन्हा बीजेपी के ही नेता रहे हैं। बीजेपी टीएमसी तोड़ सकती हैं क्योंकि प. बंगाल में ममता बनर्जी अब पॉवर में नहीं रही हैं। प. बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद अब मुसलमान भी खुलकर ममता बनर्जी का साथ देने से बच रहे हैं। सुवेंदु अधिकारी के पीए की हत्या के बाद मामला और बिगड़ गया है।
टीएमसी को तोड़ने की रणनीति के पीछे बीजेपी की रणनीति है कि ममता बनर्जी इंडिया गठबंधन का कोई बड़ा आंदोलन न खड़ा पाए। क्योंकि ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी, सपा मुखिया अखिलेश यादव, आप मुखिया अरविन्द केजरीवाल और उद्धव ठाकरे का नाम लेकर उनका साथ देने की बात की थी। देखने की बात यह है कि टीएमसी टूटने से जहां एक ओर ममता बनर्जी कमजोर होंगी वहीं इंडिया गठबंधन के दूसरे दलों में टूट का डर भी बैठेगा। यह बीजेपी का टूट का ही डर है कि अभी तक इंडिया गठबंधन को कोई नेता ममता बनर्जी से मिलने प बंगाल नहीं गया है।
ऐसा नहीं है कि प. बंगाल में ही टूट का खेल खेला जाएगा। इससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना में टूट हुई थी। एकनाथ शिंदे की अगुआई में बाला साहेब की शिवसेना में टूट हुई थी। शरद पवार की एनसीपी में उनके भतीजे अजीत पवार की अगुआई में तोड़ा गया था। हरियाणा में इनेलो तो तोड़कर दुष्यंत चौटाला से जेजेपी पार्टी बनवाई गई थी। चंपई सोरेन की अगुआई में झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा में तोड़ की गई थी।

दरअसल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की भारी हार के बाद ममता बनर्जी ने 6 मई को कालीघाट स्थित अपने आवास पर नवनिर्वाचित पार्टी विधायकों की अहम बैठक बुलाई थी। जानकारी मिल रही है कि इस बैठक में 70 विधायक ही पहुंचे। इस में बड़ा प्रश्न उठता है कि ये 10 विधायक क्यों नहीं पहुंचे।

दरअसल ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर मनमानी का आरोप लगाकर कई विधायक और सांसद बीजेपी में जाने को तैयार बैठे हैं। वैसे भी बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कई सांसदों और विधायकों के बीजेपी के सम्पर्क में होने की बात कही है। ममता ने बैठक में कहा कि वे इस्तीफा नहीं देंगी और केंद्र को उन्हें बर्खास्त करना पड़ेगा। दरअसल हार के बाद पार्टी में आंतरिक खींचतान या नाराजगी की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ विधायकों के बीजेपी की ओर झुकाव या बागी तेवर की अटकलें लगाई जा रही हैं।
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