गलगोटिया यूनिवर्सिटी प्रकरण में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर कड़ा विरोध, तत्काल रिहाई की मांग

अखिल भारतीय किसान सभा (जिला गौतम बुद्ध नगर) ने गल्गोटिया यूनिवर्सिटी मके एआई समिट के दौरान कथित रूप से चीनी रोबोट को अपना रोबोट बताकर प्रस्तुत किए जाने के मामले पर गहरा रोष व्यक्त किया है। किसान सभा का मानना है कि इस प्रकार के झूठे दावों से न केवल शैक्षणिक संस्थानों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को भी गहरा आघात पहुंचा है।
उल्लेखनीय है कि इस संदर्भ में एक केंद्रीय मंत्री द्वारा सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय के दावे की सराहना करते हुए पोस्ट किया गया, जिसे तथ्य सामने आने के बाद हटाना पड़ा। यह पूरा प्रकरण अत्यंत गंभीर है और इसकी निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की जानी चाहिए। एवं विश्वविद्यालय के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसी मुद्दे को लेकर प्रशांत भाटी एवं मोहित नागर के नेतृत्व में 28 फरवरी को विश्वविद्यालय के बाहर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की घोषणा की गई थी। किसान सभा का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने दमनात्मक और तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाते हुए प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट एवं दुर्व्यवहार किया तथा उक्त दोनों नेताओं सहित कुल 12 प्रदर्शनकारी छात्रों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
किसान सभा स्पष्ट करती है कि शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। लोकतंत्र में असहमति की आवाज को दबाना संविधान की मूल भावना के विपरीत है।
जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस की तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई की घोर निंदा करते हुए कहा कि यह सरकार जन-अधिकारों की जरा भी चिंता नहीं करती और हर प्रकार की विरोधी आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जिस प्रकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को जेल भेजा जा रहा है, उससे भारत और उत्तर प्रदेश में आपातकाल जैसे हालात की अनुभूति हो रही है। लोकतांत्रिक अधिकारों का इस प्रकार हनन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
किसान सभा की मांगें निम्नलिखित हैं—
गिरफ्तार किए गए सभी छात्रों एवं कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए।
पुलिस की कार्रवाई की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
भविष्य में शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलनों पर दमनात्मक कार्रवाई न की जाए।
किसान सभा ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र रिहाई नहीं की गई तो संगठन व्यापक जनआंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।

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