यह क्या हो गया है सिस्टम को ? जिस बिहार में शिक्षा का स्तर बहुत घटिया है उस बिहार में थोड़ी सी देर होने पर परीक्षार्थियों को परीक्षा देने से ही रोक दिया जा रहा है। हाल ही में एक वीडियो वायरल हुई थी जिसमें एक परीक्षा केंद्र पर थोड़ी देर होने पर कुछ छात्राओं को परीक्षा देने से रोक दिया गया। परीक्षा केंद्र को बंद कर दिया गया।
बेबस छात्राएं चिल्ला चिल्लाकर दरवाजा खुलवाने की गुहार लगा रही हैं। शायद बिहार सरकार ने इस वीडियो से कोई सबक नहीं लिया। पटना के मसौढ़ी में देर होने पर एक दसवीं की छात्रा को परीक्षा देने से रोक दिया गया। इस छात्रा ने आत्महत्या कर ली। मतलब ऐसी भी किस बात की सख्ती कि थोड़ी देर इंतजार न किया जाए। अब कौन होगा इस आत्महत्या का जिम्मेदार ?
पढ़े तो हम भी हैं। परीक्षाएं तो हमने भी दी हैं पर ऐसा तो कभी नहीं हुआ कि थोड़ा बहुत लेट होने पर किसी परीक्षार्थी को परीक्षा देने से ही रोक दिया गया हो।
बीए पार्ट -1 की परीक्षा देते हुए मेरे खुद के साथ ऐसा हुआ था। क्योंकि मैं अपने गांव से परीक्षा दे रहा था। गांव से पहले 3 किमी तक मुझे पैदल चलकर जाना पड़ता था। फिर बस पकड़ कर कॉलेज जाता था। परीक्षा शुरू होने का समय 7 बजे था। क्योंकि सुबह या तो रोडवेज बस मिलती थी या फिर कोई ट्रक। एक दिन न तो बस और न ही कोई ट्रक। जब प्राइवेट बस आई तो मैं उसमें सवार होकर परीक्षा केंद्र पर पहुंचा। मैं 10-20 मिनट नहीं बल्कि 45 मिनट लेट था। पर परीक्षा केंद्र में जिन शिक्षक की ड्यूटी थी उन्होंने तब तक परीक्षार्थियों की स्लिप को नहीं भरा था मेरा कॉलम छोड़ रखा था। न ही मेन दरवाजा बंद किया गया था। मैं जब अपने कमरे में पहुंचा शिक्षक ने मुझे हिम्मत देते हुए कॉपी और पेपर दिया और कहा कि आराम से करना कोई जल्द नहीं है। क्योंकि मैं पढ़ने में तेज था तो एक घंटे में ही सभी प्रश्न पूरे कर दिया और कॉपी शिक्षक को सौंप दी। वे मुझसे बहुत खुश हुए। शाबाशी देते हुए कहा कि इसलिए ही मैंने तुम्हारा इंतजार किया। दरअसल बिहार में बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा के पहले दिन पटना जिले के मसौढ़ी थाना क्षेत्र में एक छात्रा ने परीक्षा केंद्र पर प्रवेश न मिलने के कारण आत्महत्या कर ली।
छात्रा की पहचान मसौढ़ी के गांव खरजमा की कोमल कुमारी के रूप में हुई है। वह मंटू यादव की पुत्री थीं और परिवार में तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं। यह छात्रा निर्धारित समय से मात्र 10 मिनट ही लेट हुई थी। परीक्षा केंद्र पर सुबह 9 बजे एंट्री बंद कर दी गई थी, जिसके बाद उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। उन्होंने गेट खोलने की बहुत अनुरोध किया उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। हताश होकर घर लौटने के बाद वह काफी तनाव में थीं।
घर पर कपड़े बदलकर बिना किसी को बताए निकल गईं और नदौल जाकर एक ट्रेन में सवार हुईं। पटना-गया रेलखंड पर तरेगना और मसौढ़ी कोर्ट स्टेशन के बीच महाराजचक गांव के पास चलती ट्रेन से कूदकर उन्होंने अपनी जान दे दी। उनका शव रेलवे ट्रैक के किनारे मिला। पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए पीएमसीएच (PMCH), पटना भेजा। इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है। बिहार विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाया गया, जहां आरजेडी की एक एमएलसी ने देरी पर छात्रों को एंट्री न देने के सख्त नियमों पर सवाल उठाया और संवेदनशीलता की मांग की।








