“पशु सेवा, जनसेवा से कम नहीं

“विश्व पशु चिकित्सा दिवस पर एक विमर्श”

विश्व पशु चिकित्सा दिवस हर साल अप्रैल के अंतिम शनिवार को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पशु चिकित्सकों की भूमिका को सम्मान देना और पशु स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य व पर्यावरण के आपसी संबंधों पर ध्यान केंद्रित करना है। यह लेख बताता है कि कैसे पशु चिकित्सक सिर्फ जानवरों के डॉक्टर नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य के अभिन्न स्तंभ हैं। भारत में पशु चिकित्सा सेवाएँ, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, संसाधनों की कमी, नीति उपेक्षा और सामाजिक सम्मान की कमी से जूझ रही हैं। हरियाणा जैसे राज्यों में VLDA कर्मियों के लंबे आंदोलन इस बदहाली की झलक देते हैं। तकनीक, महिला भागीदारी और ‘वन हेल्थ’ जैसी अवधारणाएँ इस क्षेत्र में नई संभावनाएँ ला रही हैं। लेकिन जब तक पशु चिकित्सकों को उचित संसाधन, समाजिक सम्मान और नीति समर्थन नहीं मिलेगा, तब तक समग्र स्वास्थ्य सुरक्षा अधूरी रहेगी। पशु चिकित्सा सिर्फ पशुओं की नहीं, पूरे समाज की सेवा है—और इसे उसी गंभीरता से लेना चाहिए।

डॉ सत्यवान सौरभ

हर वर्ष अप्रैल के अंतिम शनिवार को विश्व पशु चिकित्सा दिवस मनाया जाता है, जो न केवल पशु चिकित्सकों के कार्य को सराहने का अवसर होता है, बल्कि यह पशु स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के आपसी संबंधों पर भी प्रकाश डालता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वस्थ पशु न केवल पशुपालकों की आजीविका का आधार हैं, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और जैव विविधता के भी रक्षक हैं।

 

पशु चिकित्सकों की भूमिका: जीवन रक्षा के मूक नायक

 

पशु चिकित्सक सिर्फ पशुओं का इलाज नहीं करते, वे पूरे पशुपालन तंत्र के संरक्षक होते हैं। गांव के किसान से लेकर बड़े डेयरी उद्योगों तक, सभी की रीढ़ की हड्डी यही विशेषज्ञ होते हैं। ये न केवल बीमारियों का इलाज करते हैं बल्कि उन्हें रोकने, टीकाकरण अभियान चलाने, और महामारी से लड़ने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं।

कोरोना महामारी के दौरान जब मानव स्वास्थ्य पर संकट गहराया, तब भी पशु चिकित्सकों ने अपने कर्तव्य से मुँह नहीं मोड़ा। पशुओं के टीकाकरण, पशुपालन सेवाओं और आपातकालीन सर्जरी जैसे काम लगातार जारी रहे। इनका योगदान ‘वन हेल्थ’ (One Health) दृष्टिकोण की अहमियत को साबित करता है—जहाँ मानव, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक समग्र दृष्टि से देखा जाता है।

 

ग्रामीण भारत में पशु चिकित्सा सेवाएँ: उपेक्षा का शिकार

 

भारत की बड़ी आबादी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जहाँ पशुपालन सिर्फ व्यवसाय नहीं, बल्कि जीवन का एक हिस्सा है। परंतु यही ग्रामीण भारत पशु चिकित्सा सेवाओं की बदहाली का सबसे बड़ा उदाहरण भी है। सीमित संसाधन, अपर्याप्त स्टाफ, खराब ढांचागत सुविधाएँ और फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की उपेक्षा – ये सभी मिलकर पशुओं के इलाज को एक संघर्ष बना देते हैं।

VLDA (Veterinary Livestock Development Assistants) जैसे कर्मचारी वर्षों से सेवा शर्तों में सुधार और प्रोफेशनल मान्यता के लिए आंदोलन कर रहे हैं। हरियाणा में 1000 से अधिक दिन तक चला VLDA का आंदोलन इस उपेक्षा की गंभीरता को उजागर करता है।

 

पशु चिकित्सा और महिला सशक्तिकरण

 

इस पेशे में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ रही है, खासकर पशु सहायिकाओं और पारा-वैटरनरी स्टाफ के रूप में। कई ग्रामीण महिलाएं आज पशु स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बन रही हैं, जो न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि अपने समुदाय में बदलाव की वाहक भी बन रही हैं। यह एक सकारात्मक संकेत है, जिसे नीति स्तर पर और प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

चुनौतियाँ: डॉक्टर बनाम डॉग केयरर की छवि

अक्सर देखा गया है कि पशु चिकित्सकों को समाज में वह सम्मान नहीं मिल पाता जो मानव चिकित्सकों को मिलता है। उनकी पहचान एक सीमित “डॉग केयरर” या “गाय का डॉक्टर” तक सिमट जाती है, जबकि वे महामारी विशेषज्ञ, सर्जन, टीका नियोजक और शोधकर्ता की भूमिका निभाते हैं।

इस समस्या का समाधान सिर्फ वेतन और पदोन्नति में नहीं, बल्कि समाज की सोच में बदलाव में छिपा है।

 

पशु चिकित्सा में तकनीक का प्रवेश: भविष्य की दिशा

 

आज डिजिटल इंडिया की लहर पशु चिकित्सा में भी प्रवेश कर रही है। मोबाइल ऐप्स के ज़रिए पशु स्वास्थ्य रिकॉर्ड, ई-डायग्नोसिस, ऑनलाइन परामर्श जैसी सुविधाएँ शुरू हो रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन तकनीक भी पशु गणना, निगरानी और आपातकालीन सहायता में सहायक बन रही है। यह बदलाव ग्रामीण स्तर तक पहुँचे, इसके लिए सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करना होगा।

 

नीति निर्माण और पशु चिकित्सा

 

सरकारी नीतियों में पशु स्वास्थ्य को अब भी प्राथमिकता नहीं मिल पाती। बजट का एक सीमित हिस्सा ही पशुपालन और वैटरनरी सेवाओं के लिए निर्धारित होता है, जबकि यह क्षेत्र लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। पशु चिकित्सकों की संख्या, ट्रेनिंग, और इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाना ज़रूरी है।

“वन हेल्थ मिशन” को ज़मीन पर लागू करने के लिए राज्य सरकारों को भी जागरूक और प्रतिबद्ध होना पड़ेगा। जब तक पशु चिकित्सक को फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक समग्र स्वास्थ्य की बात अधूरी रहेगी।

 

सम्मान, संसाधन और संरचना—तीनों चाहिए

 

विश्व पशु चिकित्सा दिवस पर केवल बधाइयों से काम नहीं चलेगा। ज़रूरत है एक गंभीर मंथन की—कि हम अपने पशु चिकित्सकों को कितना सम्मान, कितना समर्थन और कितने संसाधन दे पा रहे हैं। अगर पशु बीमार पड़ते हैं तो किसान कर्ज में डूबता है, दूध की सप्लाई रुकती है, और अंततः उपभोक्ता भी प्रभावित होता है।

इसलिए यह दिवस केवल पशु चिकित्सकों का नहीं, पूरे समाज का पर्व है। यह हमें याद दिलाता है कि पशु स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य और पृथ्वी का स्वास्थ्य—तीनों एक ही सूत्र में बंधे हैं।

आज ज़रूरत है एक ऐसी सोच की, जो पशु चिकित्सकों को केवल “पशु डॉक्टर” नहीं, बल्कि ‘स्वास्थ्य योद्धा’ के रूप में देखे।

  • Related Posts

    जंतर-मंतर प्रदर्शन: फिलहाल तीन बातें
    • TN15TN15
    • July 25, 2026

    प्रेम सिंह कल एक मित्र ने पूछ लिया…

    Continue reading
    एक भूख हड़ताल ‌ ऐसी भी थी!
    • TN15TN15
    • July 25, 2026

    जंगे -आजादी के सिपहसालार सोशलिस्‍ट तहरीक के जन्‍मदाताओं…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    CJP का प्रोटेस्ट खत्म करने का ऐलान, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद लिया फैसला

    • By TN15
    • July 25, 2026
    CJP का प्रोटेस्ट खत्म करने का ऐलान, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद लिया फैसला

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत दीपके का बड़ा बयान, कहा- मुझे हीरो मत बनाइए क्योंकि…

    • By TN15
    • July 25, 2026
    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत दीपके का बड़ा बयान, कहा- मुझे हीरो मत बनाइए क्योंकि…

    ‘झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले अभिजीत दीपके, CJP का पहला रिएक्शन

    • By TN15
    • July 25, 2026
    ‘झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले अभिजीत दीपके, CJP का पहला रिएक्शन

    NTA मॉडल फेल, शिक्षा मंत्री का त्यागपत्र दिखावा है – सीटू ने की NTA भंग करने की मांग : गंगेश्वर दत्त शर्मा

    • By TN15
    • July 25, 2026
    NTA मॉडल फेल, शिक्षा मंत्री का त्यागपत्र दिखावा है – सीटू ने की NTA भंग करने की मांग : गंगेश्वर दत्त शर्मा

    जंतर-मंतर प्रदर्शन: फिलहाल तीन बातें

    • By TN15
    • July 25, 2026
    जंतर-मंतर प्रदर्शन: फिलहाल तीन बातें

    प्रोफेसर नामवर सिंह जन्म शताब्दी समारोह

    • By TN15
    • July 25, 2026
    प्रोफेसर नामवर सिंह जन्म शताब्दी समारोह