नई दिल्ली। सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को प्राप्त की थी, जो आधिकारिक दस्तावेजों से सिद्ध है। 1980 में वोटर लिस्ट में उनके नाम की एंट्री का दावा हाल ही में बीजेपी ने अगस्त 2025 में किया था, लेकिन यह दावा एक फर्जी दस्तावेज पर आधारित था। उस दस्तावेज में “नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली” (एनसीटी) का उल्लेख था, जबकि 1980 में दिल्ली को केवल “यूनियन टेरिटरी ऑफ दिल्ली” कहा जाता था—एनसीटी का गठन 1991 में हुआ था। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने इसे फोटोशॉप्ड और जाली बताया।
वोटर बनने का सवाल
सोनिया गांधी ने राजीव गांधी से 1968 में शादी की थी, लेकिन भारतीय नागरिकता लेने में 15 साल लगे। नागरिकता मिलने के बाद ही वे कानूनी रूप से वोटर बन सकीं।
1980 की कथित एंट्री का कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं मिला। बीजेपी के दावे के बाद जांच में यह सामने आया कि दस्तावेज जाली था, इसलिए यह दावा आधारहीन है। वास्तव में, उनकी वोटर रजिस्ट्रेशन 1983 के बाद ही वैध हुई।
कोर्ट का नोटिस
सितंबर 2025 में वकील विकास त्रिपाठी ने दिल्ली की मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज की, जिसमें सोनिया गांधी पर 1980 में जाली दस्तावेजों से नाम जोड़ने का आरोप लगाया गया। मजिस्ट्रेट ने 11 सितंबर 2025 को इसे खारिज कर दिया। इसके खिलाफ रिवीजन पिटीशन दायर की गई। आज (9 दिसंबर 2025) राउज एवेन्यू सेशंस कोर्ट ने सोनिया गांधी, राज्य और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी। याचिकाकर्ता का दावा: नाम 1980 में जोड़ा गया, 1982 में हटाया गया, और 1983 में दोबारा जोड़ा गया लेकिन नागरिकता अप्रैल 1983 में मिली। कोर्ट दस्तावेजों की जांच करेगा।








