ईरान पर हुए हमले से उत्पन्न मध्य पूर्व अशांति और होर्मुज संकट के लिए अमेरिका इजराइल गुनाहगार : अजय खरे

रीवा। समता सम्पर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा कि एक माह पहले अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान के परंपरागत तेल भंडारों पर नियंत्रण रखने के नापाक इरादों के साथ जिस तरह अचानक युद्ध की शुरुआत कर दुनियां का अमन चैन छीना उसे लेकर तमाम थू-थू हो रही है। इसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व व्यापी तेल संकट पैदा हुआ। गुरुवार 2 अप्रैल को इंग्लैंड की अध्यक्षता में 35 देशों ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी नाकेबंदी खुलवाने के लिए लंदन में एक बैठक की जिसमें भारत ने वर्चुअल भागीदारी की। हार्मुज शिखर बैठक’ में ईरान की आलोचना की गई। जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नौसैनिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी और व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग पर जोर दिया गया। श्री खरे ने कहा कि लंदन बैठक में मौजूदा संकट में अमेरिका और इजरायल की हमलावर भूमिका को लेकर चुप्पी साधते हुए ईरान को कटघरे में खड़ा जाना अत्यंत आपत्तिजनक बात है। आखिरकार इसे लेकर फ्रांस चीन और रूस ने वीटो पावर लगा दिया।

श्री खरे ने कहा कि मौजूदा मध्य पूर्व संकट के लिए जिम्मेदार अमेरिका और इजरायल की जगह युद्ध पीड़ित ईरान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जाना बहुत आपत्तिजनक शर्मनाक बात है। एक तरह से यह बात युद्ध आक्रांता देश अमेरिका और इजरायल की खुशामदी है जिसमें उनके खिलाफ एक शब्द नहीं बोलकर ईरान की निंदा की गई । अमेरिका और इजरायल के द्वारा शुरू किए गए हमले के बाद ईरान अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। हर संप्रभुता सम्पन्न देश चाहता है कि उसकी एकता और अखंडता बाधित न हो। बीसवीं सदी में दुनिया के अधिकांश देश आजाद हुए थे। इस वजह से उसे आजादी की शताब्दी भी कहा जाता है। लेकिन आजादी की शताब्दी के मध्य में आजाद तिब्बत को साम्राज्यवादी चीन के द्वारा गुलाम बना लिया जाना दुनिया के स्वतंत्रता के पक्षधरों के लिए 21 वीं शताब्दी में भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। वेनेज़ुएला हो या ईरान एक देश के रूप में उनका स्वतंत्र वजूद बना रहना चाहिए।

लोकतंत्र सेनानी श्री खरे ने कहा कि फिलहाल ईरान की संप्रभुता का सम्मान करते हुए होर्मुज जल डमरूमध्य संकट पर उससे बातचीत होना चाहिए। होर्मुज ईरानी भूमि से 5 किलोमीटर दूर है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुसार 22 किलोमीटर दूरी तक संबंधित देश की संप्रभुता रहती है। ईरान पर अमेरिका इजरायल के द्वारा किए गए हमले की निंदा करने की हिम्मत नहीं कर पाने वाले देश इधर होर्मुज संकट के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए उसकी निंदा कर रहे हैं। होर्मुज स्ट्रेट के मौजूदा तेल संकट के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराना और उसकी निंदा करना बहुत शर्मनाक हास्यास्पद और दोहरे मापदंड वाली बात है। ईरान के खिलाफ की गई युद्ध नाकेबंदी के मौके पर उसकी मदद करने की जगह उससे सुविधाएं मांगने का दबाव बनाना बहुत गैर जिम्मेदाराना कृत्य है। किसी के घर में आग लगी हो तो वहां जाकर आग बुझाने की जगह उसे अपना दुखड़ा सुनाना, उसका मनोबल तोड़ना और आग भड़काने का काम करना बहुत आपत्तिजनक है। वैश्विक तेल संकट के मौके पर तमाम परेशानियों के बावजूद ईरान ने यथासंभव अपना फर्ज निभाने की कोशिश की है लेकिन ऐसे समय उसकी मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश सही नहीं है और ना ही ईरान इसे बर्दाश्त करेगा। ईरान कभी गुलाम नहीं रहा , ना ही हमलावर। उसने अपनी आजादी के साथ साथ दूसरे देश की आजादी की भी कद्र की है। आज भी वह हमलावर नहीं बल्कि अपने देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। बहादुरी क्या होती है ईरान इसका जीता जागता उदाहरण है। इसी वजह से विश्व जनमत आज उसके साथ खड़ा हुआ है।

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