क्या हुआ था?
सुबह करीब 10:39 AM के आसपास पायलट ने दिल्ली एयरपोर्ट को इंजन की समस्या की सूचना दी।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ने तुरंत ‘Full Emergency’ घोषित कर दी। रनवे 28 को हाई अलर्ट पर रखा गया।
दमकल विभाग, दिल्ली पुलिस, एयरपोर्ट ऑपरेशंस टीम और अन्य एजेंसियां अलर्ट हो गईं। फायर टेंडर्स को रनवे पर तैनात किया गया।
विमान में काफी ईंधन बचा हुआ था (6 घंटे से ज्यादा की endurance), जिससे लैंडिंग में थोड़ी राहत थी।
पायलट की सूझबूझ और स्टैंडर्ड प्रोसेसर के मुताबिक प्रायोरिटी लैंडिंग दी गई। विमान सुबह करीब 10:52-11:00 AM के बीच रनवे 28 पर सुरक्षित लैंड हो गया। सभी 161 लोग बिना किसी चोट के उतारे गए। कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
जोखिम कितना था? यह स्थिति काफी जोखिम भरी थी क्योंकि:
ट्विन-इंजन विमान में एक इंजन फेल होने पर दूसरा इंजन काम करता रहता है, लेकिन लैंडिंग के दौरान वाइब्रेशन, पावर लॉस और कंट्रोल में चुनौती बढ़ जाती है।
Full Emergency घोषित करने का मतलब होता है — एयरपोर्ट पर सबसे गंभीर प्रोटोकॉल एक्टिवेट हो जाते हैं। इसका इस्तेमाल तब होता है जब क्रैश लैंडिंग या बड़ा हादसा होने की आशंका हो।
अगर लैंडिंग के दौरान कोई और समस्या (जैसे हाइड्रोलिक फेलियर या रनवे ओवरशूट) होती, तो नुकसान हो सकता था। लेकिन पायलटों ने बेहतरीन हैंडलिंग की और विमान सुरक्षित उतर गया।
DGCA के अनुसार, इंजन में हाई वाइब्रेशन के बाद शटडाउन हुआ। विमान को अब ग्राउंडेड कर दिया गया है, मेंटेनेंस और जांच चल रही है।
इंडिगो ने बयान में कहा कि “टेक्निकल स्नैग” का पता लगते ही पायलटों ने प्रायोरिटी लैंडिंग का अनुरोध किया और विमान सुरक्षित पहुंच गया। यात्रियों की देखभाल की गई।
क्या कहते हैं अधिकारी?
दिल्ली फायर सर्विस: सुबह 10:53 AM पर कॉल आई, लेकिन तब तक विमान लैंड हो चुका था।
DGCA: जांच शुरू, इंजन CFM-56 टाइप का था।
सौभाग्य से कोई हताहत नहीं हुआ और एयरपोर्ट के बाकी ऑपरेशन सामान्य रहे। यह घटना एविएशन सेफ्टी की अहमियत और पायलटों-क्रू की तैयारियों की याद दिलाती है। अभी तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट इंजन फेलियर के सटीक कारण की नहीं आई है — DGCA और इंडिगो दोनों जांच कर रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा सबसे ऊपर है, और ऐसी घटनाओं से सबक लेकर सुरक्षा मानकों को और मजबूत किया जाता है।








