अखिलेश यादव के पक्ष में जा रहा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव! 

चरण सिंह राजपूत 

हले ओमप्रकाश राजभर और संजय चौहान उसके बाद चाचा शिवपाल यादव के साथ गठबंधन और अब स्वामी प्रसाद मौर्य का योगी का मंत्रालय छोड़ अखिलेश यादव से हाथ मिलाना। इससे पहले बसपा के छह विधायकों का सपा का दामन थामना। बीजेपी और बसपा के कई नेताओं के अलावा  बहराइच से भारतीय जनता पार्टी  की मौजूदा विधायक माधुरी वर्मा, पूर्व बसपा सांसद राकेश पांडे, पूर्व विधान परिषद सदस्य कांति सिंह, प्रतापगढ़ से पूर्व विधायक बृजेश मिश्रा और विशाल जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीरबल सिंह कश्यप का सपा की सदस्यता लेना। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की मौजूदा स्थिति को बयां कर रहा है। मतलब भले ही अभी तक सभी दलों ने अपने प्रत्याशी घोषित न किये हों पर विधानसभा चुनाव अखिलेश यादव के पक्ष में बनता दिखाई दे रहा है।

रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी से हाथ मिलाने के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने जिस तरह से बड़े् दलों के बजाय छोटेे-छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात कही थी। उसके बाद दूसरी पार्टियों के नेताओं का अखिलेश यादव से मिलना शुरू हो गया था। सपा के साथ जहां एनसीपी गठबंधन करने जा रही है वहीं आम आदमी पार्टी से उत्तर प्रदेश के प्रभारी संजय सिंह की मुलाकात भी अखिलेश यादव के साथ हुई थी। वैसे  भी चुनावी सर्वेक्षण में 47 सीटें वाली सपा का भाजपा के साथ सीधी टक्कर दिखाना ही अखिलेश यादव का अपने आप में मजबूत होना है।

हालांकि योगी आदित्यनाथ के पक्ष में हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी कई रैली कर चुके हैं। केंद्र सरकार की योजनाओं की ओर से कई सौगातें भी उत्तर प्रदेश को दी गई हैं। कोरोना बीमारी के चलते चुनाव आयोग चुनाव प्रचार पर भले ही सख्त हो पर उत्तर प्रदेश का चुनाव बड़ा दिलचस्प होने वाला है। जहां भाजपा अपने सभी हथकंडे अपनाने वाली है वहीं सपा भी पूरी जान झौंकने वाली है।
जहां तक उत्तर विधान सभा चुनाव के प्रचार की बात है तो असद्ुद्दीन ओवैसी मुस्लिमों को अपने पक्ष में करने के लिए भाजपा के साथ ही सपा को भी टारगेट बना रहे है तो दलित वोटबैंक को बिदकने से रोकने के लिए बसपा ने भी मोर्चा संभाल लिया है। महिलाओं की पैरवी करते हुए कांग्रेस की प्रभारी प्रियंका गांधी अलग से ताल ठोंक रही हैं। उन्होंने तो चुनाव के बाद बसपा के साथ गठबंधन की भी बात कर दी है। वह बात दूसरी है कि आज तारीख में बसपा पर बीजेपी का पूरा शिकंजा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने दलितों को अपने पक्ष करने के लिए बड़ा अभियान छेड़ रखा है।
अखिलेश यादव १० मार्च को सपा की सरकार बनने व योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर लौटने की बात लगभग हर मंच से कर रहे हैं। उनके प्रवक्ता ने तो योगी आदित्यनाथ का गोरखपुर फ्लाइट का टिकट भी बुक करा दिया है।  उत्तर प्रदेश की एक खासियत यह रही है कि जिस पार्टी की सरकार बनती है उसके पक्ष में चुनाव के शुरुआत में ही माहौल बनना शुरू हो जाता है। उस पार्टी में दूसरी पार्टियों के नेताओं का आना शुरू हो जाता है। इसे योगी सरकार के प्रति नाराजगी कहें या फिर अखिलेश यादव पर विश्वास कि विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही दूसरी पार्टियों के नेताओं का रुख समाजवादी पार्टी की ओर होना शुरू हो गया था। सहारनपुर में कांग्रेस नेता इमरान मसूद के अखिलेश के पक्ष में एलान करने के बाद योगी आदित्यनाथ के श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने भी मंत्रालय छोड़ दिया है। उसके बाद स्वामी प्रसाद मौर्य अखिलेश यादव से मिले हैं। बाकायदा अखिलेश यादव ने ट्वीट कर स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ अपना फोटो शेयर किया किया है।
स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ ही उनके  कई समर्थकों के सपा में शामिल होने की खबर थी कि बांदा के तिंदवारी विधानसभा सीट से विधायक ब्रजेश प्रजापति ने त्यागपत्र दे दिया है। इनके अलावा शाहजहांपुर की तिलहर सीट से विधायक रोशनलाल वर्मा और कानपुर के बिल्हौर के विधायक भगवती प्रसाद सागर ने इस्तीफा दिया है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने पद से इस्तीफा देने के बाद समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। वहीं, अन्य तीन विधायकों के भी पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में जाने की चर्चा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की डुगडुगी बज चुकी है। यूपी चुनाव  का ऐलान चुनाव आयोग  ने 8 जनवरी को किया। 403 सीटों वाली 18वीं विधानसभा के लिए 10 फरवरी से 7 मार्च तक सात चरणों में वोट पड़ेंगे। 10 मार्च को चुनाव के नतीजे  आएंगे। यूपी में सात चरणों  के तहत 10 फरवरी, 14 फरवरी, 20 फरवरी, 23 फरवरी, 27 फरवरी, 3 मार्च और 7 मार्च को मतदान  होगा। इस चुनाव में ऐसे कई नेता इस बार नहीं होंगे, जो प्रदेश की राजनीति को प्रभावित करते रहे हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में इन राजनेताओं ने बड़ी भूमिका निभाई थी।

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