किसान संघर्ष मोर्चा ने किया ऐलान—हर तरह की तानाशाही का करेंगे सामना, 17 अगस्त का आंदोलन हर हाल में होगा
ग्रेटर नोएडा। किसान संघर्ष मोर्चा के प्रस्तावित आंदोलन और पंचायत को रोकने के लिए पुलिस द्वारा सैकड़ों किसानों एवं कार्यकर्ताओं के घरों पर पुलिस बल तैनात किए जाने की कार्रवाई का किसान नेताओं ने कड़ा विरोध किया है। किसान संघर्ष मोर्चा के नेता सुखबीर खलीफा और डॉ. रुपेश वर्मा के घर पर भी भारी पुलिस फोर्स पहुंची।

डॉ. रुपेश वर्मा ने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराते हुए कहा कि 17 जुलाई को तीनों प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों के साथ 10 प्रतिशत आबादी के निस्तारण और नए भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने के मुद्दे पर किसानों की बातचीत तय कराने का आश्वासन दिया गया था। उन्होंने कहा कि बातचीत के लिए पहले 20 जुलाई, फिर 24 जुलाई और उसके बाद 30 जुलाई की तारीख तय की गई, लेकिन किसी भी तारीख पर किसानों के साथ बातचीत नहीं हुई। अंत में डीपी ग्रेटर नोएडा द्वारा असमर्थता जताते हुए कहा गया कि बातचीत नहीं हो सकी है। इसके बावजूद किसानों के घरों पर पुलिस भेजना गैरकानूनी, अनैतिक एवं अनुचित कार्रवाई है।
डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि हजारों किसानों के मामले वर्षों से लंबित हैं। प्राधिकरण किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय भ्रष्टाचार के अड्डे बन गए हैं। किसानों की जमीन बिल्डरों को आवंटित कर दी गई है। आबादी के मामलों के निस्तारण के लिए नियमावली होने के बावजूद किसानों की आबादियों का निस्तारण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा किसानों के अधिकारों और लंबित समस्याओं को लेकर हर कीमत पर संघर्ष करेगा और किसी भी दबाव में पीछे नहीं हटेगा।
किसान संघर्ष मोर्चा के नेता सुखबीर खलीफा ने कहा कि किसानों को जानबूझकर पुलिस की ताकत का दुरुपयोग करके दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस की तानाशाही के माध्यम से किसानों के बुनियादी और संवैधानिक अधिकारों को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने का अधिकार है, जिसे किसी भी कीमत पर छीना नहीं जा सकता। सुखबीर खलीफा ने कहा, “हम अपने हक के लिए लड़ेंगे, जरूर लड़ेंगे और किसी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे। 17 अगस्त का आंदोलन हर हाल में होगा। पुलिस चाहे जितना जोर लगा ले, किसानों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। किसान एकता संघ के नेता स्वर्ण प्रधान ने कहा कि यहां अत्यंत बेशर्मी की स्थिति पैदा हो गई है। जनप्रतिनिधियों का अधिकारियों पर कोई अंकुश नहीं है। पूरे जनपद में किसानों को दबाया जा रहा है और उनके महत्वपूर्ण एवं लंबे समय से लंबित मसलों का समाधान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा अपने मुद्दों को लेकर पूरी तरह वचनबद्ध है और किसानों के अधिकारों के लिए हर हाल में आंदोलन किया जाएगा। किसान संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया कि 10 प्रतिशत आबादी के प्लॉट, नए भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने, लंबित आबादी प्रकरणों के निस्तारण तथा किसानों की अन्य समस्याओं के समाधान तक संघर्ष जारी रहेगा।






