लेनिन-स्टालिन के बाद पुतिन के रूस में कम ही बचा है कम्युनिज्म?

लेनिन और स्टालिन के दौर के बाद, सोवियत संघ के विघटन (1991) के साथ ही रूस में कम्युनिज्म का अंत हो गया। पुतिन के नेतृत्व में रूस अब एक पूंजीवादी अर्थव्यवस्था वाला देश है, जहां राज्य नियंत्रित पूंजीवाद (स्टेट कैपिटलिज्म), राष्ट्रवाद और авторитарवाद (अथॉरिटेरियनिज्म) हावी है। कम्युनिस्ट विचारधारा के अवशेष नाममात्र को हैं—जैसे कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ द रशियन फेडरेशन (CPRF) का अस्तित्व—लेकिन यह सत्ता से दूर है। पुतिन खुद कम्युनिज्म को रूस की “विनाशकारी” विचारधारा मानते हैं और इसे लेनिन-स्टालिन युग की गलती बताते हैं।

 

रूस में कम्युनिज्म के अवशेष कितने बचे हैं?

 

आर्थिक रूप से: रूस में निजी उद्योग, बाजार अर्थव्यवस्था और ओलिगार्क (अमीर पूंजीपति) हावी हैं। CPRF राष्ट्रीयकरण (नेशनलाइजेशन) की मांग तो करती है, लेकिन यह मिश्रित अर्थव्यवस्था के दायरे में ही है—पूर्ण कम्युनिस्ट मॉडल नहीं। पुतिन की सरकार सोवियत-शैली की योजना अर्थव्यवस्था को खारिज करती है।
राजनीतिक रूप से: CPRF रूस की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है (स्टेट ड्यूमा में 57/450 सीटें), लेकिन यूनाइटेड रूस (पुतिन की पार्टी) का वर्चस्व है। CPRF मार्क्सवाद-लेनिनवाद का पालन करती है और सोवियत नॉस्टैल्जिया (नॉस्टैल्जिया) पर टिकी है, लेकिन यह पुतिन के साथ कुछ मुद्दों (जैसे यूक्रेन युद्ध) पर सहयोग करती है। 2025 में भी CPRF पुतिन और ओलिगार्कों के खिलाफ संघर्ष कर रही है, लेकिन कमजोर पड़ रही है—युद्ध और पूंजीवादी संकट के बीच “लेफ्ट पैट्रियट्स” के रूप में सक्रिय।
सामाजिक रूप से: सोवियत विरासत (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य) के कुछ तत्व बचे हैं, लेकिन पुतिन का फोकस “रूसी दुनिया” (रशियन वर्ल्ड), पारंपरिक मूल्य और ईसाई रूढ़िवाद पर है। कम्युनिज्म को “साम्राज्यवादी” हानि का दोषी ठहराया जाता है।

 

क्या अब भी लेफ्ट का बोलबाला है?

 

नहीं, लेफ्ट का कोई वर्चस्व नहीं बचा। CPRF “सिस्टमिक ओपोजिशन” (नियंत्रित विपक्ष) का हिस्सा है—यह चुनाव लड़ती है, लेकिन सत्ता पर कब्जा नहीं कर सकती। 2025 के चुनावों में CPRF को लगभग 19% वोट मिले, लेकिन यूनाइटेड रूस ने बहुमत हासिल किया। लेफ्ट पार्टियां (कम्युनिस्ट सहित) पुतिन के तहत दबाव में हैं: गिरफ्तारियां, फंडिंग कटौती और युद्ध-समर्थन की मजबूरी। असली वामपंथी (डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स) नई लहर ला रहे हैं, लेकिन वे भी दबाए जा रहे हैं। पुतिन का रूस अब “राइट-कंजर्वेटिव” और राष्ट्रवादी है, न कि कम्युनिस्ट।
संक्षेप में, लेनिन-स्टालिन का कम्युनिज्म रूस से लगभग मिट चुका है—केवल स्मृति और विपक्षी पार्टी के रूप में बचा। लेफ्ट का बोलबाला खत्म; पुतिन का बोलबाला है।

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