जंतर-मंतर पर घायल हुए पुलिस कर्मियों एवं प्रदर्शनकारियों की संख्या पर एक सवाल      

एस आर दारापुरी 
सोशल मीडिया पर उपलब्ध सूचना के अनुसार 20 जुलाई को जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर किए गए बल प्रयोग तथा प्रदर्शनकारियों द्वारा तथाकथित की गई हिंसा के दौरान दिल्ली पुलिस के लगभग 130 तथा प्रदर्शनकारियों के केवल 60 व्यक्ति घायल हुए हैं। प्रथमदृष्टया  यह संख्या सही प्रतीत नहीं होती क्योंकि इसमें प्रदर्शनकारियों की संख्या पुलिस की संख्या से आधी से भी कम दिखाई देती है। सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियोज़ से दिखाई देता है कि पुलिस द्वारा कितने व्यापक स्तर पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया था तथा कितनी बड़ी संख्या में टियरगैस, पैलेटगन, शाक बैटन, लठियों/डंडों तथा कील लगे डंडों एवं लकड़ी के फट्टों तथा लोहे की राड का इस्तेमाल किया गया था जिससे चोट खाने वाले प्रदर्शनकारियों की संख्या काफी अधिक होना स्वाभाविक प्रतीत होता है।

वीडियोज में दिखाई देता है कि किस तरह शांतिपूर्वक खड़े या जा रहे व्यक्तियों/व्यक्ति को एक से अधिक पुलिस वालों द्वारा जानवरों की तरह पीटा गया जिससे गंभीर चोटों का आना स्वाभाविक है। वीडियोज में प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव के जवाब में पुलिस द्वारा भी पथराव किया गया जिससे प्रदर्शनकारियों का घायल होना भी स्वाभाविक है। यह भी सर्वविदित  है कि पुलिस द्वारा पीटे जाने पर अधिकतर लोग घटनास्थल से भाग जाते हैं क्योंकि थाने पर जा कर शिकायत करने पर पुलिस उन्हें ही आरोपी बना कर जेल भेज देगी। इसी कारण से मौके पर दिखने वाले घायल प्रदर्शनकारियों की संख्या वास्तविक संख्या से काफी कम दिखाई देती है।

अतः जंतर मंतर घायल हुए प्रदर्शनकारियों की सही संख्या जानने के लिए यह जरूरी है कि वीडियोज में बल प्रयोग का शिकार हुए प्रदर्शनकारियों की संख्या ज्ञात की जाए। यह पुलिस द्वारा आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग को उचित/अनुचित ठहरने के लिए भी जरूरी है। इस संबंध में मेरा काकरोच जनता पार्टी के संयोजकों से अनुरोध है कि वे पुलिस द्वारा परेशान किए जाने वालों की शिकायतें दर्ज करने वाली वेबसाइट की तरह प्रदर्शन में घायल हुए लोगों की शिकायत तथा संख्या ज्ञात करने के लिए एक दूसरी वेबसाइट लांच करें ताकि अत्यधिक बल प्रयोग के दोषी पुलिस वालों को चिह्नित कर दंडित कराया जा सके जैसे कि उन्होंने घोषणा भी कर रखी है।

अब अगर जंतर मंतर पर घायल हुए दर्शाए गए पुलिस वालों की संख्या पर विचार किया जाए तो यह प्रदर्शन में घायल प्रदर्शनकारियों की संख्या से दुगनी से भी अधिक है जो कि संदिग्ध प्रतीत होती है। मैं अपने पुलिस सेवा के अनुभव के आधार पर कह सकता हूँ कि कई बार पुलिस घटना की गंभीरता अधिक दिखाने के लिए फर्जी चोटें भी बनाती/दिखाती है। अतः दिल्ली पुलिस के घायल हुए अधिकारियों/कर्मचारियों की विश्वसनीयता एवं संख्या सिद्ध करने के लिए उन सभी अधिकारियों /कर्मचारियों की एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड द्वारा डॉक्टरी कराई जाए ताकि चोटों की सत्यता प्रमाणित हो सके। इससे दिल्ली पुलिस को भी बल प्रयोग का औचित्य/आवश्यकता सिद्ध करने में मदद मिलेगी।

यह भी उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस तथा सीआरपी (आरएएफ) गृहमंत्री अमित शाह के सीधे नियन्त्रण में हैं तथा उनके आदेश का पालन करती हैं। अतः जंतर मंतर पर प्रतिबंधित पैलेट गन तथा कील लगे डंडों एवं सादे कपड़ों में बाहरी लोगों द्वारा मारपीट तथा आवश्यकता से अधिक बलप्रयोग की सीधी जिम्मेदारी अमित शाह की है। इसी लिए सभी विपक्षी राजनीतिक पार्टियां, सीजेपी तथा अन्य जन संगठन जंतर मंतर पर पुलिस द्वारा अधिक एवं अवैधानिक बलप्रयोग के लिए उत्तरदायी अमित शाह के इस्तीफे की मांग कर रही हैं जो पूर्णतया वांछनीय है।

मेरे विचार में जंतर मंतर पर बलप्रयोग के औचित्य/आवश्यकता की न्यायिक जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनाई गई कमेटी द्वारा की जानी चाहिए तथा संपूर्ण देश में पुलिस द्वारा बलप्रयोग के संबंध में एसओपी (स्टैन्डर्ड आपरेटिंग प्रोसीज़र) भी निर्धारित किया जाए। इसके साथ ही पुलिस सुधारों को भी पूरी तरह से लागू करवाया जाए। क्योंकि अब देश के अधिकतर राज्यों में बीजेपी की सरकार है, अतः इसमें कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।

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