उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र (दिसंबर 2025) के दौरान एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। समाजवादी पार्टी (सपा) के नगीना (बिजनौर) से विधायक मनोज कुमार पारस ने सदन में मोहम्मद अली जिन्ना का जिक्र करते हुए उन्हें “जिन्ना साहब” कहकर संबोधित किया।
विवाद की वजह
विधायक मनोज पारस ने अपने भाषण में तर्क दिया कि कई मुसलमान जिन्ना के आह्वान पर पाकिस्तान नहीं गए थे। जैसे ही “जिन्ना साहब” शब्द उनके मुंह से निकला, सदन में हंगामा मच गया।
भाजपा का विरोध
सत्ता पक्ष (भाजपा) ने इसे जिन्ना का महिमामंडन बताया और तीव्र विरोध किया। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सपा जानबूझकर सांप्रदायिक भावनाएं भड़का रही है और एक विवादित ऐतिहासिक शख्सियत को सम्मान दे रही है। सदन में शोर-शराबा हुआ, और विधानसभा अध्यक्ष से मनोज पारस पर अनुशासनिक कार्रवाई की मांग की गई।
पृष्ठभूमि
यह घटना ऐसे समय हुई जब सदन में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा चल रही थी, जिसमें जिन्ना का ऐतिहासिक विरोध भी उठाया गया था। जिन्ना को भारत में विभाजन के लिए जिम्मेदार माना जाता है, इसलिए उन्हें “साहब” कहना भाजपा के लिए अस्वीकार्य था।







