राजस्थान में भी आवारा कुत्तों और पशुओं को सड़कों से हटाने का आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने 11 अगस्त 2025 को जयपुर, जोधपुर और उदयपुर सहित राज्य के नगर निगमों को सड़कों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों और अन्य पशुओं को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने का आदेश दिया। यह निर्देश कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए दिया, क्योंकि राज्य में कुत्तों के काटने की घटनाओं और सड़कों पर आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिससे कई मौतें भी हुई हैं।
हाईकोर्ट के जस्टिस कुलदीप मठुर और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में पशुओं को न्यूनतम शारीरिक नुकसान सुनिश्चित करना होगा। यदि कोई व्यक्ति या समूह नगर निगम के कर्मचारियों को इस कार्य में बाधा डालता है, तो उनके खिलाफ नगरपालिका कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें सार्वजनिक सेवक के कर्तव्यों में बाधा डालने के लिए FIR दर्ज करना शामिल है।
कोर्ट ने जनता से अपेक्षा जताई कि यदि वे अपनी भावनाओं, धार्मिक मान्यताओं या पशुओं के प्रति प्रेम के कारण उन्हें खाना खिलाना या उनकी देखभाल करना चाहते हैं, तो यह कार्य नगर निगमों या निजी संगठनों द्वारा संचालित कुत्तों के आश्रय स्थलों या गौशालाओं में करना होगा, न कि सार्वजनिक सड़कों पर। इसके अलावा, नगर निगमों को निर्देश दिया गया कि वे शिकायत दर्ज करने के लिए टेलीफोन नंबर, मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी सार्वजनिक करें।
कोर्ट ने जोधपुर नगर निगम को विशेष रूप से AIIMS, जोधपुर और जिला अदालत परिसर जैसे भारी भीड़-भाड़ वाले स्थानों से तत्काल प्रभाव से आवारा पशुओं को हटाने का आदेश दिया। साथ ही, राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग प्राधिकरणों को सड़कों से आवारा पशुओं को हटाने और वाहनों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए नियमित गश्त करने के निर्देश दिए गए।
यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश के बाद आया है, जहां भी इसी तरह की सख्ती का आदेश दिया गया था। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर 2025 को होगी, जिसमें राज्य सरकार और नगर निगमों को कुत्तों के आश्रय स्थलों और गौशालाओं की स्थिति और रखरखाव पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, कोर्ट ने कहा कि सड़कों पर आवारा पशुओं की मौजूदगी न केवल नागरिकों के लिए खतरा है, बल्कि यह राजस्थान जैसे पर्यटन-प्रधान राज्य की छवि को भी प्रभावित करता है।2

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