बीजेपी में केंद्रीय नेतृत्व पर भारी योगी की रणनीति!

चरण सिंह 

देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश में भाजपा अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मार रही है। जिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उदाहरण देकर भाजपा पूरे देश में उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था भुनाती रही है उन्हीं योगी को घेरने के लिए दो डिप्टी सीएम, प्रदेश अध्यक्ष और कई विधायक लगा रखे हैं। जिस भाजपा में मीडिया के सामने बोलने पर प्रतिबंध था, सरकार के खिलाफ जरा सा भी बोलने पर अनुशासनहीनता की कार्रवाई कर दी जाती थी, उस भाजपा में एक मुख्यमंत्री के खिलाफ दो उप मुख्यमंत्री लगातार बयानबाजी कर रहे हैं पर उनका कुछ बिगड़ नहीं रहा है। क्या केंद्र सरकार के खिलाफ कोई बोल सकता था?
ऐसे में प्रश्न उठता है कि यदि लोकसभा चुनाव हार के लिए योगी आदित्यनाथ ही जिम्मेदार है तो फिर उन्हें मुख्यमंत्री पद से क्यों नहीं हटाया जा रहा है? यदि उन्हें उनके पद से नहीं हटाया जा रहा है तो फिर उनको हार का जिम्मेदार ठहराने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है ? प्रधानमंत्री जब जीत का श्रेय ले रहे हैं तो हार की जिम्मेदारी से क्यों बच रहे हैं ? गृहमंत्री क्यों कह रहे हैं कि टिकट तो मैंने बांटे थे इसमें योगी की जिम्मेदारी कहां से बनती है। मजे की बात तो यह है कि योगी आदित्यनाथ के खिलाफ की जा रही लामबंदी के विरोध में भाजपा का कोई नेता भी नहीं बोल रहा है। यह भी जमीनी हकीकत है कि भाजपा में अधिकतर कार्यकर्ता मोदी के बाद योगी को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में योगी आदित्यनाथ पर हाथ डालना बहुत मुश्किल है।
दरअसल यह खेल गृहमंत्री अमित शाह का माना जा रहा है। भाजपा नेतृत्व को यह समझ लेना चाहिए अब भाजपा में नेता मुखर हो रहे हैं। योगी आदित्यनाथ तो तब नहीं दबे जब कोई नेता केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ कान नहीं फड़फड़ाता सकता था। योगी आदित्यनाथ ने मठ से राजनीति की है। वह राजनीति का हर दांव पेंच जानते हैं। ईमानदारी और मेहनत में उनका कोई सानी नहीं। ऐसे में योगी आदित्यनाथ को हाशिए पर धकेलना भाजपा में किसी नेता के बस की बात नहीं है। उत्तर प्रदेश में दोनों डिप्टी सीएम के बिना वह उप चुनाव जीतने का माद्दा रखते हैं। यही वजह रही कि १० उप चुनाव सीटों पर योगी ने जो ३० मंत्री लगाये हैं उस लिस्ट में दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक का नाम नहीं है। मतलब योगी आदित्यनाथ दोनों ही उप मुख्यमंत्रियों की चिड़िया छोड़ दी है।
दिलचस्प बात यह है कि जेपी नड्डा का कार्यकाल पूरा हो चुका है। उनको स्वास्थ्य मंत्री बना दिया गया फिर भी वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हुए हैं। जेपी नड्डा की बांह पकड़कर गृहमंत्री अमित शाह ने उस समय पीछे धकेल दिया था, यह उस समय की घटना है जब वह मोदी के मंत्रिमंडल में भी नहीं थे। अब तो जेपी नड्डा तकनीकी रूप से भी पीएम मोदी के अंडर में काम कर रहे हैं। अब उत्तर प्रदेश के नेताओं पर कार्रवाई करे कौन ? योगी का विरोध करने वाले नेताओं को गृहमंत्री अमित शाह की शह बताई जा रही है। हां यह जरूर कहा जा सकता है कि योगी आदित्यनाथ हार मानने वाले नहीं हैं। यदि उप चुनाव योगी ने जीत लिया तो वह बहुत मजबूत हो जाएंगे। यदि चुनाव हार भी गये तो उनके पास केंद्रीय नेतृत्व के सिर ठीकरा फोड़ने का एक अच्छा मौका होगा। वह कह सकते हैं कि उनके खिलाफ लामबंदी होती रही और केंद्रीय नेतृत्व चुप्पी साधे बैठा रहा। अब तो योगी के पास कहने के लिए एक और बड़ा बहाना मिल गया है कि देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश के साथ आम बजट में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया गया। बाकायदा विपक्ष के नेता पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है।

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