सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने हाल के वर्षों में इराक और सीरिया में आर्थिक और सैन्य गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नीचे इन दोनों देशों के निवेश और सैन्य तैनाती के बारे में संक्षेप में जानकारी दी गई है।
सऊदी अरब का निवेश और सैन्य तैनाती
इराक में निवेश: सऊदी अरब ने इराक में अपनी आर्थिक उपस्थिति बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं, खासकर ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में। उदाहरण के लिए, सऊदी बेसिक इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (SABIC) ने इराक में कार्यालय खोलने की घोषणा की और दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में 18 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए हैं। सऊदी अरब इराक के बसरा क्षेत्र में तेल और गैस से संबंधित परियोजनाओं में निवेश कर रहा है, जिसे इराक की ऊर्जा राजधानी माना जाता है। यह निवेश क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ाने और ईरान के प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति का हिस्सा है।
सीरिया में निवेश और सैन्य उपस्थिति: सऊदी अरब ने हाल ही में सीरिया में बशर अल-असद शासन के पतन के बाद नई सरकार के समर्थन में अरबों डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यह कदम क्षेत्र में ईरान और रूस के प्रभाव को कम करने की दिशा में देखा जा रहा है। सैन्य रूप से, सऊदी अरब ने सीरिया में प्रत्यक्ष सैन्य तैनाती के बजाय प्रॉक्सी समूहों और गठबंधनों के माध्यम से प्रभाव बनाए रखा है, जैसे कि यमन में सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन में।
सैन्य शक्ति : सऊदी अरब ने अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत करने के लिए अमेरिका और चीन से हथियारों की खरीद की है। ग्लोबल फायरपावर की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के पास 2,57,000 सक्रिय सैनिक और 283 फाइटर जेट हैं, जो इसे क्षेत्रीय सैन्य शक्ति बनाता है।
यूएई का निवेश और सैन्य तैनाती
इराक में निवेश: यूएई ने इराक में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश किया है। 2021 में, यूएई की कंपनी मसदर ने इराक के साथ पांच सौर ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह इराक की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करने का हिस्सा है।
सीरिया में उपस्थिति: यूएई ने सीरिया में सैन्य तैनाती की तुलना में कूटनीतिक और आर्थिक प्रभाव पर अधिक ध्यान दिया है। हालांकि, यमन जैसे अन्य क्षेत्रीय संघर्षों में यूएई ने सक्रिय सैन्य भूमिका निभाई थी, लेकिन 2019 में उसने यमन से अपनी सेना की कटौती शुरू की। सीरिया में यूएई ने प्रत्यक्ष सैन्य तैनाती के बजाय क्षेत्रीय स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया है।
सैन्य रणनीति: यूएई ने क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ाने के लिए सैन्य और आर्थिक रणनीतियों का संयोजन किया है। उदाहरण के लिए, सूडान में अबू उमामा बंदरगाह के निर्माण और प्रबंधन के लिए यूएई ने समझौते किए हैं, जो लाल सागर में इसके सामरिक प्रभाव को दर्शाता है।
सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव
दोनों देशों के बीच यमन युद्ध और तेल उत्पादन नीतियों को लेकर तनाव रहा है। सऊदी अरब यमन में सैन्य अभियानों को जारी रखना चाहता है, जबकि यूएई ने वहां से अपनी सेना वापस बुलाई। इसके अलावा, ओपेक में तेल उत्पादन को लेकर मतभेद सामने आए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। यह तनाव क्षेत्रीय निवेश और सैन्य रणनीतियों में भी देखा जा सकता है, जहां दोनों देश अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाते हैं।






