विधानसभा चुनाव : परिवार और वंशवाद पर स्थापित कमजोर विपक्षी नेतृत्व के चलते 4-1 से जीत रही भाजपा!

विभिन्न मोर्चे पर विफल रहने वाली भाजपा सरकारों की खामियों का फायदा नहीं उठा पाए विपक्ष के नेता 

चरण सिंह राजपूत

प्रख्यात पत्रकार और सांसद रहे कुलदीप नैयर ने परिवार और वंशवाद के चलते देश में स्थापित हुए नेतृत्व के बारे में बहुत पहले लिख दिया था कि इस कमजोर नेतृत्व का देश को बहुत बड़ा खामियाना उठाना पड़ेगा। कुलदीप नैयर का वह कथन आज सटीक बैठ रहा है। देश में जितना कमजोर विपक्ष आज की तारीख में है इतना कमजोर विपक्ष कभी नहीं रहा है। अपने पहले कार्यकाल में मोदी सरकार जब कुछ खास न कर पाई फिर भी 2019 का लोकसभा चुनाव उसने प्रचंड बहुमत से जीत लिया। ऐसे ही देश में हुए राष्ट्रव्यापी किसान आंदोलन, महंगाई और बेरोजगारी की मार के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा पांच राज्यों में से चार राज्यों में सरकार बनाने जा रही है। दरअसल भाजपा के मंझे हुए नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने विपक्ष का नेतृत्व बोना साबित हो रहा है। परिवारवाद और वंशवाद के बल पर स्थापित कांग्रेस से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सपा से अखिलेश यादव, रालोद से जयंत चौधरी वह जमीनी संघर्ष नहीं कर पाये जो बदलाव के लिए जरुरी होता है। नहीं तो दिल्ली में अरविंद केजरीवाल औेर पश्चिमी बंगाल में ममता बनर्जी के सामने भाजपा क्यों नहीं जीत पाई। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में इस बार अखिलेश याादव के लिए सुनहरा मौका था पर वंशवाद के बल पर पिता की जगह लेने वाले इस युवा नेता के संघर्ष के अभाव और बिगड़े बोल के चलते योगी आदित्यनाथ फिर से बाजी मार रहे हैं। पांच साल तक विपक्ष में रहने वाले अखिलेश यादव और जयंत चौधरी कोई बड़ा आंदोलन न कर पाए। यही वजह थी कि राकेश टिकैत ने कई बार मंच से विपक्ष को  न केवल कमजोर बताया बल्कि उनका कहना था कि यदि विपक्ष मजबूत होता तो नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को आंदोलन न करना पड़ता। अखिलेश यादव और जयंत चौधरी को यह भी समझ लेना चाहिए कि यह जो भी उन्हें बढ़त मिली है, वह किसान आंदोलन और उत्तर प्रदेश में किसान नेताओं के चुनाव प्रचार के चलते मिली है। किसान आंदोलन का चेहरा बन चुके राकेश टिकैत, योगेन्द्र यादव औेर डॉ. सुनीलम के अलावा बड़े स्तर पर किसान नेता लगातार रालोद और सपा गठबंधन के पक्ष में भाजपा को हराने की अपील कर रहे थे। 2019 के आम चुनाव में बंपर जीत हासिल करने वाली भाजपा सरकार में कोरोना महामारी के चलते लोगों को होने वाली बेतहाशा परेशानी। जगजाहिर है कि  2020-2021 में कोरोना महामारी के चलते देश में बड़े स्तर पर जान और माल की हानी हुई। कई मोर्चों पर केंद्र के साथ ही कई राज्यों की भाजपा सरकारें कई मोर्चों पर विफल साबित हुई। उसके बाद नये कृषि कानूनों के खिलाफ 11 महीने तक किसान आंदोलन चला। इसके अलावा विपक्ष के पास महंगाई और बेरोजगारी का भी बड़ा मुद्दा  था। एक तरफ पश्चिम यूपी में किसान आंदोलन को मुद्दा था तो वहीं उत्तराखंड में तीन मुख्यमंत्री बनाए जाने की भी चर्चा थी, लेकिन ये सभी मुद्दे नहीं चल पाए और अंत में रिजल्ट आया तो 5 राज्यों में से 4 में भाजपा सरकार बनाने जा रही है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश की जीत अहम है, जहां 35 सालों बाद कोई पार्टी सत्ता में वापसी कर रही है। रुझान में 270 सीटों पर बीजेपी बढ़त बनाये हुए है। इसके अलावा उत्तराखंड में मुख्यमंत्रियों का बदलना भी भाजपा के उतना खिलाफ नहीं गया। इसका सीधा सा मतलब विपक्ष का कमजोर नेतृत्व है।उत्तराखंड के गठन के बाद यह पहला मौका है, जब किसी पार्टी को लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल होने जा रही है। वहीं मणिपुर में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और 60 में से 25 सीटें जीतती प्रतीत हो रही है। स्थिति लगभग साफ है कि वह सरकार बनाने जा रही है। 40 सीटों वाले गोवा में भी भाजपा 19 सीटों पर बढ़त हासिल कर रही है। तमाम खामियों के बावजूद बीजेपी यह चुनाव 4-1 से जीतने जा रही है।
हालांकि इस जीत में कल्याणकारी योजनाओं का असर भी देखा जा रहा है।  उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत सभी राज्यों में भाजपा की ओर से मुफ्त राशन और मकान दिए जाने की बात कही जा रही थी। पीएम आवास योजना, राशन स्कीम और उज्ज्वला जैसी तमाम योजनाओं का भाजपा ने जमकर प्रचार किया था। सीएम योगी आदित्यनाथ तो लगभग हर सभा में बताते थे कि राज्य में 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। लेकिन यह स्कीम केंद्र सरकार की ही रही है। उत्तर प्रदेश का विपक्ष कोरोना काल की परेशानियों के अलावा महंगाई और बेरोजगारी को मुद्दा नहीं बना पाई। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के पुलिस को हड़काते हुए ऐ पुलिस, ऐ पुलिस की भाषा का बीजेपी की आईटी सेल ने खूब दुष्प्रचार किया। ऊपर से अखिलेश कुंडा में राजा भैया पर कटाक्ष करते हुए कुंडी लगाने की बात भी बोल आये। भाजपा की ओर से जहां प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री स्टार प्रचारक की भूमिका में थे तो अपनी पार्टी से अखिलेश यादव अकेले स्टार प्रचारक थे। उन्होंने पूर्वांचल चुनाव के लिए पिता मुलायम सिंह यादव, चाचा शिवपाल यादव, पत्नी डिम्पल यादव को स्टार प्रचारक की सूचि में डाला पर किसी को कहीं पर प्रचार करते नहीं देखा गया।
उत्तराखंड में 2017 में जीत मिलने के बाद भाजपा ने आरएसएस के प्रचारक रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत को सीएम बनाया था, लेकिन आखिरी दौर में चीजें बदलीं तो उनके स्थान पर तीरथ सिंह रावत को सीएम बनाया गया और आखिरी कुछ महीनों में उन्हें भी हटाकर पुष्कर सिंह धामी को कमान दे दी गई। इस तरह की अस्थिरता का फायदा भी विपक्ष नहीं उठा पाया।  कांग्रेस के पूर्व सीएम हरीश रावत खुद लालकुआं सीट से हार गए।  मणिपुर विधानसभा चुनाव की 60 सीटों में से 41 सीटों पर प्रारंभिक रूझान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 19 सीटों पर आगे चल रही है। वाबगई विधानसभा नर्विाचन क्षेत्र से भाजपा के डॉ. यू देबेन सिंह ने अपने प्रतद्विंदी कांग्रेस के प्रत्याशी एम डी फजूर रहीम को 50 मतों के अंतर से हरा दिया है।  मणिपुर चुनाव में 89.3 फीसदी हुआ है मतदान : मणिपुर में 12वीं आम विधानसभा चुनाव में 89.3 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो अब तक का रिकॉर्ड मतदान है। हां पंजाब में आप सरकार बनाने जा रही है। वहां पर भी बीजेपी कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर अपना काम कर चुकी है। कांग्रेस ने अपनी गलती से पंजाब गंवाया है। जिस किसान आंदोलन का फायदा आप ने उठाया है उसे कांग्रेस को उठाना चाहिए था पर वंशवाद और परिवारवाद के बल पर टिके नेतृत्व ने इन सब का फायदा नहीं उठाया। यही वजह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में परिवारवाद और वंशवाद को लेकर बड़ा हमला बोला।

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