जलवायु परिवर्तन की दौर में कृषि सबसे बड़ी चुनौती : कुलपति

126 कृषि से संबंधित विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं की प्रस्तुति

100 अनुसंधान परियोजना को मिली स्वीकृति

 

सुभाष चंद्र कुमार

समस्तीपुर पूसा। डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में अनुसंधान परिषद की दो दिवसीय विशेष बैठक का आज समापन हो गया। इस बैठक में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने 126 कृषि से संबंधित विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं की प्रस्तुति दी जिस पर अनुसंधान परिषद तथा बाह्य विशेषज्ञों ने गहन विमर्श किया जिसके उपरांत लगभग 100 अनुसंधान परियोजना को स्वीकृति दी गई।

अनुसंधान परिषद में वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ पी एस पांडेय ने कहा कि आने वाले समय में कृषि की रूपरेखा बदलने वाली है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ड्रोन ट्रेनिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर बेस्ड तकनीक आदि पर काम कर रहा है और आने वाले समय में रोबोटिक्स सहित डिजिटल एग्रीकल्चर के विभिन्न आयामों पर तेजी से कार्य करेगा।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन कृषि की सबसे बड़ी चुनौती है इससे निपटने के उपाय के बारे में वैज्ञानिकों को अभी से तैयारी करनी होगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय सेकेंडरी एग्रीकल्चर पर भी जोर दे रहा है। राष्ट्रीय अनुसंधान केन्द्र लीची के प्रधान वैज्ञानिक डॉ विशाल दास ने कहा कि विश्वविद्यालय में अनुसंधान के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा कि डेढ़ वर्ष में 11 पेटेंट मिलना एक उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि कुलपति डॉ पांडेय अनुसंधान की गुणवत्ता को लेकर काफी गंभीर है और किसी भी तरह का समझौता नहीं कर रहे हैं इससे निश्चित ही विश्वविद्यालय और देश को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय काफी सराहनीय कार्य कर रहा है।

निदेशक अनुसंधान डॉ एके सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में अनुसंधान परिषद की विशेष बैठक इस बात को दर्शाता है कि कुलपति अनुसंधान की गुणवत्ता को लेकर कितने गंभीर है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुसंधान परियोजना को न सिर्फ स्वीकृति दे रहा है बल्कि उसके लिए अपने कोष से वित्त भी प्रदान कर रहा है। वैज्ञानिकों को हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

कार्यक्रम में भुवनेश्वर की प्रधान वैज्ञानिक डॉ लिपी दास, आएआर आई के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक यू डी सिंह , अटारी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ मुहम्मद मोनबोरोल्ला बाह्य विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए और विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं की गहन समीक्षा की और अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन डॉ अंजनी कुमार सिंह ने किया।

कार्यक्रम के दौरान निदेशक शिक्षा डा उमाकांत बेहरा, डीन पीजीसीए डॉ मयंक राय, डीन पीजीसीए डॉ अमरेश कुमार, निदेशक छात्र कल्याण डॉ रमन त्रिवेदी, निदेशक प्रसार डॉ एम एस कुंडू, डॉ रत्नेश कुमार झा, डा नीलांजय कुमार, डॉ कुमार राज्यवर्धन समेत विभिन्न वैज्ञानिक पदाधिकारी एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

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