नोएडा श्रमिक प्रदर्शन मामले में वरिष्ठ पत्रकार सत्यम वर्मा को जमानत मिली, जेल से छूटने में फंसा ये पेंच?

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 में हुए नोएडा श्रमिक प्रदर्शन से जुड़े 11 आपराधिक मामलों में से एक मामले में पत्रकार सत्यम वर्मा को जमानत दे दी है। जस्टिस कृष्ण पहल की अदालत ने यह राहत इसी मामले में पहले जमानत पा चुके सह-आरोपी के साथ समानता के आधार पर दी।

हालांकि, सत्यम वर्मा को फिलहाल जेल से बाहर आने का लाभ नहीं मिलेगा। उनके खिलाफ अन्य मामलों में भी हिरासत जारी है और इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत भी अलग से निरुद्ध किया गया है। हाईकोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर के एक थाने में  सत्यम वर्मा को जमानत दी। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संबंधित कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी मामले में हाईकोर्ट ने 23 जून 2026 को सह-आरोपी शिव कुमार उर्फ शिवा को जमानत दी थी। उस समय अदालत ने गौर किया था कि शिव कुमार का नाम एफआईआर में दर्ज नहीं था और मामला एक भीड़ के खिलाफ दर्ज किया गया था। वह 14 अप्रैल से जेल में था।

सत्यम वर्मा की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने एफआईआर, उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। कोर्ट ने अपराध की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्यों, आरोपी की कथित भूमिका और संभावित सजा समेत अन्य परिस्थितियों को देखते हुए समानता के आधार पर जमानत मंजूर की।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत देते समय मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की गई है।

सत्यम वर्मा ‘मजदूर बिगुल दस्ते’ के संपादक भी हैं। उन्हें 17 अप्रैल को लखनऊ में गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी नोएडा श्रमिक प्रदर्शन से जुड़े अलग-अलग मामलों के सिलसिले में हुई थी। इसके बाद 13 मई को सत्यम वर्मा और छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत भी कार्रवाई की गई।

आकृति चौधरी के मामले में हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NSA के तहत उनकी हिरासत को रद्द कर दिया था। इस दौरान अदालत ने गौतम बुद्ध नगर की तत्कालीन जिलाधिकारी मेधा रूपम की भूमिका और हिरासत आदेश पारित करने के तरीके पर भी कड़ी टिप्पणी की थी।

पुलिस ने लगाए हैं गंभीर आरोप

उत्तर प्रदेश पुलिस का आरोप है कि नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी और अव्यवस्था फैलाने में सत्यम वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका थी। पुलिस के मुताबिक उन्होंने अलग-अलग इलाकों में लोगों को कथित तौर पर उकसाया, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई।

श्रमिकों का प्रदर्शन वेतन बढ़ाने और काम की बेहतर परिस्थितियों की मांग को लेकर हुआ था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 13 अप्रैल को कुछ स्थानों पर वाहनों में आग लगाने, परिसर में जबरन प्रवेश करने और पथराव की घटनाएं हुई थीं। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लाठीचार्ज किया और बड़ी संख्या में श्रमिकों के साथ कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।

एक मामले में जमानत मिलने के बावजूद सत्यम वर्मा की जेल से रिहाई फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि उनके खिलाफ अन्य आपराधिक मामले लंबित हैं और वह NSA के तहत भी निरुद्ध हैं।

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