पुरानी पेंशन बहाली का अशोक गहलोत का फैसला 2024 में बढ़ा देगा मोदी सरकार का सिरदर्द?

द न्यूज 15  
नई दिल्ली । राजस्थान सरकार के बजट में पिछले दिनों प्रदेश के सीएम अशोक गहलोत ने राज्य कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देते हुए पुरानी पेंशन बहाल करने का ऐलान किया था। यह खबर भले ही राजस्थान के कर्मचारियों के लिए अहम थी, लेकिन इसने यूपी, हिमाचल, पंजाब समेत देश के दूसरे राज्यों के कर्मचारियों की पुरानी मांग को भी हवा दे दी है। इसके अलावा देश भर में केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें भी एक बार फिर से पुरानी पेंशन को लेकर बढ़ गई हैं। ऐसे में यूपी जैसे बड़े राज्य में सरकारी भर्तियां कम होने के आरोपों पर घिरी भाजपा केंद्र और राज्य में घिर सकती है। खासतौर पर 2024 के आम चुनाव के लिए यह मुद्दा बन सकता है। ऐसे में राजस्थान सरकार का यह फैसला केंद्र के लिए यदि सिरदर्द बन जाए तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।

कांग्रेस शासित अन्य राज्यों में इस फैसले को लागू किया जाना तय माना जा रहा है और इसके बाद भाजपा के नेतृत्व वाले राज्यों में मांग तेज हो सकती है। गहलोत सरकार ने यूपी चुनाव के चौथे चरण की वोटिंग के दिन पुरानी पेंशन बहाल करने का ऐलान किया था। इसलिए कहा तो यहां तक जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में भी इसका असर दिख सकता है। दरअसल सपा के मुखिया अखिलेश यादव भी पुरानी पेंशन बहाल करने का वादा कर चुके हैं। वह लगातार इस मुद्दे को चुनाव प्रचार में उठाते रहे हैं। यही नहीं उनका कहना है कि इस बारे में उनकी एक्सपर्ट्स से बात हुई है और इससे कोई आर्थिक संकट प्रदेश के सामने खड़ा नहीं होगा।

उत्तर प्रदेश में किसी भी राज्य से कहीं ज्यादा 11 से 13 लाख तक सरकारी कर्मचारी हैं। फिलहाल राजस्थान के ऐलान का यूपी के चुनाव पर क्या असर होगा, यह तय नहीं है। लेकिन अध्यापकों समेत बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी पुरानी पेंशन की ओर उम्मीद से देख रहे हैं। ऐसे में यदि उनका बड़ा वर्ग सपा के पीछे भी जा सकता है। उत्तर प्रदेश में बीते करीब दो सालों से शिक्षक भर्ती की मांग युवा कर रहे थे, लेकिन योगी सरकार उन्हें राजी करने में असफल दिख रही थी। यहां तक कि पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने के सपा के वादे का भी काउंटर योगी सरकार की ओर से मजबूती के साथ नहीं किया गया। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला मोदी सरकार के लिए चिंता की वजह बन सकता है। कहा जा रहा है कि 2024 के आम चुनाव में यह अहम मुद्दा बन सकता है।

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