27 मार्च 2026 (या आसपास के दिनों) में इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान में बड़े हमले किए। इन हमलों का समय रात करीब 8 बजे था। महत्वपूर्ण बात यह है कि हमले पाकिस्तानी दूतावास और पाकिस्तानी राजदूत के आवास के बेहद करीब हुए। इलाका हिल गया, धमाकों की आवाज़ दूर तक गई।
पाकिस्तान को लगा कि यह हमला उनके राजनयिक मिशन की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है। इसी बौखलाहट में पाकिस्तानी पक्ष ने इजरायल को सख्त चेतावनी दी कि वे कतर जैसे देश नहीं हैं जो चुपचाप हमले सह लें और “तगड़ा जवाब” देंगे।
पाकिस्तान क्यों बौखलाया?
राजनयिक सुरक्षा का मुद्दा: पाकिस्तान के तेहरान दूतावास के पास हमला होने से उनके राजदूत, स्टाफ और वहां मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल उठा। पाकिस्तान ने साफ कहा कि अपने राजनयिकों और नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।
क्षेत्रीय गठबंधन और भावनाएं: पाकिस्तान ईरान को “भाईचारे” वाला देश मानता है (दोनों शिया-सुन्नी मुस्लिम बहुल, लेकिन भौगोलिक और कुछ हद तक रणनीतिक निकटता)। इजरायल-ईरान टकराव में पाकिस्तान लगातार इजरायल-अमेरिका की कार्रवाई की निंदा कर रहा है और उसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बता रहा है।
कतर का संदर्भ: कतर पर पहले इजरायल या क्षेत्रीय तनाव के दौरान हमले/दबाव की खबरें आई थीं, और कतर ने अक्सर कूटनीतिक संयम दिखाया (जैसे अमेरिका-ईरान मध्यस्थता में भूमिका)। पाकिस्तान कह रहा है कि वे “चुपचाप सहने वाले” नहीं हैं — यानी अपनी सुरक्षा पर सीधी धमकी पर वे जवाबी कार्रवाई या सख्त रुख अपनाएंगे।
पाकिस्तान की कुल प्रतिक्रिया संदर्भ में
पाकिस्तान ने इजरायल-अमेरिका के ईरान पर हमलों को “अनुचित” और “संप्रभुता का उल्लंघन” बताया।
UN में और द्विपक्षीय स्तर पर निंदा की, क्षेत्रीय युद्ध फैलने की चेतावनी दी।
साथ ही, ईरान के जवाबी हमलों (जो सऊदी, UAE, कतर जैसे गल्फ देशों पर भी पड़े) की भी निंदा की, क्योंकि पाकिस्तान गल्फ देशों (खासकर सऊदी) से आर्थिक और रणनीतिक रूप से बहुत जुड़ा है।
फिलहाल पाकिस्तान मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है — अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत (messages relay) कर रहा है।
वास्तविकता चेक
पाकिस्तान के पास इजरायल तक सीधे “तगड़ा जवाब” देने की सैन्य क्षमता या भौगोलिक पहुंच सीमित है (दोनों देशों के बीच बहुत दूरी)। यह बयान मुख्य रूप से घरेलू ऑडियंस और मुस्लिम दुनिया में “मजबूत स्टैंड” दिखाने के लिए लगता है। पाकिस्तान पहले भी इजरायल विरोधी बयान देता रहा है, लेकिन व्यावहारिक रूप से वह ईरान-इजरायल युद्ध में सीधे कूदने की स्थिति में नहीं है।








