आप पार्टी ने राज्यसभा नेतृत्व में किया बड़ा फेरबदल, राघव चड्ढा को हटाया

ऋषी तिवारी
नई दिल्ली। आप पार्टी के भीतर सांगठनिक और संसदीय मोर्चे पर तेज हलचल मची है। पार्टी ने राज्यसभा में अपने नेतृत्व ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए पार्टी के प्रखर वक्ता और चर्चित सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर (उपनेता) के पद से हटा दिया है। उनकी जगह लुधियाना से सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब पिछले कुछ महीनों से राघव चड्ढा की पार्टी के बड़े फैसलों और कार्यक्रमों से लगातार दूरी बनी हुई थी।

 

राज्यसभा सचिवालय को भेजा गया आधिकारिक पत्र

 

बता दें कि संसदीय नियमों के तहत किसी भी दल को अपने नेता या उपनेता में बदलाव की जानकारी सदन के सचिवालय को देनी पड़ती है। आप पार्टी (AAP) ने यह औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली है। सूत्रों के अनुसार, अब से राज्यसभा में पार्टी की ओर से पक्ष रखने, सदन की रणनीति तय करने और विधायी कार्यों के समन्वय की जिम्मेदारी अशोक मित्तल की होगी।

 

लगातार दूर हो रहे हैं राघव चड्ढा?

 

राघव चड्ढा को पद से हटाए जाने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं। एक समय जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी और सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने वाले चड्ढा का कद कम होना चौंकाने वाला है।

दिल्ली और पंजाब की राजनीति में चड्ढा की एक्टिव भूमिका रही है, लेकिन हाल के दिनों में कई संकेत मिल रहे थे कि ‘सब ठीक नहीं’। इससे पहले पार्टी ने लोकसभा चुनावों के लिए जारी की गई ‘स्टार प्रचारकों’ की सूची से भी उनका नाम निकाल दिया था, जिस पर काफी सियासी बवाल मचा था। अब संसदीय दल में उनके पद में कटौती को इसी कड़ी का अगला और बड़ा हिस्सा माना जा रहा है।

 

क्यों चुने गए अशोक मित्तल?

अशोक मित्तल को इस पद पर लाने के पीछे आप पार्टी (AAP) की पंजाब की राजनीति और सांगठनिक संतुलन को साधने की रणनीति बताई जा रही है। पंजाब के बड़े औद्योगिक और शैक्षिक घरानों से ताल्लुक रखने वाले मित्तल को आगे करके पार्टी ने एक ‘गंभीर और अनुभवी चेहरे’ को सदन में उतारने का संदेश दिया है। पार्टी का मानना है कि सदन के भीतर जवाबदेही और बेहतर समन्वय के लिए उनका अनुभव काम आएगा।

 

कयासों का बाजार गर्म

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक न तो राघव चड्ढा और न ही आप पार्टी (AAP) के किसी शीर्ष नेता का आधिकारिक बयान सामने आया है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो AAP अपनी आंतरिक रणनीति के तहत आने वाले चुनावों (यूपी और अन्य राज्यों) और सदन की बदलती चुनौतियों को देखते हुए नए समीकरण बना रही है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक सांगठनिक बदलाव है, या फिर आप पार्टी (AAP) में राघव चड्ढा की राजनीतिक यात्रा के अगले अध्याय की शुरुआत है? इसका जवाब आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगा।

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