इंस्टाग्राम पर बीजेपी को छोड़ा पीछे, एक करोड़ से ऊपर पहुंचे फ़ॉलोअर्स, 10 करोड़ पूरे होने पर होगा बड़ा धमाका
चरण सिंह
मेरी बात अभी अजीब लगेगी पर मेरा अब तक जो राजनीतिक, सामाजिक और पत्रकारिता का अनुभव है। उसके आधार पर कह सकता हूं कि कॉकरोच जनता पार्टी देश की राजनीति में टी तहलका मचाने जा रही यही। न केवल सोशल मीडिया बल्कि मीडिया में भी यह पार्टी छाने जा रही है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके देश में बड़ा इतिहास लिखने की ओर हैं। जो बेरोजगार युवा उपेक्षित हैं। हर ओर से अपमान झेल रहे हैं। वे इस पार्टी से जुड़ रहे हैं। बेरोजगार ही इस पार्टी की ताकत बनेंगे। आने वाले समय में इस पार्टी से सिस्टम से लड़ने वाले पत्रकार, वकील, शिक्षक, सोशल एक्टिविस्ट के भी जुड़ने की संभावना है।
देखने की बात यह है कि केंद्र समेत अधिकतर प्रदेशों में जो बीजेपी की सरकारें हैं। ये सरकारें हिन्दू मुस्लिम के अलावा कुछ करने को तैयार नहीं। विपक्ष को किसी भी तरह से सत्ता चाहिए। जमीनी मुद्दों पर कोई काम करने को तैयार नहीं। ऐसे में कॉकरोच जनता पार्टी के रूप में युवाओं को बड़ा मंच मिल रहा है। दरअसल किसी भी क्रांति में युवाओं का बड़ा योगदान होता है। कॉकरोच जनता पार्टी तो है ही युवाओं की। वह भी सिस्टम से त्रस्त गुस्से से भरे युवाओं की। मतलब देश की राजनीति में कुछ बड़ा होने जा रहा है। यह भी जमीनी हकीकत है कि इस पार्टी की आवाज को दबाने की जितनी भी कोशिश की जाएगी उतनी ही पार्टी को मजबूती मिलेगी।
देखने की बात यह है कि मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के बेरोजगारों की तुलना कॉकरोच से करने के बाद जिस तरह से कॉकरोच जनता पार्टी बनी, जिस तरह से इस पार्टी के बहुत कम समय में एक करोड़ फ़ॉलोअर्स बन गए। इंस्टाग्राम पर देश की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी को पीछे छोड़ दिया। जिस तरह से पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सिस्टम से जोड़कर पार्टी का घोषणापत्र तैयार किया है।
मुख्य रूप से महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण और रिटायर्ड के बाद किसी लाभ के पद न मिलने की बात कही है उससे लग रहा है कि बेरोजगारों की यह पार्टी देश में बदलाव करने जा रही है। कोई भी पार्टी सिस्टम के खिलाफ खड़ा होना नहीं चाहती इस पार्टी का एजेंट ही सिस्टम से लड़ने का है। पार्टी को देश में सभी प्रदेशों में टीम तैयार करनी होगी। सोशल मीडिया के साथ ही सड़क पर भी संघर्ष करना होगा। सिस्टम की खामियों को लोगों के बीच लाना होगा।
दरअसल कॉकरोच जनता पार्टी बनने के पीछे मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की बेरोजगारों पर की गई टिप्पणी है। देश की सर्वोच्च अदालत की एक तल्ख टिप्पणी जिसमें कुछ खास बेरोजगार युवाओं के रवैये को लेकर ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इस कड़े बयान को एक युवा ने अपनी ढाल बना लिया और सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक अंदाज में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की नींव रख दी। यह आइडिया इंटरनेट पर ऐसा क्लिक हुआ कि लोग इस मजेदार और अनोखे विरोध प्रदर्शन से लगातार जुड़ते चले गए।
इंस्टाग्राम पर सत्ताधारी बीजेपी को पछाड़ा
इस डिजिटल पार्टी की ताकत का अंदाजा इसके इंस्टाग्राम हैंडल @cockroachjantaparty के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। इस पेज ने फॉलोअर्स की रेस में दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) को भी बहुत पीछे छोड़ दिया है। ताजा जानकारी के मुताबिक, इसके इंस्टा पेज के फॉलोअर्स की संख्या 10.3 मिलियन (1.03 करोड़) के आंकड़े को पार कर चुकी है, जिसने सोशल मीडिया के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी के इंस्टाग्राम पर फिलहाल 8.7 मिलियन फॉलोअर्स ही हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी को बनाने वाले शख्स का नाम अभिजीत दीपके है, जिनकी उम्र अभी महज 30 साल है। अभिजीत कोई आम इंटरनेट यूजर नहीं हैं, बल्कि वे काफी पढ़े-लिखे और इस क्षेत्र के जानकार हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के पुणे शहर से पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की है। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने मशहूर बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (पीआर) में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है।
डिजिटल नैरेटिव बनाने के माहिर खिलाड़ी
अभिजीत दीपके पेशे से एक पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रैटजिस्ट हैं, जो राजनीतिक दलों के लिए डिजिटल रणनीति तैयार करते हैं। वे इंटरनेट मीडिया पर किसी मुद्दे को हवा देने, जनता तक सही संदेश पहुंचाने और डिजिटल माध्यमों के जरिए राजनीतिक राय को प्रभावित करने के काम में पूरी तरह एक्सपर्ट हैं।
अभिजीत दिपके का कहना है कि हम लगातार देख रहे हैं कि वो जज जिन्हें निष्पक्ष रहना होता है, जिनका सरकार से कुछ लेना-देना नहीं होना चाहिए वो रिटायरमेंट के बाद सरकार से लाभ ले रहे हैं। ये बहुत ख़तरनाक है क्योंकि न्यायपालिका को स्वतंत्र रहना होता है। अगर न्यायपालिका भी सरकार की राह पर चलेगी तो फिर क्या रह जाएगा। फिर लोकतंत्र को कौन बचाएगा।
“दूसरी बात महिला के प्रतिनिधित्व को लेकर है। मैं बचपन से सुनता आया हूं कि महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण मिलेगा लेकिन आज तक ये नहीं हुआ। अगर महिलाओं को आरक्षण देना है तो उन्हें 50 फ़ीसदी आरक्षण दीजिए।