पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग (ECI) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की है। इसमें कुल 7.66 करोड़ मतदाताओं में से 58 लाख 20 हजार 898 नाम काटे गए हैं, जिससे कुल मतदाता संख्या घटकर 7.08 करोड़ रह गई। नाम कटने के मुख्य कारण बताए गए हैं: मतदाता की मृत्यु, स्थायी पलायन, डुप्लीकेशन (दोहराव) और गणना के समय फॉर्म जमा न करना। लेकिन असली विवाद ये है कि कटे नामों में ज्यादातर हिंदी भाषी क्षेत्रों से हैं, जहां बिहार-यूपी से आए प्रवासियों की बड़ी आबादी रहती है। इससे टीएमसी और बीजेपी के बीच नया सियासी बवाल छिड़ गया है। आइए, स्टेप बाय स्टेप समझते हैं।
SIR प्रक्रिया क्या है और क्यों हुई?
SIR एक विशेष गहन पुनरीक्षण है, जो वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाने के लिए किया जाता है। बंगाल में ये प्रक्रिया 27 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई थी। इसमें बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) ने घर-घर जाकर वेरिफिकेशन किया। अगर कोई मतदाता फॉर्म नहीं भरता या मूल निवास (होम स्टेट) चुनता है, तो नाम कट सकता है।
बंगाल के अलावा राजस्थान, गोवा, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में भी SIR हुई, जहां कुल 1.02 करोड़ नाम कटे (कुल मतदाताओं का 7.6%)। लेकिन बंगाल में सबसे ज्यादा (58 लाख)।
बंगाल के अलावा राजस्थान, गोवा, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में भी SIR हुई, जहां कुल 1.02 करोड़ नाम कटे (कुल मतदाताओं का 7.6%)। लेकिन बंगाल में सबसे ज्यादा (58 लाख)।
बिहार-यूपी कनेक्शन: हिंदी भाषी क्षेत्रों में ज्यादा कटौती
बंगाल सालों से बिहार, यूपी जैसे राज्यों से प्रवासियों का गढ़ रहा है। यहां मजदूर, व्यापारी और पीढ़ी-दर-पीढ़ी रहने वाले हिंदी भाषी (गैर-बंगाली) बड़ी संख्या में हैं। SIR में इन्होंने अपनी मूल जगह (गृह राज्य) को प्राथमिक निवास चुना, जिससे बंगाल की लिस्ट से नाम कट गए।
उच्च कटौती वाले क्षेत्र (हिंदी भाषी बहुल):क्षेत्रकटौती प्रतिशतटिप्पणीजोरासांको36.66%हिंदी भाषी आबादी अधिकचौरंगी35.45%बीजेपी की मजबूत पकड़कोलकाता उत्तर25.92%प्रवासी मजदूर बहुलकोलकाता दक्षिण23.82%यूपी-बिहार कनेक्शनभवानीपुर (ममता बनर्जी की सीट) 21.55%2.06 लाख में से 44,787 नाम कटेहावड़ा उत्तर26.89%बैरकपुर19.01%आसनसोल उत्तर14.71%आसनसोल दक्षिण13.68%
पूर्व CPI(M) नेता सुजान चक्रवर्ती के मुताबिक, ये कटौती बिहार-यूपी के प्रवासी मजदूरों के नामों से जुड़ी हैं, जो गृह राज्य की लिस्ट में बने रहे।
दिलचस्प: बीजेपी के कोर वोटबैंक मतुआ समुदाय (बांग्ला हिंदू शरणार्थी) बहुल इलाकों में भी कटौती हुई, जैसे कसबा (17.95%), सोनारपुर दक्षिण (11.29%)।
मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में कम कटौती: पूर्वाग्रह का आरोप
जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है, वहां कटौती 10% से नीचे रही। उदाहरण:क्षेत्रमुस्लिम %कटौती %मुर्शिदाबाद66.3%4.84%मालदा51.6%6.31%डोमकल-3.4%रेजिनगर-5.04%चोपड़ा-7.44%
टीएमसी का दावा: ये आंकड़े बीजेपी के “रोहिंग्या-बांग्लादेशी घुसपैठिए” के दावों को झूठा साबित करते हैं। कुल फर्जी वोटर सिर्फ 1.83 लाख पाए गए।
टीएमसी का दावा: ये आंकड़े बीजेपी के “रोहिंग्या-बांग्लादेशी घुसपैठिए” के दावों को झूठा साबित करते हैं। कुल फर्जी वोटर सिर्फ 1.83 लाख पाए गए।
राजनीतिक बवाल: टीएमसी vs बीजेपी
ये ड्राफ्ट जारी होते ही दोनों पार्टियां भिड़ गईं। टीएमसी इसे अपनी जीत बता रही है, जबकि बीजेपी इसे TMC की साजिश।
टीएमसी की तरफ से:
महासचिव अभिषेक बनर्जी: “SIR ने बीजेपी के झूठे दावों को बेनकाब किया। बंगालियों को बदनाम करने के लिए माफी मांगो।”
प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती: “कटे नाम यूपी-बिहार के हैं, बांग्लादेशी नहीं। जनगणना से सच्चाई सामने आएगी।”
बीजेपी की तरफ से:
नेता राहुल सिन्हा: “TMC के दबाव से BLOs निष्पक्ष नहीं रहे। चुनाव आयोग को सूचना दी।”
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी: “राज्य प्रशासन ने SIR में हेरफेर किया। TMC ने तटस्थता का उल्लंघन किया, पुलिस का दुरुपयोग। मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा।”
केंद्रीय मंत्री सुकांता मजूमदार: “1 करोड़ से ज्यादा संदिग्ध वोटर थे। अगर CAA समय पर न लिया तो ममता जिम्मेदार।”
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी: “राज्य प्रशासन ने SIR में हेरफेर किया। TMC ने तटस्थता का उल्लंघन किया, पुलिस का दुरुपयोग। मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा।”
केंद्रीय मंत्री सुकांता मजूमदार: “1 करोड़ से ज्यादा संदिग्ध वोटर थे। अगर CAA समय पर न लिया तो ममता जिम्मेदार।”






