विनय कुमार सिंन्हा का जाना, समाजवादी आंदोलन के एक वैचारिक, आस्थावान खंबे का ढहना है।

किसी भी विचारधारा के प्रचार प्रसार ‌ की ध्वजा फहराने में ‌ समर्पित, आस्थावान, पर्दे के पीछे रहकर कार्य करने वाले कारकुनो की‌ एक जमात होती है। समाजवादी विचार दर्शन, सिद्धांतों उसके चिंतकों, नेताओं के प्रचार प्रसार के लिए ‌ साथी सिन्हा ‌ तमाम उम्र, पैरों की‌ कमजोरी के बावजूद दौड़ते ही रहे। वे ऐसे कार्यकर्ता, नेता थे जो सियासत की सीढ़ी चढ़कर अपनी दुनियावी कामयाबी पाने की होड़ में न लगकर ‌ इलाहाबाद में ‘लोहिया विचार मंच’ की स्थापना कर वैचारिक परचम लहराने में लगे थे । अक्सर जन सवालों पर अपने साथीयों के साथ सभा, गोष्ठियों, ‌ प्रतिरोध सभाओं का आयोजन करते रहते थे। आपातकाल ‌ का विरोध करते हुए‌ न केवल गिरफ्तार हुए अपनी नौकरी से भी इस्तीफा दे दिया। संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए‌ ‌ जत्थेबंदी कर संघर्ष करने का आह्वान करने के लिए‌ उन्होंने संविधान और लोकतांत्रिक ढांचे पर‌ मंडराते खतरे और चुनौतियों पर परिचर्चा ‌ व संवाद ‌ आयोजित किया। आयोजन की सफलता के लिए वह किस‌ जिम्मेदारी, शिद्दत के‌‌ के साथ जुड़ते थे, इसके लिए एक छोटी सी मिसाल ही काफी है। इस आयोजन की सफलता के लिए उन्होंने ऐसा प्रयास किया मानो‌ उनके अपने परिवार के किसी खुशी के मौके पर अपने अतिथियों के लिए किया जाता है। सम्मेलन में शिरकत करने वाले साथियों को खत लिखकर सूचना तथा अवश्य भाग लेने का इसरार‌ करते हुए छोटी-छोटी ‌ बातो को सूचित करते रहते थे।

11107 Bundelkhand express 9 baje raat ko chalkar सुबह 6बजे इलाहाबाद पहुंच ती है,इलाहाबाद से वापसी के लिए 24दिसमबर की रात 10बजे हम सफर एक्सप्रेस ट्रेन है

इलाहाबाद जंक्शन से शहर की ओर 1नमबर प्लेटफार्म से बाहर निकलकर स्टेशन के सामने नुरूला रोड वाली सड़क पर प्रयाग होटल के कमरा नम्बर जी-5मे ठाकुर गोपाल सिंह ठहरे हैं बहीं पहुंचना है,उसी होटल के नम्बर 3 मे हिम्मत सेठ जी हैँ ,वहां से 10बजे कार्यक्रम मै ले जाने के लिए कार जायगा

शारीरिक व्याधा के बावजूद‌ जिस तरह उन्होंने भाग दौड़ की उसको देखकर मैंने उनको खत लिखा था

साथी विनय कुमार सिन्हा जी,
सुरेंद्र मोहन जी की स्मृति मैं आपने जिस शिद्दत, अथक परिश्रम से कार्यक्रम आयोजित किया था, उसके लिए धन्यवाद करना तो एक औपचारिकता मात्र होगी। वैचारिक आंदोलन को आज के माहौल में याद करना, वह भी तब, जब उस शख्सियत की याद से कोई भौतिक उपलब्धि होने का तो कोई सवाल ही नहीं है। परंतु सोशलिस्ट तहरीक के इन अग्रजों को याद करके हम अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता ही प्रकट करते हैं।
आपने जिस प्रकार बाहर से आने वाले सभी साथियों का इस्तकबाल, रहने, खाने-पीने की व्यवस्था जिस खुलूस से की, उसको भी बुलाया नहीं जा सकता। कार्यक्रम के अंतिम दिन जो फोटोग्राफ तथा भाषण देने की रिकॉर्डिंग हुई थी, अगर उसको आप भेज सकें तो आगे उसको प्रसारित किया जा सकता है।
शुभ.कामनाओं सहित,
आपका साथी
राजकुमार जैन
साथी सिंन्हा ‌ उन विरले साथियों में थे,‌ जो हिंदुस्तान के किसी भी सोशलिस्ट द्वारा ‌ लिखी गई पोस्ट हो अक्सर उसको‌ शेयर ‌ करके अन्य साथियों को सूचित करते रहते थे। ऐसे साथी के जाने‌ से हमारे आंदोलन को ‌ गहरा‌ नुकसान पहुंचा है। मैं अपने‌ श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।

– राजकुमार जैन

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