व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए बहुसंख्यक जनता के हितों पर बार-बार मर्मांतक चोट की मोदी ने

नरेंद्र मोदी: एक ऐसा प्रधानमंत्री,जिसने अडानी-अंबानी से धन, मोहन भागतवत की कृपा और अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए देश की बहुसंख्यक जनता के हितों पर बार-बार मर्मांतक चोट किया, देश की संप्रभुता का सौदा किया, देश की गरिमा को गिराया और देश की एकता के आधार भाईचारे को तहस-नहस कर दिया-प्रधानमंत्री के रूप में उनका 12 सालों का कार्यकाल इसकी गवाही प्रस्तुत कर रहा है

 

देश में गैस-तेल संकट ( ऊर्जा संकट) और नरेंद्र मोदी

 

21वीं सदी में किसी भी देश के लिए सबसे बुनियादी जरूरत ऊर्जा ( पेट्रोलियम पदार्थों) है। खासकर भारत जैसे देश के लिए जहां खुद के उर्जा स्रोत बहुत ही सीमित है और हम दुनिया से आयात पर निर्भर हैं। दुनिया के सारे देश इसे सुनिश्चित बनाने के लिए हर तरह के कदम उठाते हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप को खुश करने के लिए भारत की उर्जा सुरक्षा जैसे सबसे अहम चीज को खतरे में डाल दिया। जिसके शुरुआती लक्षण गैस के लिए पूरे देश में अफरा-तफरी के रूप में दिख रहा है। यह काम नरेंद्र मोदी ने निम्न देश विरोधी कदम उठा कर किया-

 

ट्रंप के आदेश पर रूस से तेल की खरीदारी बंद करके-

 

रूस दुनिया में पेट्रोलियम पदार्थों ( पेट्रोल, डीजल और गैस आदि) के सबसे बडे़ उत्पादकों में एक है। वह हमें सस्ते रेट और जितनी जरूरत हो उसकी आपूर्ति कर रहा था और उसको निरंतर जारी रखने के लिए तैयार था। रूस आज भी दुनिया में भारत का सबसे विश्वसनीय सहयोगी है, इतिहास इसका साक्षी है। नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के आदेश को मानते हुए और देश की संप्रभुता का अमेरिका से सौदा करके रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया। इसका मतलब था कि सबसे विश्वसनीय उर्जा स्रोत से हाथ धो लेना, जो सबसे सस्ते कीमत पर भी मिल रहा था। जिसकी आपूर्ति भी किसी कीमत पर बाधित होने की कोई संभावना नहीं थीं।

पर नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के आगे सरेंडर करते हुए अपने सबसे बड़े और सस्ते उर्जा स्रोत को खो दिया। जब मध्यपूर्व में अमेरिका-इजरायल के ईरान में हमले के बाद उर्जा संकट बढ़ने के बाद अमेरिका ने इजाजत दिया कि एक महीन तक भारत रूस से तेल निर्यात कर सकता है तो भारत ने फिर से तेल खरीदना शुरू किया। आखिर इसकी वजह क्या थी? अभी तक इसका कोई उत्तर देश को नहीं मिला? एपस्टीन फाइल, अडानी पर मुकदमा, भारत के उच्च मध्य वर्ग की अमेरिकी नौकरी-उपभोक्ता सामाना, मुट्ठी भर कार्पोरेट के हित या कुछ और?

 

ईरान पर इजरायल-अमेरिका के हमले में साथ दे-चुप्पी साधकर

 

नरेंद्र मोदी ने इजरायल-अमेरिका के हमले के 36 घंटे पहले इजराल की यात्रा की। वहां उन्होंने हर स्थिति में इजरायल के साथ खड़े होने की खुली घोषणा की, भले ही उन्होंने ईरान पर इजरायल के हमले का नाम न लिया हो। सारी दुनिया जान रही थी कि कुछ दिनों के अंदर ही ईरान पर हमला होने वाला है।

इस हमले ने दुनिया के अधिकांश देशों, विशेषकर एशिया की उर्जा जरूरतों को गहरे संकट में डाल दिया है, जिसमें भारत भी है। ऐसा नहीं है कि भारत को यह नहीं पता था कि ईरान पर अमेरिका-इजरायल का हमला पूरे मध्यपूर्व को अस्थिर बना देगा, उर्जा की आपूर्ति को संकट में डाल देगा। भारत उर्जा जरूरतों के लिए मध्यपूर्व के इस एरिया पर निर्भर है, यह भी जगजाहिर था। पर नरेंद्र मोदी की सरकार ने ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले और मध्यपूर्व में युद्ध की आग को भड़कने की रोकने को कौन कहे, उसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरीके से मदद किया। यह मदद करके नरेंद्र मोदी की सरकार ने भारत और मध्यपूर्व से उर्जा आपूर्ति पर निर्भर देशों को संकट की ओर ढ़केलने में मदद किया। जिसके पहले लक्षण भारत में गैस की आपूर्ति में अफरा-तफरी के रूप में दिख रही है।

भारत में स्वतंत्र विदेश नीति और संप्रभुता को किनारे लगाकर इस युद्ध में इजरायल-अमेरिका के साथ खड़ा हुआ। ईरान जैसे लंबे समय के साथी के साथ पूरी तरह विश्वासघात किया। ईरान के राष्ट्र प्रमुख खुमैनी की इजरायल-अमेरिका द्वारा गुंडे की तरह हत्या पर भारत लगातार चुप्पी साधे रहा, आज तक भारत के प्रधानमंत्री या किसी मंत्री ने इसकी निंदा नहीं की। सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करके ईरान पर हमला और वहां के सर्वोच्च नेता और नेताओं और अन्य लोगों की हत्या पर भारत चुप रहा। यहां तक ईरान कि सैकड़ों मासूम बच्चियों की हत्या पर भारत ने मुंह नहीं खोला।

देश की बड़ी आबादी को संकट में डालने की नरेंद्र मोदी की यह कोई पहली हरकत नहीं है। इसके पहले नरेंद्र मोदी इस देश की बड़ी आबादी पर निम्न मर्मांतक चोट कर चुके हैं-

 

1- नोटबंदी की चोट

 

प्रधानमंत्री बनने के दो साल के अंदर ही नरेंद्र मोदी ने 2016 में इस नोटबंदी करके इस देश के आम लोगों पर एक बड़ी चोट की थी। कहने के लिए यह काम ब्लैकमनी खत्म करने के लिए किया गया था, लेकिन सच यह है कि यह काम करने का पहला उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय वित्तीय पूंजी और कार्पोरेट घरानों को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाना था।

दूसरा इसका उद्देश्य देश की अन्य पार्टियों के फंड को खत्म कर देना था और खुद की पार्टी के लिए इस वित्तीय पूंजी और कार्पोरेट से धन उगाही करना था। वही हुआ।

तीसरा उद्देश्य नगदी पर आधारित उद्योग धंधों और व्यापर-कारोबार को तबाह करना था,जिससे कार्पोरेट को फायदा पहुंचे।

नोटबंदी ने किस तरह की और कितनी दिक्कते पैदा कीं, कितनों की जान ली, किसको नुकसान पहुंचाया और किसकों फायद यह सब को पता चल चुका है।

 

2-जीएसटी की चोट-

 

अपने कार्पोरेट मित्रों को लाभ पहुचाने और संघीय ढांचे ( राज्यों के अधिकारों) को कमजोर करने के लिए नरेंद्र मोदी ने आनन-फानन में जीएसटी लेकर आए, जिसका वे स्वयं लगातार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में विरोध करते रहे थे।

इस जीएसटी ने लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योगों की रीढ़ तोड़ दिया। छोटे-मध्यम कारोबारियों-व्यापारियों को तबाह किया। इस तरह के अनौपचारिक क्षेत्र ( बहुसंख्यक लोगों को रोजागर मिलता है) को तबाह कर दिया।

इसको कार्पोरेट मुनाफे और कार्पोरेट की पूंजी में तो तेजी वृद्धि हुई, लेकिन देश का बहुसख्यक हिस्सा बदहाल और कंगाल हुआ। कुछ लोगों के हाथ में देश की संपत्ति और आय का बड़ा हिस्सा केंद्रित होने की प्रक्रिया बहुत तेज हो गई।

 

3-कोविड काल का पलायन, लाशों की दुर्दशा, आक्सीन की कमी से मौते और लाचारी-बेबसी

 

विड काल की भयावह स्थिति देश में सिर्फ प्राकृतिक घटना या वारस के चलते नहीं हुई थी। नरेंद्र मोदी की मनमाने तरीके से सबकुछ ठप कर देने का निर्णय, ताली-थाली की नौटंकी, मजदूरों को मदद न पहुचाना, लोगों को मरने लिए छोड़ देना और गंगा और अन्य नदियों में बहती लाशें। यह सारे भयावह दृश्य और हद्यविदारक तस्वीरें शायद ही कोई भूला हो।

 

4-कृषि कानून और किसानों की मौतें

5-सीए और नागरिकता कानून

 

नरेंद्र मोदी इस देश के प्रधानमंत्री पद के दावेदार और प्रधानमंत्री बनने में कार्पोरेट और आरएसएस का दुलरूवा होने के साथ गुजरात के दंगों, साम्प्रदायिक नफरत, जहरीले भाषाणों और समाजिक ताने-बाने को तोड़ने में उनकी महारत की एक बड़ी भूमिका रही है। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने इस देश के विविधता, सौहार्द, भाईचारे, समता की भावना, लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना को किस कदर चोट पहुंचाई है, यह तथ्य हम सब के सामने है. । इस व्यक्ति ने धीरे-धीरे ही सही आजादी के बाद के प्रगति की ओर बढ़ रहे पहिए को पीछे मोड़ दिया है।

  • Related Posts

    क्या हम नीट और ऐसी प्रवेश परीक्षाओं को समाप्त कर सकते हैं?

    राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र…

    Continue reading
    शिक्षा पर कसा नवउदारवादी शिकंजा

    प्रेम सिंह     (यह लेख करीब 16-17…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    अभिजीत दीपके ने ‘डर की राजनीति’ को बताया चुनौती

    • By TN15
    • June 6, 2026
    अभिजीत दीपके ने ‘डर की राजनीति’ को बताया चुनौती

    छोटे एवं मध्यम समाचार पत्रों को सरकारी विज्ञापनों में उचित हिस्सेदारी देने की मांग

    • By TN15
    • June 6, 2026
    छोटे एवं मध्यम समाचार पत्रों को सरकारी विज्ञापनों में उचित हिस्सेदारी देने की मांग

    कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर मंतर प्रोटेस्ट पर संजय राउत का पोस्ट, ‘जिन्हें हम देश का भविष्य…’

    • By TN15
    • June 6, 2026
    कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर मंतर प्रोटेस्ट पर संजय राउत का पोस्ट, ‘जिन्हें हम देश का भविष्य…’

    कानपुर ब्लाइंड मर्डर केस में 15 साला पुराना दोस्त निकला हत्यारा, बुर्का पहनकर रची थी साजिश

    • By TN15
    • June 6, 2026
    कानपुर ब्लाइंड मर्डर केस में 15 साला पुराना दोस्त निकला हत्यारा, बुर्का पहनकर रची थी साजिश

    Khan Sir Surrender: खान सर से जुड़ी बड़ी खबर, गोलीकांड मामले में कोर्ट में किया सरेंडर

    • By TN15
    • June 6, 2026
    Khan Sir Surrender: खान सर से जुड़ी बड़ी खबर, गोलीकांड मामले में कोर्ट में किया सरेंडर

    जंतर-मंतर पर बवाल: कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन पर छिड़का ‘हिट’ स्प्रे

    • By TN15
    • June 6, 2026
    जंतर-मंतर पर बवाल: कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन पर छिड़का ‘हिट’ स्प्रे