दिमागी चूलें हिलातीं किताब !

एक ऐसी किताब जिसके बाहर और भीतर, हिंदुस्तान की दो ‌ मशहूर शख्सियतों की करामात‌ देखने और पढ़ने को मिलती है। इसका कवर पेज जिसको कभी दुनिया भर में मशहूर पेंटर, मकबूल फिदा हुसैन जो लोहिया का दीवाना था‌ ने बनाया था। ‌चारसो बारह पन्नों‌ की इस किताब में‌ डॉ राममनोहर लोहिया के तहज़ीबी नजरिये पर लिखी गई इबारतों को कलम बंद किया गया है। आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर द्वारा हाल में प्रकाशित ‘ डॉ *राममनोहर लोहिया की सांस्कृतिक दृष्टि‌’ किताब पर लिखने को मन बेताब था लेकिन जब रमाशंकर सिंह का प्रकाशकीय पढ़ा तो लगा कि‌ इतने कम शब्दों में‌ इससे बेहतर और क्या लिखा जा सकता है?
उसकी बानगी‌ प्रस्तुत है,‌
प्रकाशक की ओर से
यह पुस्तक डॉ० राममनोहर लोहिया के उन विभिन्न लेखों व भाषणों का संकलन है जो कि सम्पूर्ण मानवी व भारतीय सभ्यता की बुनियाद से उपजे तमाम सांस्कृतिक विषयों को गंभीरतापूर्वक रेखांकित और समन्वित करती है। इस निगाह से यह पुस्तक लोहिया की सांस्कृतिक दृष्टि का काफी हद तक दिग्दर्शन कराती है और अपनी तरह की पहली किताब होनी चाहिये। अक्सर ही डॉ० लोहिया की तात्कालिक, उग्र और सिद्धांत-प्रतिबद्ध एवं तीखी प्रतिपक्षी राजनीति उनके व्यापक विचार दर्शन के मूलतत्वों को ओझल करती रही है और यही संगठित प्रयास भी उनके विरोधियों द्वारा होता रहा है। जब मीडिया व जनसंचार के नाम पर सिर्फ छपे हुये अखबार और रेडियो ही होता थे तब भी इन गंभीर विषयों पर विचार विमर्श संभव नहीं होने दिया जाता था। डाक्टर साहब ने अपने युवा कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण शिविरों के भाषणों एवं अपने संपादकत्व में छप रहीं अंग्रेजी पत्रिका ‘मैन काइंड’ व हिंदी पत्रिका ‘जन’ में लिखी टिप्पणियों संपादकीय लेखों में भी सभ्यता व संस्कृति के मूलभूत तत्वों व विषयों पर विस्तार से लिखा व बोला है। एक सक्रिय राजनेता होने के कारण ज्यादातर बोला ही है, लिखा है पर अपेक्षाकृत कम ।

एक प्रख्यात हिंदी लेखक ने मुझसे एक बार कहा कि इनमें से कुछ लेखों व भाषणों को हिंदी के सर्वश्रेष्ठ ललित निबंधों की श्रेणी में रखा जा सकता है। लोहिया की भाषा में नये-नये शब्दों को गढ़ना और लोक प्रचलित शब्दों को हिंदी की

मुख्यधारा में शामिल करना होता था। संस्कृतनिष्ठ हिंदी से वे बचते थे और साधारण बोलचाल की भाषा में ही गूढ़ से गूढ़ विषयों पर अपनी बात कह सकते थे। वे भारत के अकेले दार्शनिक हुये जिन्होंने यूरोपीय चिंतन व विश्लेषण को तीसरी दुनिया के साथ-साथ यूरोप के लिये भी निरर्थक सिद्ध किया। डॉ० लोहिया के चिंतन दर्शन का क्षितिज व्यापक, वैश्विक और भारतीय सांस्कृतिक नीवँ पर तात्कालिकता का नहीं
बल्कि दीर्घकालिक प्रभाव का विचार है जिनसे मानव समाज अपनी आंचलिक राष्ट्रीय अस्मिता को अक्षुण्ण रख कर एकता व समभाव से वैश्विक समता पथ राही बन सकता है।

एक नास्तिक व्यक्ति होते हुये भी उनकी दृष्टि का बौद्धिक हस्तक्षेप उन स विषयों पर हुआ जो साधारण जन मन को प्रभावित करते थे। देश व दुनिया कें तादाद के आस्तिकों व पंथिक आस्थावानों को भी कैसे राष्ट्रीय नवनिर्माण में शा किया जा सकता है इस चिंता का निवारण भी लोहिया प्रणीत सांस्कृतिक सामा नीतियों से संभव होता दिखता है।

यदि पाठक इस पुस्तक की विषय अनुक्रमणिका पर नजर दौड़ायेंगें ते अहसास हो जायेगा कि लोहिया के चिंतन का फलक कितना विस्तारित है जो राष्ट्रों, जातियों, चमड़ी का रंग व लिंग भेद, आभिजात्य व साधारण की दीवा प्रखरता से ध्वस्त कर नये समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता चलता है।

हिंदू धर्म के आख्यान नायकों नायिकाओं यथा राम, कृष्ण, शिव, द्र सावित्री एवं सीता आदि की सर्वथा नवीन व्याख्या डॉ० लोहिया करते हैं स वशिष्ठ व बाल्मीकि की मानसिकता के अंतर को रेखांकित कर सामाजिक वंचित वर्गों के मुकाबले सत्तापोषित मठाधीशों पर मारक प्रहार करते है।

भारतीय मूर्तिशिल्प की विवेचना इतनी सुदंरता से लोहिया करते हैं से बड़े कला समीक्षक व मर्मज्ञ भी हतप्रभ हो जाये। लोहिया हमेशा ही रा प्रशासन व न्याय के मामलों में लोक भाषाओं के पक्षधर रहे और अंग्रेजी भभारत में औपनिवेशिक व चंद लोगों की सामंती गिटपिट जुबान कहकर प्राथमिकता के विरुद्ध जबरदस्त अभियान चलाते रहे जबकि वे स्वयं अंग्रेजी जानकारों में शामिल थे, वे मानते थे कि मातृभाषा में शिक्षा होने से भारत जै

शिक्षा का ज्यादा फैलाव होगा।

डॉ० लोहिया भारत के उत्तर पूर्व इलाके और तिब्बत की गंभीर चिंता है। नगाओं को भारत माता की विद्रोही संतान कहते हुये उन सभी को कैसे विशाल आंगन में अपनी-अपनी खूबसूरती के साथ समाहित करने के सभी पक्षों को ढूंढते है जो भारतीय एकता को गतिमान एवं शक्तिवान बना सकते डॉ० लोहिया भारत भूमि को भारतमाता कहने में बिल्कुल ही नहीं हिचक पृथ्वी को धरती माता मानने में भी। स्थापित औपनिवेशिक मान्यताओं को तोड़ने में लोहिया देर नहीं करते- एवरेस्ट को वे सरगमाथा कहते है की संपूर्ण श्रृंखला पर उनकी तीक्ष्ण और संवेदनशील दृष्टि रहती है। तिब्बत से नेपालऔर बंगाल तक। लोहिया ही हिमालय क्षेत्र को भारत के भविष्य, शुद्धजल एवं फलो की आपूर्ति करने वाला अंचल और शिव का नैसर्गिक क्षेत्र मानकर इतिहास, संस्कृति व साहित्य से बहुत बारीकी से जोड़कर समझाते हैं।

दरअस्ल डॉ० लोहिया की सांस्कृतिक दृष्टि वैश्विक, राष्ट्रीय, सामाजिक व भूराजनीतिक परिस्थितियों से विरक्त नहीं बल्कि सचेत रहती है। वे सदैव अतीत से वंचितों और स्त्रियों के शानदार उदाहरणों को ढूंढकर उन्हें अपने अधिकार सम्पन्न आसन पर विराजमान देखना चाहते हैं। साँवले रंग की द्रौपदी को कृष्णा निरुपित करते हये उसे महाभारत की नायिका ही नहीं भारतीय आख्यान इतिहास की सबसे तेजस्वी, बुद्धिमान व प्रखर औरत मानते हैं।

डॉ० लोहिया तुलसी की ‘रामचरित मानस’ को एक नयी आँख से देखने का आग्रह करते हैं और उस महाकाव्य के व्यापक प्रभाव को पंथ व जाति के श्रेष्ठि वर्ग मे मुक्त कर देते है। रामायण मेला जैसा अभिनव विचार लोहिया ही दे सकते थे। यह कैसा दुर्भाग्य है कि रामायण मेला का आयोजन वे अपने जीवनकाल में मात्र दो ढाई लाख रूपये इकट्ठा न हो सकने के कारण नहीं कर सके।

आमतौर पर भारतीय हिंदू मुसलमान का विषाक्त मन लोहिया की इतिहास दृष्टि से सुधर सकता है जब वे विदेशी आक्रांताओं और कालांतर में भारत में ही बसे-रमे, जनप्रिय बादशाहों, राजाओं में फर्क करना सिखाते हैं। बाबर, गज़नी, गौरी को वे हमलावर, खूनी व लुटेरा घोषित करते है जबकि रज़िया, शेरशाह और जायसी को हर भारतीय का पुरखा।

डॉ० लोहिया अपनी ही विशिष्ट शैली में दार्शनिक प्राकल्पनाओं, इतिहास की प्रेरक शक्तियों, और आधुनिक सभ्यता के अर्थ खोलते हैं। मैं कामना करता हूँ कि यह पुस्तक उन सभी जिज्ञासुओं के लिये उपयोगी साबित हो जो अपनी विशिष्ट भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में ही कई प्रश्नों के उत्तर ढूंढ रहे हैं।

रमाशंकर सिंह
7 अक्टूबर 2025
महर्षि बाल्मीकि जयंती

(प्रस्तुति: राजकुमार जैन)

  • Related Posts

    राम मंदिर चोरी मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिलने में कौन सा आश्चर्य ?
    • TN15TN15
    • August 18, 2026

    आरएसएस को कैसे नाराज कर सकते हैं योगी…

    Continue reading
    नक्सलियों के प्रकार का पाठ पढ़ें प्रधानमंत्री जी से ?
    • TN15TN15
    • August 17, 2026

    हर आंदोलन में नक्सली का एक नया शब्द…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    निशांत कुमार संभालेंगे नेतृत्व! नीतीश की विरासत पर दावा ठोकने वाले उपेंद्र कुशवाहा को JDU से मिला सियासी जवाब

    • By TN15
    • August 22, 2026
    निशांत कुमार संभालेंगे नेतृत्व! नीतीश की विरासत पर दावा ठोकने वाले उपेंद्र कुशवाहा को JDU से मिला सियासी जवाब

    जयपुर: NTA की एक और परीक्षा में गड़बड़ी! बिजली गुल होने से नहीं चले कंप्यूटर

    • By TN15
    • August 22, 2026
    जयपुर: NTA की एक और परीक्षा में गड़बड़ी! बिजली गुल होने से नहीं चले कंप्यूटर

    आरोप और इस्तीफे की मांग पर बोले मनन मिश्रा- ‘बेतुकी और बकवास बातें…’

    • By TN15
    • August 22, 2026
    आरोप और इस्तीफे की मांग पर बोले मनन मिश्रा- ‘बेतुकी और बकवास बातें…’

    श्रीकृष्ण की शरण में एक्ट्रेस स्नेहा वाघ, टूटी 2 शादियों के बाद चुना आध्यात्म, बोलीं- इंसानों की जरूरत नहीं

    • By TN15
    • August 22, 2026
    श्रीकृष्ण की शरण में एक्ट्रेस स्नेहा वाघ, टूटी 2 शादियों के बाद चुना आध्यात्म, बोलीं- इंसानों की जरूरत नहीं

    पाकिस्तान में बढ़ा मुनीर का दबदबा, नई मिलिट्री कमांड में मिली ‘सारी ताकत’, क्या भारत के लिए चिंता का सबब

    • By TN15
    • August 22, 2026
    पाकिस्तान में बढ़ा मुनीर का दबदबा, नई मिलिट्री कमांड में मिली ‘सारी ताकत’, क्या भारत के लिए चिंता का सबब

    कल से एक्शन में दिखेंगे वैभव सूर्यवंशी, चौकों-छ्क्कों की लगाएंगे झड़ी?

    • By TN15
    • August 22, 2026
    कल से एक्शन में दिखेंगे वैभव सूर्यवंशी, चौकों-छ्क्कों की लगाएंगे झड़ी?