हिंदी और मैथिली साहित्य के अमर हस्ताक्षर, ‘जनकवि’ बाबा नागार्जुन 

वैद्यनाथ मिश्र ‘नागार्जुन’ ने अपनी ओजस्वी लेखनी से आम जनमानस के संघर्ष, भूख, पीड़ा और क्रांति को आवाज़ दी। मैथिली में ‘यात्री’ नाम से और हिंदी में नागार्जुन नाम से लिखने वाले इस साहित्यकार ने साहित्य को महलों से निकालकर सीधे खेत-खलिहानों और आम आदमी के जीवन से जोड़ा। उनकी कालजयी रचनाएँ, जैसे ‘बादल को घिरते देखा है’ और ‘अकाल के बाद’ आज भी समाज में नई सोच और संवदेना को प्रेरित करती हैं। शोषितों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता और साहित्य में उनका योगदान भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है।
बाबा नागार्जुन हिंदी और मैथिली साहित्य के अप्रतिम कवि और जनकवि थे। उनका मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था, लेकिन बौद्ध धर्म अपनाने के बाद वे ‘नागार्जुन’ कहलाए। मैथिली में वे ‘यात्री’ उपनाम से लिखते थे। वे प्रगतिशील विचारधारा के सशक्त हस्ताक्षर और जनता के कवि थे । उनके जीवन और साहित्य के मुख्य पहलू इस प्रकार हैं। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा जन्म : उनका जन्म बिहार के मधुबनी जिले के सतलखा गाँव (ननिहाल) में हुआ था।  शिक्षा: संस्कृत पाठशाला से शुरुआत कर, उन्होंने वाराणसी और कलकत्ता में संस्कृत का गहन अध्ययन किया। इसके बाद वे श्रीलंका गए और पालि भाषा तथा बौद्ध दर्शन की शिक्षा ली।साहित्यिक अवदानबाबा नागार्जुन ने कविता, उपन्यास, निबंध और यात्रा वृतांत जैसी कई विधाओं में लिखा।

प्रमुख काव्य-संग्रह: ‘युगधारा’, ‘प्यासी पथराई आँखें’, ‘हज़ार-हज़ार बाँहों वाली’, ‘सतरंगे पंखों वाली’, और ‘तालाब की मछलियाँ’।प्रसिद्ध उपन्यास: ‘बलचनमा’, ‘रतिनाथ की चाची’, ‘बाबा बटेसरनाथ’, और ‘वरुण के बेटे’।भाषाएँ: उन्हें हिंदी और मैथिली के अलावा संस्कृत, पालि, प्राकृत और बांग्ला का भी अच्छा ज्ञान था।सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता नागार्जुन आजीवन घुमक्कड़ और यायावर स्वभाव के रहे, जिसने उन्हें आम जन-जीवन और किसानों के बेहद करीब रखा। वे किसान आंदोलनों और जयप्रकाश नारायण के आंदोलनों में सक्रिय रूप से शामिल रहे, जिसके कारण उन्हें स्वतंत्रता से पहले और आपातकाल के दौरान कई बार जेल जाना पड़ा।सम्मान और पुरस्कार उनकी ऐतिहासिक मैथिली रचना ‘पत्रहीन नग्न गाछ’ के लिए उन्हें 1969 में प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।1994 में उन्हें साहित्य अकादमी द्वारा ‘साहित्य अकादमी फेलो’ के रूप में सर्वोच्च सम्मान दिया गया।

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